अल-अंकबूत · 55/69
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-अंकबूत
يَوْمَ يَغْشَاهُمُ الْعَذَابُ مِن فَوْقِهِمْ وَمِن تَحْتِ أَرْجُلِهِمْ وَيَقُولُ ذُوقُوا مَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ ۝٥٥
Yawma yaghshaahumul `azaabu min fawqihim wa min tahti arjulim wa yaqoolu zooqoo maa kuntum ta`maloon
📖 हिंदी अर्थ
जिस दिन अज़ाब उनके सर के ऊपर से और उनके पॉव के नीचे से उनको ढॉके होगा और ख़ुदा (उनसे) फरमाएगा कि जो जो कारस्तानियॉ तुम (दुनिया में) करते थे अब उनका मज़ा चखो

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَغْشَاهُمُ: उन्हें ढक लेगा, घेर लेगा
  • مِن فَوْقِهِمْ: उनके ऊपर से
  • وَمِن تَحْتِ أَرْجُلِهِمْ: और उनके पैरों के नीचे से
  • ذُوقُوا: चखो, अनुभव करो

तफसीर:

क़ियामत के दिन जब अज़ाब का समय आएगा, तो अल्लाह तआला काफ़िरों को हर तरफ़ से घेर लेगा। आग का अज़ाब उनके ऊपर से उन्हें ढक लेगा और नीचे से भी उनके पैरों के तलुओं के नीचे से उन्हें घेर लेगा। यानी जहन्नुम की आग उन्हें चारों ओर से घेर लेगी—ऊपर से, नीचे से, दाएँ-बाएँ से। कोई राह-ए-फ़रार न होगी, कोई पनाह न मिलेगी। यह वह दिन होगा जब अल्लाह तआला उन्हें डाँटते हुए, तौबीख़ के अंदाज़ में फ़रमाएगा: "अब चखो उसका मज़ा, जो तुम दुनिया में कमाते रहे थे।"

यानी यह अज़ाब उनके उन आमाल का नतीजा है जो उन्होंने दुनिया में किए—शिर्क, कुफ्र, गुनाह और ज़ुल्म। जिस तरह उन्होंने दुनिया में अल्लाह की नाफ़रमानी में अपने ऊपर और नीचे सब कुछ लगा दिया था, उसी तरह अब अज़ाब उन्हें ऊपर से और नीचे से घेर लेगा। यह अल्लाह का बिल्कुल अदल है—जैसा कर्म, वैसा फल।

दावती पहलू:

यह आयत हमें अल्लाह के अज़ाब से डराती है और साथ ही उसकी रहमत की तरफ़ बुलाती है। अल्लाह तआला ने यह ख़बर हमें दी है ताकि हम दुनिया में रहते हुए अपने आमाल को सुधार लें। जो लोग अल्लाह की इबादत करते हैं और उसके हुक्मों पर चलते हैं, उनके लिए इसके उलट जन्नत की नेअमतें हैं—ऊपर से उन पर जन्नत के साये होंगे और नीचे उनके लिए नर्म-ओ-नाज़ुक बिस्तर बिछे होंगे। यह आयत हमें सिखाती है कि आज का हर अमल कल के अंजाम का ज़रिया है। जो आज अल्लाह की राह में अपने आपको ढाल ले, उसे कल की फिक्र नहीं। अल्लाह की रहमत उन लोगों के लिए है जो उसकी तरफ़ रुजू करें और अपनी ज़िंदगी को उसके हुक्मों के मुताबिक ढालें। यही सबसे बड़ी कामयाबी है।



📜 आयत 53-57 — सूरा अल-अंकबूत

53وَيَسْتَعْجِلُونَكَ بِالْعَذَابِ ۚ وَلَوْلَا أَجَلٌ مُّسَمًّى لَّجَاءَهُمُ الْعَذَابُ وَلَيَأْتِيَنَّهُم بَغْتَةً وَهُمْ لَا يَشْعُرُونَ
और (ऐ रसूल) तुमसे लोग अज़ाब के नाज़िल होने की जल्दी करते हैं और अगर (अज़ाब का) वक्त मुअय्यन न होता तो यक़ीनन उनके पास अब तक अज़ाब आ जाता और (आख़िर एक दिन) उन पर अचानक ज़रुर आ पड़ेगा और उनको ख़बर भी न होगी
54يَسْتَعْجِلُونَكَ بِالْعَذَابِ وَإِنَّ جَهَنَّمَ لَمُحِيطَةٌ بِالْكَافِرِينَ
ये लोग तुमसे अज़ाब की जल्दी करते हैं और ये यक़ीनी बात है कि दोज़ख़ काफिरों को (इस तरह) घेर कर रहेगी (कि रुक न सकेंगे)
55يَوْمَ يَغْشَاهُمُ الْعَذَابُ مِن فَوْقِهِمْ وَمِن تَحْتِ أَرْجُلِهِمْ وَيَقُولُ ذُوقُوا مَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ
जिस दिन अज़ाब उनके सर के ऊपर से और उनके पॉव के नीचे से उनको ढॉके होगा और ख़ुदा (उनसे) फरमाएगा कि जो जो कारस्तानियॉ तुम (दुनिया में) करते थे अब उनका मज़ा चखो
56يَا عِبَادِيَ الَّذِينَ آمَنُوا إِنَّ أَرْضِي وَاسِعَةٌ فَإِيَّايَ فَاعْبُدُونِ
ऐ मेरे ईमानदार बन्दों मेरी ज़मीन तो यक़ीनन कुशादा है तो तुम मेरी ही इबादत करो
57كُلُّ نَفْسٍ ذَائِقَةُ الْمَوْتِ ۖ ثُمَّ إِلَيْنَا تُرْجَعُونَ
हर शख्स (एक न एक दिन) मौत का मज़ा चखने वाला है फिर तुम सब आख़िर हमारी ही तरफ लौटए जाओंगे
अल-अंकबूतकुरान सूची
69आयत
मक्कीअवतरण स्थान
55आयत

अनुवाद — अल-अंकबूत 55

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Thursday, October 1, 2026

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