अन-नूर · 23/64
अनुवाद उच्चारण — अन-नूर
إِنَّ الَّذِينَ يَرْمُونَ الْمُحْصَنَاتِ الْغَافِلَاتِ الْمُؤْمِنَاتِ لُعِنُوا فِي الدُّنْيَا وَالْآخِرَةِ وَلَهُمْ عَذَابٌ عَظِيمٌ ۝٢٣
Innal lazeena yarmoonal muhsanaatil ghaafilaatil mu`minaati lu`inoo fid dunyaa wal Aakhirati wa lahum `azaabun `azeem
📖 हिंदी अर्थ
बेशक जो लोग पाक दामन बेख़बर और ईमानदार औरतों पर (ज़िना की) तोहमत लगाते हैं उन पर दुनिया और आख़िरत में (ख़ुदा की) लानत है और उन पर बड़ा (सख्त) अज़ाब होगा
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • يَرْمُونَ – आरोप लगाना, तोहमत लगाना
  • الْمُحْصَنَاتِ – पाकदामन, पवित्र स्त्रियाँ
  • الْغَافِلَاتِ – जो बुराई से बेखबर हों, जिनके दिल में ऐसा ख़याल भी न आया हो
  • لُعِنُوا – रहमत से दूर किए गए, धिक्कारे गए

तफ़सीर:

यह आयत उन लोगों के बारे में है जो पाकदामन, पवित्र और नेक ईमान वाली स्त्रियों पर बुराई का आरोप लगाते हैं। ऐसी स्त्रियाँ जो पूरी तरह पाक हैं, जिनके दिल में भी कभी कोई गंदा ख़याल नहीं आया, जो अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान रखती हैं – ऐसी मासूम और पवित्र स्त्रियों पर जो लोग झूठा इल्ज़ाम लगाते हैं, उनके लिए अल्लाह ने सख्त से सख्त सज़ा का ऐलान किया है।

ऐसे लोग दुनिया में भी अल्लाह की रहमत से महरूम (वंचित) कर दिए जाते हैं और आख़िरत में भी उन पर लानत होती है। दुनिया में उन्हें हद (क़ानूनी सज़ा) दी जाती है – यानी कोड़े मारे जाते हैं, और आख़िरत में उनके लिए भयंकर अज़ाब है। यह सज़ा सिर्फ़ इल्ज़ाम लगाने की नहीं, बल्कि उस बदनामी और तकलीफ़ की है जो उन्होंने मासूम लोगों को पहुँचाई।

इस आयत में सबसे बड़ा सबक यह है कि एक मुसलमान को चाहिए कि वह किसी भी पाकदामन इंसान, ख़ासकर स्त्रियों के बारे में कभी बुरा गुमान न करे, न ही उन पर झूठे आरोप लगाए। यह बात सिर्फ़ आम लोगों के लिए नहीं, बल्कि ख़ुदा के रसूल ﷺ की पाक बीवियों के बारे में भी है – जिनकी पाकी और मासूमियत की गवाही ख़ुद अल्लाह ने दी है।

इस आयत से हमें यह भी सीख मिलती है कि ज़बान की पाकी बहुत ज़रूरी है। एक छोटी सी बात, एक अफ़वाह, एक झूठा इल्ज़ाम – किसी की ज़िंदगी तबाह कर सकता है। इसलिए इस्लाम हमें सिखाता है कि जब तक किसी बात का सबूत न हो, उसे हरगिज़ न फैलाएँ। अल्लाह ने इस आयत में ऐसे लोगों के लिए दुनिया और आख़िरत दोनों में सख्त सज़ा का वादा किया है।

याद रखिए! अल्लाह की रहमत उन लोगों पर होती है जो दूसरों की इज़्ज़त का ख़याल रखते हैं, और जो लोग दूसरों की इज़्ज़त से खेलते हैं, वे अल्लाह की नज़र में सबसे बुरे लोगों में से हैं। आइए, हम अपनी ज़बान को गुनाहों से बचाएँ और किसी के बारे में बुरा कहने से पहले सौ बार सोचें।

