अश-शुआरा · 195/227
अनुवाद उच्चारण — अश-शुआरा
بِلِسَانٍ عَرَبِيٍّ مُّبِينٍ ۝١٩٥
Bilisaanin `Arabiyyim mubeen
📖 हिंदी अर्थ
लोगों को अज़ाबे ख़ुदा से डराओ
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • بِلِسَانٍ عَرَبِيٍّ – अरबी भाषा में
  • مُبِينٍ – स्पष्ट, खुला और बयान करने वाला

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उस महान कुर्तुबी (क़ुरआन) की ओर इशारा करती है जो अल्लाह तआला ने अपने आख़िरी नबी हज़रत मुहम्मद ﷺ पर उतारा। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि यह क़ुरआन एक स्पष्ट अरबी ज़बान में उतारा गया है, ताकि लोग इसे आसानी से समझ सकें और इसके पैग़ाम को अपनी समझ में ला सकें।

यह क़ुरआन जिब्रील अमीन (अलैहिस्सलाम) के ज़रिए लाया गया, और इसे अरबी भाषा में इसलिए उतारा गया कि यह सबसे स्पष्ट, सबसे मधुर और सबसे अर्थपूर्ण भाषा है। अल्लाह ने इसे "मुबीन" (स्पष्ट) कहा, यानी ऐसी ज़बान जिसमें कोई पेचीदगी नहीं, कोई अस्पष्टता नहीं, बल्कि हर बात वाज़ेह और रौशन है। जो कोई भी इसे समझना चाहे, वह समझ सकता है।

इस आयत में एक बड़ी रहमत और मेहरबानी छिपी है — अल्लाह ने अपनी किताब को ऐसी ज़बान में उतारा जो लोगों की अपनी ज़बान थी, ताकि वे बिना किसी वसीले के सीधे समझ सकें। यह अल्लाह की तरफ से एक एहसान है कि उसने अपना कलाम उसी भाषा में भेजा जो उस समय के लोगों की समझ में आती थी।

और यही क़ुरआन आज भी उसी अरबी ज़बान में मौजूद है, और अल्लाह ने इसे हिफ़ाज़त का वादा किया है। यह किताब क़यामत तक के लिए हिदायत का ज़रिया है। जो लोग इसे समझना चाहें, उनके लिए यह रौशनी और रहनुमाई का ज़रिया है। अल्लाह तआला ने इसे आसान बना दिया है — ज़बान में आसान, समझ में आसान, और अमल में आसान।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि अल्लाह की रहमत का दरवाज़ा हर उस इंसान के लिए खुला है जो सच्चे दिल से हिदायत चाहता है। क़ुरआन कोई रहस्यमयी किताब नहीं जो सिर्फ ख़ास लोगों के लिए हो, बल्कि यह हर उस शख्स के लिए है जो सीधी राह पर चलना चाहता है। अल्लाह ने इसे साफ़ और स्पष्ट बनाया है ताकि कोई बहाना न बना सके कि हमें समझ नहीं आया। यह किताब दिलों की अंधेरों को दूर करने वाली, ज़िंदगी को रौशन करने वाली और आख़िरत में कामयाबी दिलाने वाली है।

आओ, हम इस क़ुरआन को पढ़ें, समझें और अपनी ज़िंदगी में लागू करें — क्योंकि यही वह ज़रिया है जो हमें अल्लाह की रहमत और जन्नत तक पहुँचाता है।

🎧 सुनें

📜 आयत 193-197 — अश-शुआरा

193نَزَلَ بِهِ الرُّوحُ الْأَمِينُ
जिसे रुहुल अमीन (जिबरील) साफ़ अरबी ज़बान में लेकर तुम्हारे दिल पर नाज़िल हुए है
194عَلَىٰ قَلْبِكَ لِتَكُونَ مِنَ الْمُنذِرِينَ
ताकि तुम भी और पैग़म्बरों की तरह
195بِلِسَانٍ عَرَبِيٍّ مُّبِينٍ
लोगों को अज़ाबे ख़ुदा से डराओ
196وَإِنَّهُ لَفِي زُبُرِ الْأَوَّلِينَ
और बेशक इसकी ख़बर अगले पैग़म्बरों की किताबों मे (भी मौजूद) है
197أَوَلَمْ يَكُن لَّهُمْ آيَةً أَن يَعْلَمَهُ عُلَمَاءُ بَنِي إِسْرَائِيلَ
क्या उनके लिए ये कोई (काफ़ी) निशानी नहीं है कि इसको उलेमा बनी इसराइल जानते हैं
अश-शुआराकुरान सूची
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अनुवाद — अश-शुआरा 195

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Tuesday, August 18, 2026

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