अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- يَسْتَعْجِلُونَكَ – वे आपसे जल्दी माँग रहे हैं
- بِالْعَذَابِ – अज़ाब (यातना) के साथ
- لَمُحِيطَةٌ – अवश्य ही घेरने वाली है
- بِالْكَافِرِينَ – काफ़िरों (इन्कार करने वालों) को
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उन काफ़िरों की हालत बयान करती है जो मज़ाक़ और अहंकार के साथ नबी ﷺ से अज़ाब जल्दी लाने की माँग करते थे। वे कहते थे कि अगर तुम सच्चे हो तो वह अज़ाब लाओ जिसकी तुम हमें धमकी देते हो। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि ये लोग जिस अज़ाब की जल्दी मचा रहे हैं, वह उन पर आकर रहेगा – चाहे दुनिया में हो या आख़िरत में। और सबसे बड़ी बात यह कि जहन्नम की आग तो काफ़िरों को चारों तरफ़ से घेरने वाली है, उससे बचने का कोई रास्ता नहीं, कोई पनाहगाह नहीं, कोई मददगार नहीं।
यह अल्लाह की ओर से एक सख़्त चेतावनी है कि अज़ाब में देरी का मतलब अज़ाब का न होना नहीं है। अल्लाह की सुन्नत (रीति) यह है कि वह बंदों को मौका देता है, ताकि वे तौबा कर लें, लेकिन जब वह पकड़ता है तो कोई उसे रोक नहीं सकता। यह आयत हमें सिखाती है कि हमें अल्लाह की यातना से डरना चाहिए और उसकी रहमत की तरफ़ दौड़ना चाहिए। जो लोग आज अज़ाब का मज़ाक़ उड़ा रहे हैं, क़यामत के दिन वही अज़ाब उन्हें हर तरफ़ से घेर लेगा।
इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि हम कभी अल्लाह की नेमतों को देखकर धोखे में न पड़ें और न ही अज़ाब में देरी को अपनी सफलता समझें। अल्लाह हर काम को अपने हिकमत (बुद्धिमत्ता) भरे वक़्त पर करता है। मोमिन का काम है डर और उम्मीद के बीच जीना – अल्लाह के अज़ाब से डरे और उसकी रहमत की उम्मीद रखे। यही वह रास्ता है जो हमें जहन्नम की आग से बचाकर जन्नत की राह पर चलाता है।
📜 आयत 52-56 — अल-अंकबूत
अनुवाद — अल-अंकबूत 54
सूरा अल-अंकबूत आयत 54 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ये लोग तुमसे अज़ाब की जल्दी करते हैं और ये…सूरा आयत 54/69 — अल-अंकबूत العنكبوت (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अंकबूत सुनें, अल-अंकबूत अनुवाद, अल-अंकबूत mp3, अल-अंकबूत pdf. आयत 52–56. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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