Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- عَلَى قَلْبِكَ: आपके हृदय पर — यानी इसे आपके हृदय में इस तरह उतारा गया कि आपने इसे स्मरण रखा, समझा और आत्मसात किया।
- لِتَكُونَ مِنَ الْمُنذِرِينَ: ताकि आप डराने वालों में से हों — यानी उन पैगंबरों में से जो अपनी क़ौम को अल्लाह के अज़ाब से सावधान करते हैं।
विस्तृत व्याख्या:
यह आयत उस महान कुर्तूबी (क़ुरआनी) अनुग्रह की ओर इशारा करती है जो अल्लाह तआला ने अपने आख़िरी नबी मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर किया। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि यह क़ुरआन — जिसमें सच्चे क़िस्से, हिदायतें और नूर भरा है — किसी इंसान या शैतान की बनाई हुई चीज़ नहीं, बल्कि यह सारे जहानों के रब की तरफ़ से उतारा गया है। इसे अमानतदार फ़रिश्ते जिब्रील (अलैहिस्सलाम) ने लेकर उतरे और इसे सीधे आपके — ऐ नबी — हृदय पर उतारा, ताकि आप इसे पूरी तरह याद कर लें, समझ लें और आपका दिल इसके हिफ़्ज़ और फ़हम का केंद्र बन जाए।
यह बात कितनी बड़ी शान और इज़्ज़त की है कि अल्लाह ने अपने नबी के दिल को इस क़ुरआन का मुक़ाम बनाया। यह कोई साधारण किताब नहीं, बल्कि वह ज़िंदा मेमोरी है जो क़यामत तक महफ़ूज़ रहेगी। इसका मक़सद यह था कि आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) उन डराने वालों में से हों जो अपनी क़ौम को अल्लाह के अज़ाब से आगाह करें, और यह पैग़ाम सिर्फ़ एक क़ौम तक सीमित न रहे, बल्कि आपके ज़रिये इंसानों और जिन्नों तक — सब तक पहुँचे।
यह क़ुरआन साफ़ और वाज़ेह अरबी ज़बान में उतारा गया, ताकि लोग इसे आसानी से समझ सकें और अपनी दुनिया और दीन की इस्लाह (सुधार) के लिए इससे रहनुमाई हासिल कर सकें। यह कोई रहस्यमयी या अस्पष्ट किताब नहीं, बल्कि हिदायत का रौशन रास्ता है जो हर उस इंसान के लिए खुला है जो सच्चाई की तलाश में हो।
दावती पहलू:
इस आयत में हमारे लिए बहुत बड़ी नेमत और मोहब्बत की दलील है। अल्लाह ने अपने नबी के दिल पर यह किताब उतारकर हमें बताया कि वह हमें भटका हुआ नहीं छोड़ना चाहता, बल्कि उसने हमारी हिदायत के लिए अपना कलाम भेजा। यह कितनी बड़ी रहमत है कि हमारे पास अल्लाह की तरफ़ से एक ऐसी किताब मौजूद है जो हर ज़माने और हर मकान के लिए रौशनी है। जो इसे पकड़ ले, वह कभी गुमराह नहीं हो सकता। आइए, हम इस क़ुरआन को सिर्फ़ पढ़ने तक सीमित न रखें, बल्कि इसे अपने दिलों में उतारें, इस पर अमल करें और इसे दूसरों तक पहुँचाने का ज़रिया बनें — क्योंकि यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया की भलाई और आख़िरत की कामयाबी तक पहुँचाता है।
📜 आयत 192-196 — सूरा अश-शुआरा
अनुवाद — अश-शुआरा 194
सूरा अश-शुआरा आयत 194 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ताकि तुम भी और पैग़म्बरों की तरहसूरा आयत 194/227 — सूरा अश-शुआरा الشعراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अश-शुआरा सुनें, सूरा अश-शुआरा अनुवाद, सूरा अश-शुआरा mp3, सूरा अश-शुआरा pdf. आयत 192–196. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अश-शुआरा
पवित्र क़ुरआन
Sunday, October 4, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


