अल-अंकबूत · 53/69
अनुवाद उच्चारण — अल-अंकबूत
وَيَسْتَعْجِلُونَكَ بِالْعَذَابِ ۚ وَلَوْلَا أَجَلٌ مُّسَمًّى لَّجَاءَهُمُ الْعَذَابُ وَلَيَأْتِيَنَّهُم بَغْتَةً وَهُمْ لَا يَشْعُرُونَ ۝٥٣
Wa yasta`jiloonaka bil`azaab; wa law laaa ajalum musammal lajaaa`ahumul `zaab; wa la yaatiyannahum baghta tanw wa hum laa yash`uroon
📖 हिंदी अर्थ
और (ऐ रसूल) तुमसे लोग अज़ाब के नाज़िल होने की जल्दी करते हैं और अगर (अज़ाब का) वक्त मुअय्यन न होता तो यक़ीनन उनके पास अब तक अज़ाब आ जाता और (आख़िर एक दिन) उन पर अचानक ज़रुर आ पड़ेगा और उनको ख़बर भी न होगी
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَسْتَعْجِلُونَكَ – वे आपसे जल्दी माँगते हैं
  • أَجَلٌ مُسَمًّى – एक निर्धारित समय
  • بَغْتَةً – अचानक
  • لَا يَشْعُرُونَ – उन्हें इसका एहसास नहीं होता

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! ये मुशरिकीन (बहुदेववादी) आपसे ताना मारते हुए अज़ाब (यातना) को जल्दी लाने की माँग करते हैं, और मज़ाक़ के तौर पर कहते हैं कि "अगर तुम सच्चे हो तो हम पर आसमान से पत्थर बरसाओ।" लेकिन उन्हें यह नहीं पता कि अल्लाह की यातना उनके कहने से नहीं आती, बल्कि अल्लाह की इच्छा और उसकी योजना के अनुसार आती है।

अगर अल्लाह ने अपनी बुद्धि और न्याय से उनके अज़ाब के लिए एक निश्चित समय निर्धारित नहीं किया होता, जो न आगे बढ़ता है और न पीछे, तो जिस पल उन्होंने माँग की होती, उसी पल अज़ाब उन पर आ जाता। लेकिन अल्लाह की रहमत और हिकमत (बुद्धिमत्ता) यह है कि उसने हर चीज़ के लिए एक वक़्त मुक़र्रर किया है।

और यह अज़ाब उन पर ज़रूर आएगा, लेकिन अचानक और इस तरह से कि उन्हें इसका ज़रा भी एहसास न होगा। न वे इसे रोक सकेंगे, न उससे बच सकेंगे। यह अज़ाब दुनिया में भी आ सकता है, जैसे बद्र के दिन आया, और आख़िरत में भी आएगा जब मौत उनके पास आएगी और वे अल्लाह के सामने हाज़िर होंगे।

दावती पहलू (आमंत्रण का पहलू):

ऐ अल्लाह के बंदो! यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह की यातना से डरना चाहिए और उसकी रहमत की तरफ भागना चाहिए। अल्लाह ने हमें मोहलत (समय) दी है ताकि हम तौबा करें, अपने गुनाहों से बाज़ आएं और अच्छे कामों की तरफ लौटें। यह मोहलत हमारे लिए रहमत है, लेकिन अगर हम इसे ग़फ़लत में गुज़ार दें, तो अज़ाब अचानक आ सकता है जब हमें इसका एहसास भी न हो।

इसलिए आज ही अपनी ज़िंदगी को सुधारें, नमाज़ क़ायम करें, अल्लाह से माफ़ी माँगें और उसकी राह पर चलें। अल्लाह बहुत मेहरबान है, वह तौबा करने वालों को प्यार करता है और उनके गुनाह माफ़ कर देता है। उसकी रहमत उसके अज़ाब से कहीं बड़ी है।

🎧 सुनें

📜 आयत 51-55 — अल-अंकबूत

51أَوَلَمْ يَكْفِهِمْ أَنَّا أَنزَلْنَا عَلَيْكَ الْكِتَابَ يُتْلَىٰ عَلَيْهِمْ ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَرَحْمَةً وَذِكْرَىٰ لِقَوْمٍ يُؤْمِنُونَ
क्या उनके लिए ये काफी नहीं कि हमने तुम पर क़ुरान नाज़िल किया जो उनके सामने पढ़ा जाता है इसमें शक नहीं कि ईमानदार लोगों के लिए इसमें (ख़ुदा की बड़ी) मेहरबानी और (अच्छी ख़ासी) नसीहत है
52قُلْ كَفَىٰ بِاللَّهِ بَيْنِي وَبَيْنَكُمْ شَهِيدًا ۖ يَعْلَمُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۗ وَالَّذِينَ آمَنُوا بِالْبَاطِلِ وَكَفَرُوا بِاللَّهِ أُولَٰئِكَ هُمُ الْخَاسِرُونَ
तुम कह दो कि मेरे और तुम्हारे दरमियान गवाही के वास्ते ख़ुदा ही काफी है जो सारे आसमान व ज़मीन की चीज़ों को जानता है-और जिन लोगों ने बातिल को माना और ख़ुदा से इन्कार किया वही लोग बड़े घाटे में रहेंगे
53وَيَسْتَعْجِلُونَكَ بِالْعَذَابِ ۚ وَلَوْلَا أَجَلٌ مُّسَمًّى لَّجَاءَهُمُ الْعَذَابُ وَلَيَأْتِيَنَّهُم بَغْتَةً وَهُمْ لَا يَشْعُرُونَ
और (ऐ रसूल) तुमसे लोग अज़ाब के नाज़िल होने की जल्दी करते हैं और अगर (अज़ाब का) वक्त मुअय्यन न होता तो यक़ीनन उनके पास अब तक अज़ाब आ जाता और (आख़िर एक दिन) उन पर अचानक ज़रुर आ पड़ेगा और उनको ख़बर भी न होगी
54يَسْتَعْجِلُونَكَ بِالْعَذَابِ وَإِنَّ جَهَنَّمَ لَمُحِيطَةٌ بِالْكَافِرِينَ
ये लोग तुमसे अज़ाब की जल्दी करते हैं और ये यक़ीनी बात है कि दोज़ख़ काफिरों को (इस तरह) घेर कर रहेगी (कि रुक न सकेंगे)
55يَوْمَ يَغْشَاهُمُ الْعَذَابُ مِن فَوْقِهِمْ وَمِن تَحْتِ أَرْجُلِهِمْ وَيَقُولُ ذُوقُوا مَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ
जिस दिन अज़ाब उनके सर के ऊपर से और उनके पॉव के नीचे से उनको ढॉके होगा और ख़ुदा (उनसे) फरमाएगा कि जो जो कारस्तानियॉ तुम (दुनिया में) करते थे अब उनका मज़ा चखो
अल-अंकबूतकुरान सूची
69आयत
मक्कीRevelation
53आयत

अनुवाद — अल-अंकबूत 53

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Tuesday, August 18, 2026

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