अन-नमल · 4/93
अनुवाद उच्चारण — अन-नमल
إِنَّ الَّذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِالْآخِرَةِ زَيَّنَّا لَهُمْ أَعْمَالَهُمْ فَهُمْ يَعْمَهُونَ ۝٤
Innal lazeena laa yu`mimoona bil Aakhirati zaiyannaa lahum a`maalahum fahum ya`mahoon
📖 हिंदी अर्थ
इसमें शक नहीं कि जो लोग आखिरत पर ईमान नहीं रखते (गोया) हमने ख़ुद (उनकी कारस्तानियों को उनकी नज़र में) अच्छा कर दिखाया है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • زَيَّنَّا لَهُمْ أَعْمَالَهُمْ: हमने उनके कर्मों को उनके लिए सुंदर बना दिया।
  • يَعْمَهُونَ: वे भटकते हैं, हैरान और परेशान होकर इधर-उधर भटकते रहते हैं।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन लोगों के बारे में बताती है जो आख़िरत (परलोक) पर ईमान नहीं रखते। जो लोग मृत्यु के बाद के जीवन, हिसाब-किताब, जन्नत और जहन्नम को नहीं मानते, उनके लिए अल्लाह तआला ने उनके बुरे कर्मों को सजा-सँवार कर पेश किया। यानी उनके गलत काम, उनकी नज़र में इतने अच्छे और आकर्षक बना दिए गए कि वे उन्हें बुरा समझते ही नहीं। उन्हें लगता है कि वे जो कर रहे हैं, बिल्कुल सही कर रहे हैं।

इसका मतलब यह नहीं कि अल्लाह उन्हें जबरन गुमराह करता है, बल्कि यह उनके अपने हठ और अहंकार का नतीजा है। जब वे सत्य को ठुकरा देते हैं और अपनी इच्छाओं के पीछे चलते हैं, तो अल्लाह उन्हें उनके हाल पर छोड़ देता है, और उनके बुरे कर्म उन्हें अच्छे दिखने लगते हैं। नतीजा यह होता है कि वे भटकते रहते हैं, हैरान और परेशान रहते हैं, कभी सही रास्ता नहीं पाते। उनकी समझ पर पर्दा पड़ जाता है, और वे हर कदम पर गलती करते चले जाते हैं।

यह आयत हमें एक बहुत बड़ी सीख देती है। इंसान का दिल तभी साफ रहता है और उसे सही-गलत की पहचान तभी होती है, जब वह आख़िरत पर ईमान रखे। जो लोग यह मानते हैं कि उन्हें एक दिन अपने हर अच्छे और बुरे काम का हिसाब देना है, वे अपने कर्मों में सावधानी बरतते हैं। वे जानते हैं कि यह दुनिया ही सब कुछ नहीं, बल्कि एक बड़ी मंज़िल की तैयारी है।

अल्लाह तआला ने इस आयत में हमें आगाह किया है कि जो लोग आख़िरत से ग़ाफ़िल हो जाते हैं, उनकी आँखें बंद हो जाती हैं और वे अपने बुरे कामों को भी अच्छा समझने लगते हैं। यह सबसे बड़ी सज़ा है कि इंसान को अपनी गलती का एहसास ही न हो। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपने ईमान की हिफ़ाज़त करें, आख़िरत पर पूरा यक़ीन रखें, और अपने हर काम को अल्लाह की रज़ा के लिए करें। जो लोग इस दुनिया में अल्लाह की याद से ग़ाफ़िल रहते हैं, वे आख़िरत में सबसे ज़्यादा नुक़सान उठाने वाले होंगे, जबकि जो लोग ईमान और अच्छे कर्मों के साथ जिएँगे, उनके लिए अल्लाह के पास बेहतरीन इनाम है।



📜 आयत 2-6 — अन-नमल

2هُدًى وَبُشْرَىٰ لِلْمُؤْمِنِينَ
(ये) उन ईमानदारों के लिए (अज़सरतापा) हिदायत और (जन्नत की) ख़ुशखबरी है
3الَّذِينَ يُقِيمُونَ الصَّلَاةَ وَيُؤْتُونَ الزَّكَاةَ وَهُم بِالْآخِرَةِ هُمْ يُوقِنُونَ
जो नमाज़ को पाबन्दी से अदा करते हैं और ज़कात दिया करते हैं और यही लोग आख़िरत (क़यामत) का भी यक़ीन रखते हैं
4إِنَّ الَّذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِالْآخِرَةِ زَيَّنَّا لَهُمْ أَعْمَالَهُمْ فَهُمْ يَعْمَهُونَ
इसमें शक नहीं कि जो लोग आखिरत पर ईमान नहीं रखते (गोया) हमने ख़ुद (उनकी कारस्तानियों को उनकी नज़र में) अच्छा कर दिखाया है
5أُولَٰئِكَ الَّذِينَ لَهُمْ سُوءُ الْعَذَابِ وَهُمْ فِي الْآخِرَةِ هُمُ الْأَخْسَرُونَ
तो ये लोग भटकते फिरते हैं- यही वह लोग हैं जिनके लिए (क़यामत में) बड़ा अज़ाब है और यही लोग आख़िरत में सबसे ज्यादा घाटा उठाने वाले हैं
6وَإِنَّكَ لَتُلَقَّى الْقُرْآنَ مِن لَّدُنْ حَكِيمٍ عَلِيمٍ
और (ऐ रसूल) तुमको तो क़ुरान एक बडे वाक़िफकार हकीम की बारगाह से अता किया जाता है
अन-नमलकुरान सूची
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मक्कीRevelation
4आयत

अनुवाद — अन-नमल 4

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Tuesday, August 18, 2026

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