अश-शुआरा · 194/227
अनुवाद उच्चारण — अश-शुआरा
عَلَىٰ قَلْبِكَ لِتَكُونَ مِنَ الْمُنذِرِينَ ۝١٩٤
Alaa qalbika litakoona minal munzireen
📖 हिंदी अर्थ
ताकि तुम भी और पैग़म्बरों की तरह
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • عَلَى قَلْبِكَ: आपके हृदय पर — यानी इसे आपके हृदय में इस तरह उतारा गया कि आपने इसे स्मरण रखा, समझा और आत्मसात किया।
  • لِتَكُونَ مِنَ الْمُنذِرِينَ: ताकि आप डराने वालों में से हों — यानी उन पैगंबरों में से जो अपनी क़ौम को अल्लाह के अज़ाब से सावधान करते हैं।

विस्तृत व्याख्या:

यह आयत उस महान कुर्तूबी (क़ुरआनी) अनुग्रह की ओर इशारा करती है जो अल्लाह तआला ने अपने आख़िरी नबी मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर किया। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि यह क़ुरआन — जिसमें सच्चे क़िस्से, हिदायतें और नूर भरा है — किसी इंसान या शैतान की बनाई हुई चीज़ नहीं, बल्कि यह सारे जहानों के रब की तरफ़ से उतारा गया है। इसे अमानतदार फ़रिश्ते जिब्रील (अलैहिस्सलाम) ने लेकर उतरे और इसे सीधे आपके — ऐ नबी — हृदय पर उतारा, ताकि आप इसे पूरी तरह याद कर लें, समझ लें और आपका दिल इसके हिफ़्ज़ और फ़हम का केंद्र बन जाए।

यह बात कितनी बड़ी शान और इज़्ज़त की है कि अल्लाह ने अपने नबी के दिल को इस क़ुरआन का मुक़ाम बनाया। यह कोई साधारण किताब नहीं, बल्कि वह ज़िंदा मेमोरी है जो क़यामत तक महफ़ूज़ रहेगी। इसका मक़सद यह था कि आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) उन डराने वालों में से हों जो अपनी क़ौम को अल्लाह के अज़ाब से आगाह करें, और यह पैग़ाम सिर्फ़ एक क़ौम तक सीमित न रहे, बल्कि आपके ज़रिये इंसानों और जिन्नों तक — सब तक पहुँचे।

यह क़ुरआन साफ़ और वाज़ेह अरबी ज़बान में उतारा गया, ताकि लोग इसे आसानी से समझ सकें और अपनी दुनिया और दीन की इस्लाह (सुधार) के लिए इससे रहनुमाई हासिल कर सकें। यह कोई रहस्यमयी या अस्पष्ट किताब नहीं, बल्कि हिदायत का रौशन रास्ता है जो हर उस इंसान के लिए खुला है जो सच्चाई की तलाश में हो।

दावती पहलू:

इस आयत में हमारे लिए बहुत बड़ी नेमत और मोहब्बत की दलील है। अल्लाह ने अपने नबी के दिल पर यह किताब उतारकर हमें बताया कि वह हमें भटका हुआ नहीं छोड़ना चाहता, बल्कि उसने हमारी हिदायत के लिए अपना कलाम भेजा। यह कितनी बड़ी रहमत है कि हमारे पास अल्लाह की तरफ़ से एक ऐसी किताब मौजूद है जो हर ज़माने और हर मकान के लिए रौशनी है। जो इसे पकड़ ले, वह कभी गुमराह नहीं हो सकता। आइए, हम इस क़ुरआन को सिर्फ़ पढ़ने तक सीमित न रखें, बल्कि इसे अपने दिलों में उतारें, इस पर अमल करें और इसे दूसरों तक पहुँचाने का ज़रिया बनें — क्योंकि यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया की भलाई और आख़िरत की कामयाबी तक पहुँचाता है।

🎧 सुनें

📜 आयत 192-196 — अश-शुआरा

192وَإِنَّهُ لَتَنزِيلُ رَبِّ الْعَالَمِينَ
और (ऐ रसूल) बेशक ये (क़ुरान) सारी ख़ुदायी के पालने वाले (ख़ुदा) का उतारा हुआ है
193نَزَلَ بِهِ الرُّوحُ الْأَمِينُ
जिसे रुहुल अमीन (जिबरील) साफ़ अरबी ज़बान में लेकर तुम्हारे दिल पर नाज़िल हुए है
194عَلَىٰ قَلْبِكَ لِتَكُونَ مِنَ الْمُنذِرِينَ
ताकि तुम भी और पैग़म्बरों की तरह
195بِلِسَانٍ عَرَبِيٍّ مُّبِينٍ
लोगों को अज़ाबे ख़ुदा से डराओ
196وَإِنَّهُ لَفِي زُبُرِ الْأَوَّلِينَ
और बेशक इसकी ख़बर अगले पैग़म्बरों की किताबों मे (भी मौजूद) है
अश-शुआराकुरान सूची
227आयत
मक्कीRevelation
194आयत

अनुवाद — अश-शुआरा 194

सूरा अश-शुआरा आयत 194 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ताकि तुम भी और पैग़म्बरों की तरह

सूरा आयत 194/227 — अश-शुआरा الشعراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अश-शुआरा सुनें, अश-शुआरा अनुवाद, अश-शुआरा mp3, अश-शुआरा pdf. आयत 192–196. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए