अल-क़सस · 4/88
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-क़सस
إِنَّ فِرْعَوْنَ عَلَا فِي الْأَرْضِ وَجَعَلَ أَهْلَهَا شِيَعًا يَسْتَضْعِفُ طَائِفَةً مِّنْهُمْ يُذَبِّحُ أَبْنَاءَهُمْ وَيَسْتَحْيِي نِسَاءَهُمْ ۚ إِنَّهُ كَانَ مِنَ الْمُفْسِدِينَ ۝٤
Inna Fir`awna `alaa fil ardi wa ja`ala ahlahaa shiya`ai yastad`ifu taaa`ifatam minhum yuzabbihu abnaaa`ahum wa yastahyee nisaaa`ahum; innahoo kaana minal mufsideen
📖 हिंदी अर्थ
बेशक फिरऔन ने (मिस्र की) सरज़मीन में बहुत सर उठाया था और उसने वहाँ के रहने वालों को कई गिरोह कर दिया था उनमें से एक गिरोह (बनी इसराइल) को आजिज़ कर रखा थ कि उनके बेटों को ज़बाह करवा देता था और उनकी औरतों (बेटियों) को ज़िन्दा छोड़ देता था बेशक वह भी मुफ़सिदों में था

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • عَلَا: अत्याचार और घमंड के साथ ऊँचा हुआ, सिर उठाया।
  • شِيَعًا: अलग-अलग गुट और समूह।
  • يَسْتَضْعِفُ: कमज़ोर समझकर उन पर ज़ुल्म करता था।
  • يُذَبِّحُ: गला काटकर मार डालता था।
  • يَسْتَحْيِي: उन्हें ज़िंदा रखता था, लेकिन उन्हें अपनी सेवा और दासता के लिए इस्तेमाल करता था।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत हमें फ़िरऔन के ज़ुल्म और अत्याचार की कहानी सुनाती है, जो मिस्र की धरती पर सबसे बड़ा ज़ालिम और सरकश शासक था। उसने अपनी ताकत और सत्ता के घमंड में आकर पूरी ज़मीन पर अपना दबदबा बना लिया और वहाँ के लोगों को कई गुटों में बाँट दिया। उसका मकसद यह था कि लोगों को आपस में लड़ाकर कमज़ोर रखे और उन पर अपना नियंत्रण बनाए रखे।

फ़िरऔन ने बनी इस्राईल को सबसे ज़्यादा नीचा दिखाने और कमज़ोर करने की कोशिश की। उसने उनके बेटों को बेरहमी से ज़िबह कर दिया, ताकि उनमें कोई ताकतवर पैदा न हो सके, और उनकी औरतों को ज़िंदा रखकर उन्हें अपनी सेवा और गुलामी के लिए मजबूर किया। यह सब वह इसलिए कर रहा था क्योंकि उसे बताया गया था कि बनी इस्राईल में एक बच्चा पैदा होगा जो उसके राज्य का अंत कर देगा। लेकिन उसने यह नहीं समझा कि अल्लाह की तक़दीर को कोई नहीं रोक सकता। उसका यह ज़ुल्म और अत्याचार सिर्फ उसकी नादानी और अहमकी थी, क्योंकि अल्लाह की योजना के आगे उसकी सारी चालें नाकाम होने वाली थीं।

यह आयत हमें सिखाती है कि ज़ुल्म और अत्याचार कभी भी कामयाब नहीं होता। फ़िरऔन ने जितना भी ज़ुल्म किया, अल्लाह ने उसे और उसकी सारी फौज को समुद्र में डुबोकर उसका अंत कर दिया। अल्लाह हमेशा अपने नेक बंदों की मदद करता है और ज़ालिमों को सज़ा देता है। यह कहानी हमारे लिए एक सबक़ है कि हमें कभी भी घमंड नहीं करना चाहिए और न ही किसी पर ज़ुल्म करना चाहिए। अल्लाह की रहमत और मदद हमेशा उनके साथ होती है जो सब्र करते हैं और उस पर भरोसा रखते हैं।



📜 आयत 2-6 — सूरा अल-क़सस

2تِلْكَ آيَاتُ الْكِتَابِ الْمُبِينِ
(ऐ रसूल) ये वाज़ेए व रौशन किताब की आयतें हैं
3نَتْلُو عَلَيْكَ مِن نَّبَإِ مُوسَىٰ وَفِرْعَوْنَ بِالْحَقِّ لِقَوْمٍ يُؤْمِنُونَ
(जिसमें) हम तुम्हारें सामने मूसा और फिरऔन का वाक़िया ईमानदार लोगों के नफ़े के वास्ते ठीक ठीक बयान करते हैं
4إِنَّ فِرْعَوْنَ عَلَا فِي الْأَرْضِ وَجَعَلَ أَهْلَهَا شِيَعًا يَسْتَضْعِفُ طَائِفَةً مِّنْهُمْ يُذَبِّحُ أَبْنَاءَهُمْ وَيَسْتَحْيِي نِسَاءَهُمْ ۚ إِنَّهُ كَانَ مِنَ الْمُفْسِدِينَ
बेशक फिरऔन ने (मिस्र की) सरज़मीन में बहुत सर उठाया था और उसने वहाँ के रहने वालों को कई गिरोह कर दिया था उनमें से एक गिरोह (बनी इसराइल) को आजिज़ कर रखा थ कि उनके बेटों को ज़बाह करवा देता था और उनकी औरतों (बेटियों) को ज़िन्दा छोड़ देता था बेशक वह भी मुफ़सिदों में था
5وَنُرِيدُ أَن نَّمُنَّ عَلَى الَّذِينَ اسْتُضْعِفُوا فِي الْأَرْضِ وَنَجْعَلَهُمْ أَئِمَّةً وَنَجْعَلَهُمُ الْوَارِثِينَ
और हम तो ये चाहते हैं कि जो लोग रुए ज़मीन में कमज़ोर कर दिए गए हैं उनपर एहसान करे और उन्हींको (लोगों का) पेशवा बनाएँ और उन्हीं को इस (सरज़मीन) का मालिक बनाएँ
6وَنُمَكِّنَ لَهُمْ فِي الْأَرْضِ وَنُرِيَ فِرْعَوْنَ وَهَامَانَ وَجُنُودَهُمَا مِنْهُم مَّا كَانُوا يَحْذَرُونَ
और उन्हीं को रुए ज़मीन पर पूरी क़ुदरत अता करे और फिरऔन और हामान और उन दोनों के लश्करो को उन्हीं कमज़ोरों के हाथ से वह चीज़ें दिखायें जिससे ये लोग डरते थे
अल-क़ससकुरान सूची
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अनुवाद — अल-क़सस 4

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सूरा आयत 4/88 — सूरा अल-क़सस القصص (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-क़सस सुनें, सूरा अल-क़सस अनुवाद, सूरा अल-क़सस mp3, सूरा अल-क़सस pdf. आयत 2–6. हिंदी अर्थ: اردو.





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Monday, September 28, 2026

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