अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يُقِيمُونَ الصَّلَاةَ — नमाज़ को पूरी तरह से, उसके सभी शर्तों और अरकान (रुक्नों) के साथ स्थापित करना।
- يُؤْتُونَ الزَّكَاةَ — अपने माल की अनिवार्य ज़कात उसके हक़दारों को देना।
- يُوقِنُونَ — पक्का विश्वास रखना, किसी भी संदेह से पाक।
तफ़सीर (व्याख्या):
ये आयतें उन लोगों का वर्णन करती हैं जो क़ुरआन की हिदायत पर चलते हैं और उसे सच मानते हैं। ये वे लोग हैं जो नमाज़ को उसके पूरे आदाब और शर्तों के साथ अदा करते हैं — यानी सिर्फ़ रस्म नहीं, बल्कि दिल की उपस्थिति और ख़ुशू (विनम्रता) के साथ। वे अपने माल में से अनिवार्य ज़कात निकालते हैं और उसे उन्हीं मुस्तहिक़ (हक़दार) लोगों को देते हैं जिनके लिए अल्लाह ने निर्धारित किया है। और सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि उन्हें आख़िरत (परलोक) पर पूरा यक़ीन होता है — यानी उन्हें पूरा विश्वास होता है कि मृत्यु के बाद जीवन है, हिसाब-किताब है, जन्नत और जहन्नम है। यह यक़ीन उनके दिलों में इतना गहरा होता है कि वे इसी के अनुसार अपना जीवन ढालते हैं।
यह आयत हमें सिखाती है कि ईमान सिर्फ़ ज़ुबान का दावा नहीं, बल्कि अमल का सबूत है। जो व्यक्ति सच्चे दिल से अल्लाह पर ईमान रखता है, उसकी नमाज़ उसे बुराई से रोकती है, उसकी ज़कात उसके माल को पाक करती है, और आख़िरत का यक़ीन उसे हर अच्छे काम की तरफ़ खींचता है और हर बुरे काम से दूर रखता है। यही वे लोग हैं जिनके लिए अल्लाह ने सफलता और सुंदर प्रतिफल का वादा किया है।
इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि हमें अपनी नमाज़ को सिर्फ़ औपचारिकता नहीं बनाना चाहिए, बल्कि उसे अपने जीवन का असली आधार बनाना चाहिए। ज़कात देकर हमें अपने भाई-बहनों की मदद करनी चाहिए और आख़िरत के यक़ीन को अपने दिलों में इतना मज़बूत करना चाहिए कि हमारा हर काम उसी की रोशनी में हो। यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया में चैन और आख़िरत में कामयाबी देगा। अल्लाह हमें इन गुणों को अपनाने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 1-5 — अन-नमल
अनुवाद — अन-नमल 3
सूरा अन-नमल आयत 3 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : जो नमाज़ को पाबन्दी से अदा करते हैं और ज़कात…सूरा आयत 3/93 — अन-नमल النمل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नमल सुनें, अन-नमल अनुवाद, अन-नमल mp3, अन-नमल pdf. आयत 1–5. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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