अन-नूर · 54/64
अनुवाद उच्चारण — अन-नूर
قُلْ أَطِيعُوا اللَّهَ وَأَطِيعُوا الرَّسُولَ ۖ فَإِن تَوَلَّوْا فَإِنَّمَا عَلَيْهِ مَا حُمِّلَ وَعَلَيْكُم مَّا حُمِّلْتُمْ ۖ وَإِن تُطِيعُوهُ تَهْتَدُوا ۚ وَمَا عَلَى الرَّسُولِ إِلَّا الْبَلَاغُ الْمُبِينُ ۝٥٤
Qul atee`ul laaha wa atee`ur Rasoola fa in tawallaw fa innamaa `alaihi maa hummila wa `alaikum maa hummiltum wa in tutee`oohu tahtadoo; wa maa`alar Rasooli illal balaaghul mubeen
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि ख़ुदा की इताअत करो और रसूल की इताअत करो इस पर भी अगर तुम सरताबी करोगे तो बस रसूल पर इतना ही (तबलीग़) वाजिब है जिसके वह ज़िम्मेदार किए गए हैं और जिसके ज़िम्मेदार तुम बनाए गए हो तुम पर वाजिब है और अगर तुम उसकी इताअत करोगे तो हिदायत पाओगे और रसूल पर तो सिर्फ साफ तौर पर (एहकाम का) पहुँचाना फर्ज है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَطِيعُوا – आज्ञा मानो, अधीन रहो।
  • تَوَلَّوْا – मुँह मोड़ो, विमुख हो जाओ।
  • مَا حُمِّلَ – जो (ज़िम्मेदारी) उस पर डाली गई (अर्थात् संदेश पहुँचाना)।
  • مَا حُمِّلْتُمْ – जो (ज़िम्मेदारी) तुम पर डाली गई (अर्थात् आज्ञा का पालन करना)।
  • تَهْتَدُوا – सीधे मार्ग पर चलो, हिदायत पाओ।
  • الْبَلَاغُ الْمُبِينُ – स्पष्ट और खुला संदेश पहुँचाना।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आप लोगों से कह दीजिए कि अल्लाह की आज्ञा का पालन करो और रसूल की आज्ञा का भी पालन करो। यह आज्ञा केवल ज़ुबानी नहीं है, बल्कि दिल से और अमल से होनी चाहिए—यानी जो कुछ अल्लाह और उसके रसूल ने हुक्म दिया है, उसे पूरी तरह मानो और जिससे रोका है, उससे बचो।

लेकिन अगर लोग इस आज्ञा से मुँह मोड़ लें और इसे न मानें, तो समझ लें कि रसूल पर केवल वही ज़िम्मेदारी है जो उसे सौंपी गई थी—यानी अल्लाह का संदेश साफ़-साफ़ पहुँचा देना। उसने यह संदेश पूरा पहुँचा दिया। अब जो ज़िम्मेदारी तुम पर है, वह यह है कि तुम उस संदेश को मानो और उस पर अमल करो। अगर तुम नहीं मानोगे, तो इसका नुक़सान तुम्हीं को होगा, रसूल को नहीं।

और अगर तुम रसूल की आज्ञा का पालन करोगे, तो सीधे रास्ते पर चलोगे। क्योंकि रसूल तुम्हें उसी रास्ते की ओर बुलाते हैं जो अल्लाह तक पहुँचाता है—जो रास्ता खुशहाली, सफलता और जन्नत की ओर ले जाता है। रसूल का काम केवल स्पष्ट रूप से संदेश पहुँचाना है; वह तुम्हें ज़बरदस्ती हिदायत पर नहीं ला सकते। हिदायत पाना तुम्हारे अपने इरादे और अल्लाह की मेहरबानी पर निर्भर है।


दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):

यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह और उसके रसूल की आज्ञा मानना ही हमारी कामयाबी की कुंजी है। जब हम रसूल ﷺ की सुन्नत पर चलते हैं, तो हमारी ज़िंदगी में रोशनी आती है, दिल को सुकून मिलता है और हम सीधे रास्ते पर चलते हैं। याद रखिए, रसूल ﷺ ने हमें कोई ऐसी चीज़ नहीं सिखाई जो हमारे लिए बुरी हो; बल्कि हर हुक्म में हमारी भलाई है। इसलिए आज ही अपनी ज़िंदगी को रसूल ﷺ की सुन्नत के अनुसार ढालने का संकल्प करें—नमाज़ की पाबंदी, सच्चाई, ईमानदारी, अच्छे अख़लाक़ और अल्लाह की याद। यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब बनाएगा। अल्लाह हमें अमल करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 52-56 — अन-नूर