🎧 सुनें

📜 आयत 21-25 — अन-नूर

21۞ يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا لَا تَتَّبِعُوا خُطُوَاتِ الشَّيْطَانِ ۚ وَمَن يَتَّبِعْ خُطُوَاتِ الشَّيْطَانِ فَإِنَّهُ يَأْمُرُ بِالْفَحْشَاءِ وَالْمُنكَرِ ۚ وَلَوْلَا فَضْلُ اللَّهِ عَلَيْكُمْ وَرَحْمَتُهُ مَا زَكَىٰ مِنكُم مِّنْ أَحَدٍ أَبَدًا وَلَٰكِنَّ اللَّهَ يُزَكِّي مَن يَشَاءُ ۗ وَاللَّهُ سَمِيعٌ عَلِيمٌ
(तो तुम देखते क्या होता) ऐ ईमानदारों शैतान के क़दम ब क़दम न चलो और जो शख्स शैतान के क़दम ब क़दम चलेगा तो वह यक़ीनन उसे बदकारी और बुरी बात (करने) का हुक्म देगा और अगर तुम पर ख़ुदा का फ़ज़ल (व करम) और उसकी रहमत न होती तो तुममें से कोई भी कभी पाक साफ न होता मगर ख़ुदा तो जिसे चहता है पाक साफ कर देता है और ख़ुदा बड़ा सुनने वाला वाकिफकार है
22وَلَا يَأْتَلِ أُولُو الْفَضْلِ مِنكُمْ وَالسَّعَةِ أَن يُؤْتُوا أُولِي الْقُرْبَىٰ وَالْمَسَاكِينَ وَالْمُهَاجِرِينَ فِي سَبِيلِ اللَّهِ ۖ وَلْيَعْفُوا وَلْيَصْفَحُوا ۗ أَلَا تُحِبُّونَ أَن يَغْفِرَ اللَّهُ لَكُمْ ۗ وَاللَّهُ غَفُورٌ رَّحِيمٌ
और तुममें से जो लोग ज्यादा दौलत और मुक़द्दर वालें है क़राबतदारों और मोहताजों और ख़ुदा की राह में हिजरत करने वालों को कुछ देने (लेने) से क़सम न खा बैठें बल्कि उन्हें चाहिए कि (उनकी ख़ता) माफ कर दें और दरगुज़र करें क्या तुम ये नहीं चाहते हो कि ख़ुदा तुम्हारी ख़ता माफ करे और खुदा तो बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
23إِنَّ الَّذِينَ يَرْمُونَ الْمُحْصَنَاتِ الْغَافِلَاتِ الْمُؤْمِنَاتِ لُعِنُوا فِي الدُّنْيَا وَالْآخِرَةِ وَلَهُمْ عَذَابٌ عَظِيمٌ
बेशक जो लोग पाक दामन बेख़बर और ईमानदार औरतों पर (ज़िना की) तोहमत लगाते हैं उन पर दुनिया और आख़िरत में (ख़ुदा की) लानत है और उन पर बड़ा (सख्त) अज़ाब होगा
24يَوْمَ تَشْهَدُ عَلَيْهِمْ أَلْسِنَتُهُمْ وَأَيْدِيهِمْ وَأَرْجُلُهُم بِمَا كَانُوا يَعْمَلُونَ
जिस दिन उनके ख़िलाफ उनकी ज़बानें और उनके हाथ उनके पावँ उनकी कारस्तानियों की गवाही देगें
25يَوْمَئِذٍ يُوَفِّيهِمُ اللَّهُ دِينَهُمُ الْحَقَّ وَيَعْلَمُونَ أَنَّ اللَّهَ هُوَ الْحَقُّ الْمُبِينُ
उस दिन ख़ुदा उनको ठीक उनका पूरा पूरा बदला देगा और जान जाएँगें कि ख़ुदा बिल्कुल बरहक़ और (हक़ का) ज़ाहिर करने वाला है
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अनुवाद — अन-नूर 23

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Tuesday, August 18, 2026

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