अल-अंकबूत · 54/69
अनुवाद उच्चारण — अल-अंकबूत
يَسْتَعْجِلُونَكَ بِالْعَذَابِ وَإِنَّ جَهَنَّمَ لَمُحِيطَةٌ بِالْكَافِرِينَ ۝٥٤
Yasta`jiloonak bil`azaab; wa inna Jahannama lamuhee tatum bilkaafireen
📖 हिंदी अर्थ
ये लोग तुमसे अज़ाब की जल्दी करते हैं और ये यक़ीनी बात है कि दोज़ख़ काफिरों को (इस तरह) घेर कर रहेगी (कि रुक न सकेंगे)
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • يَسْتَعْجِلُونَكَ – वे आपसे जल्दी माँग रहे हैं
  • بِالْعَذَابِ – अज़ाब (यातना) के साथ
  • لَمُحِيطَةٌ – अवश्य ही घेरने वाली है
  • بِالْكَافِرِينَ – काफ़िरों (इन्कार करने वालों) को

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन काफ़िरों की हालत बयान करती है जो मज़ाक़ और अहंकार के साथ नबी ﷺ से अज़ाब जल्दी लाने की माँग करते थे। वे कहते थे कि अगर तुम सच्चे हो तो वह अज़ाब लाओ जिसकी तुम हमें धमकी देते हो। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि ये लोग जिस अज़ाब की जल्दी मचा रहे हैं, वह उन पर आकर रहेगा – चाहे दुनिया में हो या आख़िरत में। और सबसे बड़ी बात यह कि जहन्नम की आग तो काफ़िरों को चारों तरफ़ से घेरने वाली है, उससे बचने का कोई रास्ता नहीं, कोई पनाहगाह नहीं, कोई मददगार नहीं।

यह अल्लाह की ओर से एक सख़्त चेतावनी है कि अज़ाब में देरी का मतलब अज़ाब का न होना नहीं है। अल्लाह की सुन्नत (रीति) यह है कि वह बंदों को मौका देता है, ताकि वे तौबा कर लें, लेकिन जब वह पकड़ता है तो कोई उसे रोक नहीं सकता। यह आयत हमें सिखाती है कि हमें अल्लाह की यातना से डरना चाहिए और उसकी रहमत की तरफ़ दौड़ना चाहिए। जो लोग आज अज़ाब का मज़ाक़ उड़ा रहे हैं, क़यामत के दिन वही अज़ाब उन्हें हर तरफ़ से घेर लेगा।

इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि हम कभी अल्लाह की नेमतों को देखकर धोखे में न पड़ें और न ही अज़ाब में देरी को अपनी सफलता समझें। अल्लाह हर काम को अपने हिकमत (बुद्धिमत्ता) भरे वक़्त पर करता है। मोमिन का काम है डर और उम्मीद के बीच जीना – अल्लाह के अज़ाब से डरे और उसकी रहमत की उम्मीद रखे। यही वह रास्ता है जो हमें जहन्नम की आग से बचाकर जन्नत की राह पर चलाता है।

🎧 सुनें

📜 आयत 52-56 — अल-अंकबूत

52قُلْ كَفَىٰ بِاللَّهِ بَيْنِي وَبَيْنَكُمْ شَهِيدًا ۖ يَعْلَمُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۗ وَالَّذِينَ آمَنُوا بِالْبَاطِلِ وَكَفَرُوا بِاللَّهِ أُولَٰئِكَ هُمُ الْخَاسِرُونَ
तुम कह दो कि मेरे और तुम्हारे दरमियान गवाही के वास्ते ख़ुदा ही काफी है जो सारे आसमान व ज़मीन की चीज़ों को जानता है-और जिन लोगों ने बातिल को माना और ख़ुदा से इन्कार किया वही लोग बड़े घाटे में रहेंगे
53وَيَسْتَعْجِلُونَكَ بِالْعَذَابِ ۚ وَلَوْلَا أَجَلٌ مُّسَمًّى لَّجَاءَهُمُ الْعَذَابُ وَلَيَأْتِيَنَّهُم بَغْتَةً وَهُمْ لَا يَشْعُرُونَ
और (ऐ रसूल) तुमसे लोग अज़ाब के नाज़िल होने की जल्दी करते हैं और अगर (अज़ाब का) वक्त मुअय्यन न होता तो यक़ीनन उनके पास अब तक अज़ाब आ जाता और (आख़िर एक दिन) उन पर अचानक ज़रुर आ पड़ेगा और उनको ख़बर भी न होगी
54يَسْتَعْجِلُونَكَ بِالْعَذَابِ وَإِنَّ جَهَنَّمَ لَمُحِيطَةٌ بِالْكَافِرِينَ
ये लोग तुमसे अज़ाब की जल्दी करते हैं और ये यक़ीनी बात है कि दोज़ख़ काफिरों को (इस तरह) घेर कर रहेगी (कि रुक न सकेंगे)
55يَوْمَ يَغْشَاهُمُ الْعَذَابُ مِن فَوْقِهِمْ وَمِن تَحْتِ أَرْجُلِهِمْ وَيَقُولُ ذُوقُوا مَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ
जिस दिन अज़ाब उनके सर के ऊपर से और उनके पॉव के नीचे से उनको ढॉके होगा और ख़ुदा (उनसे) फरमाएगा कि जो जो कारस्तानियॉ तुम (दुनिया में) करते थे अब उनका मज़ा चखो
56يَا عِبَادِيَ الَّذِينَ آمَنُوا إِنَّ أَرْضِي وَاسِعَةٌ فَإِيَّايَ فَاعْبُدُونِ
ऐ मेरे ईमानदार बन्दों मेरी ज़मीन तो यक़ीनन कुशादा है तो तुम मेरी ही इबादत करो
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अनुवाद — अल-अंकबूत 54

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Tuesday, August 18, 2026

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