अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- لَيَسْتَخْلِفَنَّهُمْ – अल्लाह उन्हें धरती का उत्तराधिकारी बनाएगा।
- لَيُمَكِّنَنَّ – अवश्य स्थापित करेगा, शक्ति और स्थिरता प्रदान करेगा।
- ارْتَضَى – जिसे उसने पसंद किया और चुना।
- لَيُبَدِّلَنَّهُم – अवश्य बदल देगा (उनकी स्थिति)।
- الْفَاسِقُونَ – आज्ञा का उल्लंघन करने वाले, अवज्ञाकारी।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने अपने सच्चे और ईमानवाले बंदों से एक पवित्र वादा किया है—वह वादा जो कभी टूटता नहीं। जो लोग सच्चे दिल से ईमान लाए और अपने अमल को सुधारकर अच्छे कर्म किए, उनसे अल्लाह ने चार महान नेमतों का वादा किया है:
पहला वादा: अल्लाह उन्हें धरती का उत्तराधिकारी बनाएगा, जैसे उसने पहले के ईमानवालों को बनाया था—जैसे हज़रत दाऊद, सुलेमान और बनी इसराईल को। यानी जब ईमान और अमल-ए-सालिह की शर्त पूरी होगी, तो अल्लाह अपने बंदों को ज़मीन की बागडोर सौंप देता है।
दूसरा वादा: अल्लाह उनके दीन को—जो उसने खुद उनके लिए पसंद किया है, यानी इस्लाम को—शक्ति और स्थिरता प्रदान करेगा। दीन को इस कदर मज़बूत करेगा कि कोई ताकत उसे हिला न सके।
तीसरा वादा: अल्लाह उनके डर को अमन में बदल देगा। याद कीजिए, नबी करीम ﷺ और उनके साथियों ने मक्का में दस साल खौफ की ज़िंदगी बिताई, फिर हिजरत के बाद भी वे हथियारों के साथ सोते थे। लेकिन जब अल्लाह का वादा पूरा हुआ, तो उनका खौफ अमन में बदल गया और दीन ग़ालिब आ गया।
चौथी शर्त: यह सब कुछ उस हालत में मिलेगा जब वे अल्लाह की इबादत करें, उसके साथ किसी को शरीक न करें। यानी तौहीद और इख़लास ही असली कुंजी है।
फिर अल्लाह ने सख्त तनबीह की—जो इन नेमतों के बाद कुफ्र करे (यानी अल्लाह की नेमतों का इनकार करे या उसकी नाफ़रमानी में पड़ जाए), तो वह अल्लाह की आज्ञा से निकल जाने वाला फ़ासिक़ है।
दावती पहलू:
यह आयत हर उस मुसलमान के लिए उम्मीद की किरण है जो अल्लाह पर भरोसा रखता है। यह सिखाती है कि अल्लाह का वादा सच्चा है—बशर्ते हम ईमान और अमल-ए-सालिह की शर्त पूरी करें। आज अगर उम्मत कमज़ोर है, तो इसका हल यही है—ईमान को मज़बूत करो, अमल को सुधारो, और अल्लाह से वादा पूरा कराने का हक़ रखो। यह आयत हमें सिखाती है कि असली इज़्ज़त अल्लाह के पास है, और वह अपने नेक बंदों को कभी अकेला नहीं छोड़ता। अल्लाह से जुड़े रहो, उसकी इबादत को खालिस करो, और देखो कैसे वह तुम्हारे हालात बदल देता है—खौफ को अमन में, कमज़ोरी को ताकत में, और ज़िल्लत को इज़्ज़त में।
📜 आयत 53-57 — अन-नूर
अनुवाद — अन-नूर 55
सूरा अन-नूर आयत 55 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ ईमानदारों) तुम में से जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल…सूरा आयत 55/64 — अन-नूर النور (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नूर सुनें, अन-नूर अनुवाद, अन-नूर mp3, अन-नूर pdf. आयत 53–57. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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