अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أَطِيعُوا (आज्ञा मानो) — यह आज्ञा का शब्द है, जिसका अर्थ है किसी के हुक्म को बिना किसी आपत्ति के स्वीकार करना और उस पर अमल करना।
- اللَّهَ (अल्लाह) — सर्वशक्तिमान अल्लाह, जो सारे जहान का पालनहार है।
- الرَّسُولَ (रसूल) — अल्लाह के आखिरी नबी और रसूल, हज़रत मुहम्मद ﷺ।
- لَعَلَّكُمْ (ताकि तुम) — यह उम्मीद और कारण बताने के लिए आता है।
- تُرْحَمُونَ (तुम पर रहम किया जाए) — अल्लाह की रहमत और दया तुम्हारे शामिल हो।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस पवित्र आयत में ईमानवालों को एक बहुत ही स्पष्ट और अहम हुक्म दे रहा है — कि वे अल्लाह की आज्ञा का पालन करें और उसके रसूल ﷺ की भी आज्ञा का पालन करें। यह आज्ञा केवल नमाज़, रोज़ा, ज़कात जैसी इबादतों तक सीमित नहीं है, बल्कि हर उस काम को शामिल करती है जो अल्लाह ने हुक्म दिया है और हर उस चीज़ से बचना भी शामिल है जिससे अल्लाह ने रोका है — जैसे सूद (ब्याज) खाना, झूठ बोलना, धोखा देना, और दूसरे सारे गुनाह।
इस आयत में अल्लाह ने अपनी आज्ञा और रसूल ﷺ की आज्ञा को एक साथ जोड़ा है, जिससे यह साफ़ हो जाता है कि अल्लाह की आज्ञा और रसूल ﷺ की आज्ञा अलग-अलग नहीं हैं। जो रसूल ﷺ की आज्ञा मानता है, उसने अल्लाह की आज्ञा मानी, और जो रसूल ﷺ की नाफ़रमानी करता है, उसने अल्लाह की नाफ़रमानी की। यही इस्लाम की असली तालीम है — कि अल्लाह और उसके रसूल ﷺ दोनों की इताअत (आज्ञापालन) एक साथ ज़रूरी है।
इसके बाद अल्लाह ने इस हुक्म की वजह बताई: "ताकि तुम पर रहम किया जाए।" यानी अल्लाह की रहमत पाने का सबसे बड़ा ज़रिया यही है — अल्लाह और उसके रसूल ﷺ की आज्ञा का पालन करना। यह रहमत दुनिया में भी मिलती है, जैसे दिल का सुकून, ज़िंदगी में बरकत, और समाज में अमन; और आख़िरत में भी मिलती है, जैसे जन्नत और जहन्नुम की आग से निजात।
इस आयत में एक बहुत प्यारी बशारत (खुशखबरी) है — कि अल्लाह की रहमत उन लोगों के लिए है जो उसकी और उसके रसूल ﷺ की आज्ञा मानते हैं। अल्लाह की रहमत असीमित है, और वह अपने बंदों पर बहुत दयालु है। जब हम उसकी आज्ञा मानते हैं, तो हम उसकी रहमत के सबसे करीब हो जाते हैं।
प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सिखाती है कि सच्ची कामयाबी और सुकून का रास्ता सिर्फ़ अल्लाह और उसके रसूल ﷺ की आज्ञा में है। आज का इंसान सुकून की तलाश में इधर-उधर भटकता है, लेकिन असली सुकून इसी में है कि हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह और उसके रसूल ﷺ के बताए हुए तरीके पर चलाएँ। यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया की बेहतरी और आख़िरत की नजात दोनों तक पहुँचाता है। अल्लाह हम सबको इस तौफ़ीक़ अता करे — आमीन।
📜 आयत 130-134 — आल-इमरान
अनुवाद — आल-इमरान 132
सूरा आल-इमरान आयत 132 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और ख़ुदा और रसूल की फ़रमाबरदारी करो ताकि तुम पर…सूरा आयत 132/200 — आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: आल-इमरान सुनें, आल-इमरान अनुवाद, आल-इमरान mp3, आल-इमरान pdf. आयत 130–134. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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