अल-फुरकान · 10/77
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-फुरकान
تَبَارَكَ الَّذِي إِن شَاءَ جَعَلَ لَكَ خَيْرًا مِّن ذَٰلِكَ جَنَّاتٍ تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ وَيَجْعَل لَّكَ قُصُورًا ۝١٠
Tabaarakal lazeee in shaaa`a ja`ala laka khairam min zaalika jannaatin tajree min tahtihal anhaaru wa yaj`al laka qusooraa
📖 हिंदी अर्थ
ख़ुदा तो ऐसा बारबरकत है कि अगर चाहे तो (एक बाग़ क्या चीज़ है) इससे बेहतर बहुतेरे ऐसे बाग़ात तुम्हारे वास्ते पैदा करे जिन के नीचे नहरें जारी हों और (बाग़ात के अलावा उनमें) तुम्हारे वास्ते महल बना दे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • تَبَارَكَ: बहुत बरकत वाला, पवित्र और महान है।
  • جَعَلَ لَكَ: आपके लिए बना दे।
  • خَيْرًا: उससे बेहतर।
  • جَنَّاتٍ: बाग़, बगीचे।
  • تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ: जिनके नीचे नहरें बहती हों।
  • قُصُورًا: ऊँचे महल।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला बहुत बरकत वाला और असीम दया करने वाला है। वही सब कुछ करने पर पूर्ण सामर्थ्य रखता है। जब कुछ लोगों ने आप (ﷺ) से कहा कि आप कोई चमत्कार दिखाएँ या दुनिया के ख़ज़ाने माँगें, तो अल्लाह ने आपको दिलासा दी कि अगर वह चाहे तो आपको उससे कहीं बेहतर चीज़ें इसी दुनिया में दे सकता है — ऐसे बाग़ जिनके नीचे नहरें बहती हों और ऊँचे-ऊँचे महल।

यह अल्लाह की महानता और करम की निशानी है कि वह अपने नबी को दुनिया की चीज़ों से भी बढ़कर नेमतें दे सकता है, लेकिन उसने आख़िरत की नेमतों को उनके लिए बेहतर रखा। यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह पर भरोसा रखें और उसकी दी हुई चीज़ों पर संतुष्ट रहें। अल्लाह जब चाहता है, अपने बंदों को उनकी उम्मीद से बढ़कर देता है।

यह भी सबक है कि दुनिया की चीज़ें चाहे कितनी भी खूबसूरत हों, अल्लाह के पास उससे बेहतर चीज़ें हैं। हमें चाहिए कि हम अल्लाह से दुनिया और आख़िरत दोनों की भलाई माँगें, और याद रखें कि असली कामयाबी अल्लाह की रज़ा में है। यह आयत हमें यह भी बताती है कि अल्लाह के नबी (ﷺ) की शान बहुत ऊँची है, और अल्लाह ने उन्हें दुनिया और आख़िरत दोनों में बड़ी नेमतें दीं। हमें चाहिए कि हम उनकी सुन्नत पर चलें और उनके बताए रास्ते पर साबित रहें। अल्लाह की रहमत और बरकतें असीम हैं — वह चाहे तो किसी को भी कम समय में बड़ी नेमतें दे सकता है। हमें उसकी तरफ़ ही अपना रुख़ रखना चाहिए।



📜 आयत 8-12 — सूरा अल-फुरकान

8أَوْ يُلْقَىٰ إِلَيْهِ كَنزٌ أَوْ تَكُونُ لَهُ جَنَّةٌ يَأْكُلُ مِنْهَا ۚ وَقَالَ الظَّالِمُونَ إِن تَتَّبِعُونَ إِلَّا رَجُلًا مَّسْحُورًا
(कम से कम) इसके पास ख़ज़ाना ही ख़ज़ाना ही (आसमान से) गिरा दिया जाता या (और नहीं तो) उसके पास कोई बाग़ ही होता कि उससे खाता (पीता) और ये ज़ालिम (कुफ्फ़ार मोमिनों से) कहते हैं कि तुम लोग तो बस ऐसे आदमी की पैरवी करते हो जिस पर जादू कर दिया गया है
9انظُرْ كَيْفَ ضَرَبُوا لَكَ الْأَمْثَالَ فَضَلُّوا فَلَا يَسْتَطِيعُونَ سَبِيلًا
(ऐ रसूल) ज़रा देखो तो कि इन लोगों ने तुम्हारे वास्ते कैसी कैसी फबत्तियां गढ़ी हैं और गुमराह हो गए तो अब ये लोग किसी तरह राह पर आ ही नहीं सकते
10تَبَارَكَ الَّذِي إِن شَاءَ جَعَلَ لَكَ خَيْرًا مِّن ذَٰلِكَ جَنَّاتٍ تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ وَيَجْعَل لَّكَ قُصُورًا
ख़ुदा तो ऐसा बारबरकत है कि अगर चाहे तो (एक बाग़ क्या चीज़ है) इससे बेहतर बहुतेरे ऐसे बाग़ात तुम्हारे वास्ते पैदा करे जिन के नीचे नहरें जारी हों और (बाग़ात के अलावा उनमें) तुम्हारे वास्ते महल बना दे
11بَلْ كَذَّبُوا بِالسَّاعَةِ ۖ وَأَعْتَدْنَا لِمَن كَذَّبَ بِالسَّاعَةِ سَعِيرًا
(ये सब कुछ नहीं) बल्कि (सच यूँ है कि) उन लोगों ने क़यामत ही को झूठ समझा है और जिस शख्स ने क़यामत को झूठ समझा उसके लिए हमने जहन्नुम को (दहका के) तैयार कर रखा है
12إِذَا رَأَتْهُم مِّن مَّكَانٍ بَعِيدٍ سَمِعُوا لَهَا تَغَيُّظًا وَزَفِيرًا
जब जहन्नुम इन लोगों को दूर से दखेगी तो (जोश खाएगी और) ये लोग उसके जोश व ख़रोश की आवाज़ सुनेंगें
अल-फुरकानकुरान सूची
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मक्कीअवतरण स्थान
10आयत

अनुवाद — अल-फुरकान 10

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Friday, October 2, 2026

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