अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أَطِيعُوا – आज्ञा मानो, अधीन रहो।
- تَوَلَّوْا – मुँह मोड़ो, विमुख हो जाओ।
- مَا حُمِّلَ – जो (ज़िम्मेदारी) उस पर डाली गई (अर्थात् संदेश पहुँचाना)।
- مَا حُمِّلْتُمْ – जो (ज़िम्मेदारी) तुम पर डाली गई (अर्थात् आज्ञा का पालन करना)।
- تَهْتَدُوا – सीधे मार्ग पर चलो, हिदायत पाओ।
- الْبَلَاغُ الْمُبِينُ – स्पष्ट और खुला संदेश पहुँचाना।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! आप लोगों से कह दीजिए कि अल्लाह की आज्ञा का पालन करो और रसूल की आज्ञा का भी पालन करो। यह आज्ञा केवल ज़ुबानी नहीं है, बल्कि दिल से और अमल से होनी चाहिए—यानी जो कुछ अल्लाह और उसके रसूल ने हुक्म दिया है, उसे पूरी तरह मानो और जिससे रोका है, उससे बचो।
लेकिन अगर लोग इस आज्ञा से मुँह मोड़ लें और इसे न मानें, तो समझ लें कि रसूल पर केवल वही ज़िम्मेदारी है जो उसे सौंपी गई थी—यानी अल्लाह का संदेश साफ़-साफ़ पहुँचा देना। उसने यह संदेश पूरा पहुँचा दिया। अब जो ज़िम्मेदारी तुम पर है, वह यह है कि तुम उस संदेश को मानो और उस पर अमल करो। अगर तुम नहीं मानोगे, तो इसका नुक़सान तुम्हीं को होगा, रसूल को नहीं।
और अगर तुम रसूल की आज्ञा का पालन करोगे, तो सीधे रास्ते पर चलोगे। क्योंकि रसूल तुम्हें उसी रास्ते की ओर बुलाते हैं जो अल्लाह तक पहुँचाता है—जो रास्ता खुशहाली, सफलता और जन्नत की ओर ले जाता है। रसूल का काम केवल स्पष्ट रूप से संदेश पहुँचाना है; वह तुम्हें ज़बरदस्ती हिदायत पर नहीं ला सकते। हिदायत पाना तुम्हारे अपने इरादे और अल्लाह की मेहरबानी पर निर्भर है।
दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):
यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह और उसके रसूल की आज्ञा मानना ही हमारी कामयाबी की कुंजी है। जब हम रसूल ﷺ की सुन्नत पर चलते हैं, तो हमारी ज़िंदगी में रोशनी आती है, दिल को सुकून मिलता है और हम सीधे रास्ते पर चलते हैं। याद रखिए, रसूल ﷺ ने हमें कोई ऐसी चीज़ नहीं सिखाई जो हमारे लिए बुरी हो; बल्कि हर हुक्म में हमारी भलाई है। इसलिए आज ही अपनी ज़िंदगी को रसूल ﷺ की सुन्नत के अनुसार ढालने का संकल्प करें—नमाज़ की पाबंदी, सच्चाई, ईमानदारी, अच्छे अख़लाक़ और अल्लाह की याद। यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब बनाएगा। अल्लाह हमें अमल करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 52-56 — अन-नूर
अनुवाद — अन-नूर 54
सूरा अन-नूर आयत 54 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) तुम कह दो कि ख़ुदा की इताअत करो…सूरा आयत 54/64 — अन-नूर النور (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नूर सुनें, अन-नूर अनुवाद, अन-नूर mp3, अन-नूर pdf. आयत 52–56. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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