52وَمَن يُطِعِ اللَّهَ وَرَسُولَهُ وَيَخْشَ اللَّهَ وَيَتَّقْهِ فَأُولَٰئِكَ هُمُ الْفَائِزُونَ
और जो शख्स ख़ुदा और उसके रसूल का हुक्म माने और ख़ुदा से डरे और उस (की नाफरमानी) से बचता रहेगा तो ऐसे ही लोग अपनी मुराद को पहुँचेगें
53۞ وَأَقْسَمُوا بِاللَّهِ جَهْدَ أَيْمَانِهِمْ لَئِنْ أَمَرْتَهُمْ لَيَخْرُجُنَّ ۖ قُل لَّا تُقْسِمُوا ۖ طَاعَةٌ مَّعْرُوفَةٌ ۚ إِنَّ اللَّهَ خَبِيرٌ بِمَا تَعْمَلُونَ
और (ऐ रसूल) उन (मुनाफेक़ीन) ने तुम्हारी इताअत की ख़ुदा की सख्त से सख्त क़समें खाई कि अगर तुम उन्हें हुक्म दो तो बिला उज़्र (घर बार छोड़कर) निकल खडे हों- तुम कह दो कि क़समें न खाओ दस्तूर के मुवाफिक़ इताअत (इससे बेहतर) और बेशक तुम जो कुछ करते हो ख़ुदा उससे ख़बरदार है
54قُلْ أَطِيعُوا اللَّهَ وَأَطِيعُوا الرَّسُولَ ۖ فَإِن تَوَلَّوْا فَإِنَّمَا عَلَيْهِ مَا حُمِّلَ وَعَلَيْكُم مَّا حُمِّلْتُمْ ۖ وَإِن تُطِيعُوهُ تَهْتَدُوا ۚ وَمَا عَلَى الرَّسُولِ إِلَّا الْبَلَاغُ الْمُبِينُ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि ख़ुदा की इताअत करो और रसूल की इताअत करो इस पर भी अगर तुम सरताबी करोगे तो बस रसूल पर इतना ही (तबलीग़) वाजिब है जिसके वह ज़िम्मेदार किए गए हैं और जिसके ज़िम्मेदार तुम बनाए गए हो तुम पर वाजिब है और अगर तुम उसकी इताअत करोगे तो हिदायत पाओगे और रसूल पर तो सिर्फ साफ तौर पर (एहकाम का) पहुँचाना फर्ज है
55وَعَدَ اللَّهُ الَّذِينَ آمَنُوا مِنكُمْ وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ لَيَسْتَخْلِفَنَّهُمْ فِي الْأَرْضِ كَمَا اسْتَخْلَفَ الَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ وَلَيُمَكِّنَنَّ لَهُمْ دِينَهُمُ الَّذِي ارْتَضَىٰ لَهُمْ وَلَيُبَدِّلَنَّهُم مِّن بَعْدِ خَوْفِهِمْ أَمْنًا ۚ يَعْبُدُونَنِي لَا يُشْرِكُونَ بِي شَيْئًا ۚ وَمَن كَفَرَ بَعْدَ ذَٰلِكَ فَأُولَٰئِكَ هُمُ الْفَاسِقُونَ
(ऐ ईमानदारों) तुम में से जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और अच्छे अच्छे काम किए उन से ख़ुदा ने वायदा किया कि उन को (एक न एक) दिन रुए ज़मीन पर ज़रुर (अपना) नाएब मुक़र्रर करेगा जिस तरह उन लोगों को नाएब बनाया जो उनसे पहले गुज़र चुके हैं और जिस दीन को उसने उनके लिए पसन्द फरमाया है (इस्लाम) उस पर उन्हें ज़रुर ज़रुर पूरी क़ुदरत देगा और उनके ख़ाएफ़ होने के बाद (उनकी हर आस को) अमन से ज़रुर बदल देगा कि वह (इत्मेनान से) मेरी ही इबादत करेंगे और किसी को हमारा शरीक न बनाएँगे और जो शख्स इसके बाद भी नाशुक्री करे तो ऐसे ही लोग बदकार हैं
56وَأَقِيمُوا الصَّلَاةَ وَآتُوا الزَّكَاةَ وَأَطِيعُوا الرَّسُولَ لَعَلَّكُمْ تُرْحَمُونَ
और (ऐ ईमानदारों) नमाज़ पाबन्दी से पढ़ा करो और ज़कात दिया करो और (दिल से) रसूल की इताअत करो ताकि तुम पर रहम किया जाए
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अनुवाद — अन-नूर 54

सूरा अन-नूर आयत 54 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) तुम कह दो कि ख़ुदा की इताअत करो…

सूरा आयत 54/64 — अन-नूर النور (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नूर सुनें, अन-नूर अनुवाद, अन-नूर mp3, अन-नूर pdf. आयत 52–56. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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