अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- عَلَا: अत्याचार और घमंड के साथ ऊँचा हुआ, सिर उठाया।
- شِيَعًا: अलग-अलग गुट और समूह।
- يَسْتَضْعِفُ: कमज़ोर समझकर उन पर ज़ुल्म करता था।
- يُذَبِّحُ: गला काटकर मार डालता था।
- يَسْتَحْيِي: उन्हें ज़िंदा रखता था, लेकिन उन्हें अपनी सेवा और दासता के लिए इस्तेमाल करता था।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत हमें फ़िरऔन के ज़ुल्म और अत्याचार की कहानी सुनाती है, जो मिस्र की धरती पर सबसे बड़ा ज़ालिम और सरकश शासक था। उसने अपनी ताकत और सत्ता के घमंड में आकर पूरी ज़मीन पर अपना दबदबा बना लिया और वहाँ के लोगों को कई गुटों में बाँट दिया। उसका मकसद यह था कि लोगों को आपस में लड़ाकर कमज़ोर रखे और उन पर अपना नियंत्रण बनाए रखे।
फ़िरऔन ने बनी इस्राईल को सबसे ज़्यादा नीचा दिखाने और कमज़ोर करने की कोशिश की। उसने उनके बेटों को बेरहमी से ज़िबह कर दिया, ताकि उनमें कोई ताकतवर पैदा न हो सके, और उनकी औरतों को ज़िंदा रखकर उन्हें अपनी सेवा और गुलामी के लिए मजबूर किया। यह सब वह इसलिए कर रहा था क्योंकि उसे बताया गया था कि बनी इस्राईल में एक बच्चा पैदा होगा जो उसके राज्य का अंत कर देगा। लेकिन उसने यह नहीं समझा कि अल्लाह की तक़दीर को कोई नहीं रोक सकता। उसका यह ज़ुल्म और अत्याचार सिर्फ उसकी नादानी और अहमकी थी, क्योंकि अल्लाह की योजना के आगे उसकी सारी चालें नाकाम होने वाली थीं।
यह आयत हमें सिखाती है कि ज़ुल्म और अत्याचार कभी भी कामयाब नहीं होता। फ़िरऔन ने जितना भी ज़ुल्म किया, अल्लाह ने उसे और उसकी सारी फौज को समुद्र में डुबोकर उसका अंत कर दिया। अल्लाह हमेशा अपने नेक बंदों की मदद करता है और ज़ालिमों को सज़ा देता है। यह कहानी हमारे लिए एक सबक़ है कि हमें कभी भी घमंड नहीं करना चाहिए और न ही किसी पर ज़ुल्म करना चाहिए। अल्लाह की रहमत और मदद हमेशा उनके साथ होती है जो सब्र करते हैं और उस पर भरोसा रखते हैं।
📜 आयत 2-6 — अल-क़सस
अनुवाद — अल-क़सस 4
सूरा अल-क़सस आयत 4 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : बेशक फिरऔन ने (मिस्र की) सरज़मीन में बहुत सर उठाया…सूरा आयत 4/88 — अल-क़सस القصص (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-क़सस सुनें, अल-क़सस अनुवाद, अल-क़सस mp3, अल-क़सस pdf. आयत 2–6. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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