आल-इमरान · 133/200
अनुवाद उच्चारण — आल-इमरान
۞ وَسَارِعُوا إِلَىٰ مَغْفِرَةٍ مِّن رَّبِّكُمْ وَجَنَّةٍ عَرْضُهَا السَّمَاوَاتُ وَالْأَرْضُ أُعِدَّتْ لِلْمُتَّقِينَ ۝١٣٣
Wa saari`ooo ilaa maghfiratim mir Rabbikum wa Jannatin arduhassamaawaatu wal ardu u`iddat lilmuttaqeen
📖 हिंदी अर्थ
और अपने परवरदिगार के (सबब) बख्शिश और जन्नत की तरफ़ दौड़ पड़ो जिसकी (वुसअत सारे) आसमान और ज़मीन के बराबर है और जो परहेज़गारों के लिये मुहय्या की गयी है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • سَارِعُوا: जल्दी करो, दौड़ो, प्रतिस्पर्धा करो।
  • مَغْفِرَةٍ: क्षमा, पापों से मुक्ति।
  • عَرْضُهَا: उसकी चौड़ाई या विस्तार।
  • أُعِدَّتْ: तैयार की गई है।
  • لِلْمُتَّقِينَ: उन लोगों के लिए जो अल्लाह से डरते हैं और उसकी अवज्ञा से बचते हैं।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला अपने बंदों से कहता है कि वे अपने रब की ओर से क्षमा प्राप्त करने के लिए दौड़ें और जल्दी करें। यह क्षमा उन कर्मों के माध्यम से मिलती है जो अल्लाह को प्रसन्न करते हैं, जैसे नमाज़, रोज़ा, ज़कात, हज, सच्चाई, अमानतदारी, माता-पिता की सेवा, रिश्तेदारों से अच्छा व्यवहार, और अन्य नेक कार्य। यह आज्ञा केवल धीरे-धीरे करने की नहीं है, बल्कि इसमें जल्दी और प्रतिस्पर्धा का भाव है, क्योंकि मृत्यु का समय ज्ञात नहीं है और अवसर हाथ से निकल सकता है।

साथ ही, अल्लाह उस जन्नत की ओर दौड़ने का आदेश देता है जिसकी चौड़ाई आसमानों और ज़मीन के बराबर है। यह उसकी विशालता और महानता को दर्शाता है, और यह बताता है कि यह जन्नत कितनी विस्तृत और अद्भुत है। इसका उल्लेख करके अल्लाह बंदों को इसकी ओर प्रोत्साहित करता है। यह जन्नत उन लोगों के लिए तैयार की गई है जो अल्लाह से डरते हैं, उसके आदेशों का पालन करते हैं और उसकी मना की हुई चीज़ों से बचते हैं। यह ईश्वरीय कृपा और दया का प्रमाण है कि अल्लाह ने अपने डरने वाले बंदों के लिए ऐसा शानदार और स्थायी ठिकाना तैयार किया है।

फ़ायदे (लाभ और शिक्षाएँ):

  1. इस आयत से हमें सीख मिलती है कि नेक कार्यों में देरी नहीं करनी चाहिए, बल्कि जल्दी और उत्साह से करने चाहिए, क्योंकि हमें नहीं पता कि कब हमारा समय समाप्त हो जाए।
  2. अल्लाह की क्षमा और जन्नत प्राप्त करने का मार्ग उसकी आज्ञाकारिता और उसके डर में है। जो व्यक्ति अल्लाह से डरता है, वही इन महान नेमतों का हकदार बनता है।
  3. जन्नत की विशालता का वर्णन हमें बताता है कि अल्लाह की देन कितनी महान और असीम है। यह हमें दुनिया की छोटी-मोटी चीज़ों से ऊपर उठकर आख़िरत की ओर देखने की प्रेरणा देता है।
  4. यह आयत मुसलमानों को आशा और उत्साह देती है कि अल्लाह की रहमत और क्षमा का द्वार हमेशा खुला है, बशर्ते वे सच्चे दिल से उसकी ओर लौटें और नेक कर्म करें।
  5. यह भी सिखाती है कि इस्लाम में कर्मों का महत्व है, और केवल दावा करने से नहीं, बल्कि अमल और तक़वा से ही सफलता मिलती है।


📜 आयत 131-135 — आल-इमरान

131وَاتَّقُوا النَّارَ الَّتِي أُعِدَّتْ لِلْكَافِرِينَ
और जहन्नुम की उस आग से डरो जो काफ़िरों के लिए तैयार की गयी है
132وَأَطِيعُوا اللَّهَ وَالرَّسُولَ لَعَلَّكُمْ تُرْحَمُونَ
और ख़ुदा और रसूल की फ़रमाबरदारी करो ताकि तुम पर रहम किया जाए
133۞ وَسَارِعُوا إِلَىٰ مَغْفِرَةٍ مِّن رَّبِّكُمْ وَجَنَّةٍ عَرْضُهَا السَّمَاوَاتُ وَالْأَرْضُ أُعِدَّتْ لِلْمُتَّقِينَ
और अपने परवरदिगार के (सबब) बख्शिश और जन्नत की तरफ़ दौड़ पड़ो जिसकी (वुसअत सारे) आसमान और ज़मीन के बराबर है और जो परहेज़गारों के लिये मुहय्या की गयी है
134الَّذِينَ يُنفِقُونَ فِي السَّرَّاءِ وَالضَّرَّاءِ وَالْكَاظِمِينَ الْغَيْظَ وَالْعَافِينَ عَنِ النَّاسِ ۗ وَاللَّهُ يُحِبُّ الْمُحْسِنِينَ
जो ख़ुशहाली और कठिन वक्त में भी (ख़ुदा की राह पर) ख़र्च करते हैं और गुस्से को रोकते हैं और लोगों (की ख़ता) से दरगुज़र करते हैं और नेकी करने वालों से अल्लाह उलफ़त रखता है
135وَالَّذِينَ إِذَا فَعَلُوا فَاحِشَةً أَوْ ظَلَمُوا أَنفُسَهُمْ ذَكَرُوا اللَّهَ فَاسْتَغْفَرُوا لِذُنُوبِهِمْ وَمَن يَغْفِرُ الذُّنُوبَ إِلَّا اللَّهُ وَلَمْ يُصِرُّوا عَلَىٰ مَا فَعَلُوا وَهُمْ يَعْلَمُونَ
और लोग इत्तिफ़ाक़ से कोई बदकारी कर बैठते हैं या आप अपने ऊपर जुल्म करते हैं तो ख़ुदा को याद करते हैं और अपने गुनाहों की माफ़ी मॉगते हैं और ख़ुदा के सिवा गुनाहों का बख्शने वाला और कौन है और जो (क़ूसूर) वह (नागहानी) कर बैठे तो जानबूझ कर उसपर हट नहीं करते
आल-इमरानकुरान सूची
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अनुवाद — आल-इमरान 133

सूरा आल-इमरान आयत 133 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और अपने परवरदिगार के (सबब) बख्शिश और जन्नत की तरफ़…

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Tuesday, August 18, 2026

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