Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- يَرْمُونَ – आरोप लगाना, तोहमत लगाना
- الْمُحْصَنَاتِ – पाकदामन, पवित्र स्त्रियाँ
- الْغَافِلَاتِ – जो बुराई से बेखबर हों, जिनके दिल में ऐसा ख़याल भी न आया हो
- لُعِنُوا – रहमत से दूर किए गए, धिक्कारे गए
तफ़सीर:
यह आयत उन लोगों के बारे में है जो पाकदामन, पवित्र और नेक ईमान वाली स्त्रियों पर बुराई का आरोप लगाते हैं। ऐसी स्त्रियाँ जो पूरी तरह पाक हैं, जिनके दिल में भी कभी कोई गंदा ख़याल नहीं आया, जो अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान रखती हैं – ऐसी मासूम और पवित्र स्त्रियों पर जो लोग झूठा इल्ज़ाम लगाते हैं, उनके लिए अल्लाह ने सख्त से सख्त सज़ा का ऐलान किया है।
ऐसे लोग दुनिया में भी अल्लाह की रहमत से महरूम (वंचित) कर दिए जाते हैं और आख़िरत में भी उन पर लानत होती है। दुनिया में उन्हें हद (क़ानूनी सज़ा) दी जाती है – यानी कोड़े मारे जाते हैं, और आख़िरत में उनके लिए भयंकर अज़ाब है। यह सज़ा सिर्फ़ इल्ज़ाम लगाने की नहीं, बल्कि उस बदनामी और तकलीफ़ की है जो उन्होंने मासूम लोगों को पहुँचाई।
इस आयत में सबसे बड़ा सबक यह है कि एक मुसलमान को चाहिए कि वह किसी भी पाकदामन इंसान, ख़ासकर स्त्रियों के बारे में कभी बुरा गुमान न करे, न ही उन पर झूठे आरोप लगाए। यह बात सिर्फ़ आम लोगों के लिए नहीं, बल्कि ख़ुदा के रसूल ﷺ की पाक बीवियों के बारे में भी है – जिनकी पाकी और मासूमियत की गवाही ख़ुद अल्लाह ने दी है।
इस आयत से हमें यह भी सीख मिलती है कि ज़बान की पाकी बहुत ज़रूरी है। एक छोटी सी बात, एक अफ़वाह, एक झूठा इल्ज़ाम – किसी की ज़िंदगी तबाह कर सकता है। इसलिए इस्लाम हमें सिखाता है कि जब तक किसी बात का सबूत न हो, उसे हरगिज़ न फैलाएँ। अल्लाह ने इस आयत में ऐसे लोगों के लिए दुनिया और आख़िरत दोनों में सख्त सज़ा का वादा किया है।
याद रखिए! अल्लाह की रहमत उन लोगों पर होती है जो दूसरों की इज़्ज़त का ख़याल रखते हैं, और जो लोग दूसरों की इज़्ज़त से खेलते हैं, वे अल्लाह की नज़र में सबसे बुरे लोगों में से हैं। आइए, हम अपनी ज़बान को गुनाहों से बचाएँ और किसी के बारे में बुरा कहने से पहले सौ बार सोचें।
📜 आयत 21-25 — सूरा अन-नूर
अनुवाद — अन-नूर 23
सूरा अन-नूर आयत 23 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : बेशक जो लोग पाक दामन बेख़बर और ईमानदार औरतों पर…सूरा आयत 23/64 — सूरा अन-नूर النور (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-नूर सुनें, सूरा अन-नूर अनुवाद, सूरा अन-नूर mp3, सूरा अन-नूर pdf. आयत 21–25. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


