आल-इमरान · 131/200
अनुवाद उच्चारण — सूरा आल-इमरान
وَاتَّقُوا النَّارَ الَّتِي أُعِدَّتْ لِلْكَافِرِينَ ۝١٣١
Wattaqun Naaral lateee u`iddat lilkaafireen
📖 हिंदी अर्थ
और जहन्नुम की उस आग से डरो जो काफ़िरों के लिए तैयार की गयी है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • وَاتَّقُوا: डरो, बचाव करो, अपने आप को सुरक्षित रखो।
  • النَّارَ: आग, यहाँ अर्थ है जहन्नम की आग।
  • أُعِدَّتْ: तैयार की गई है।
  • لِلْكَافِرِينَ: काफिरों (इनकार करने वालों) के लिए।

तफसीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला अपने ईमानवाले बंदों को नसीहत करते हुए फरमाता है कि उस आग से डरो और अपने आप को उससे बचाओ, जो अल्लाह ने काफिरों के लिए तैयार की है। यानी ऐसे कामों से बचो जो तुम्हें उस आग तक ले जाएँ, और ऐसे अमल करो जो तुम्हें उससे दूर रखें। यह आग बहुत भयानक है, और अल्लाह ने इसे उन लोगों के लिए तैयार किया है जिन्होंने उसका इनकार किया और उसके हुक्मों को नहीं माना। यह आयत मोमिनों को सख्त तनबीह करती है कि अगर वे अल्लाह की आज्ञा का उल्लंघन करेंगे और उसकी नाफरमानी करेंगे, तो वे भी उसी आग के मुस्तहिक बन सकते हैं। यह कुरआन की सबसे डराने वाली आयतों में से एक है, क्योंकि इसमें मोमिनों को काफिरों की सज़ा से डराया गया है, अगर वे तक़वा (परहेज़गारी) न अपनाएँ।

फ़ायदे (सबक):

  1. अल्लाह की आग से डरना ईमान की निशानी है, और यह डर इंसान को गुनाहों से रोकता है।
  2. तक़वा (परहेज़गारी) ही वह ढाल है जो इंसान को जहन्नम की आग से बचाती है।
  3. यह आयत बताती है कि अल्लाह की रहमत के साथ-साथ उसका अज़ाब भी हक़ीक़त है, और मोमिन को हमेशा डर और उम्मीद के बीच रहना चाहिए।
  4. नेक अमल करना और गुनाहों से बचना ही वह रास्ता है जो इंसान को जहन्नम से जन्नत तक पहुँचाता है।
  5. यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह का डर इंसान को दुनिया में भी सुकून देता है, क्योंकि वह जानता है कि वह उस चीज़ से बच रहा है जो उसके लिए तबाही का सबब है।


📜 आयत 129-133 — सूरा आल-इमरान

129وَلِلَّهِ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ ۚ يَغْفِرُ لِمَن يَشَاءُ وَيُعَذِّبُ مَن يَشَاءُ ۚ وَاللَّهُ غَفُورٌ رَّحِيمٌ
और जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है सब ख़ुदा ही का है जिसको चाहे बख्शे और जिसको चाहे सज़ा करे और ख़ुदा बड़ा बख्शने वाला मेहरबार है
130يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا لَا تَأْكُلُوا الرِّبَا أَضْعَافًا مُّضَاعَفَةً ۖ وَاتَّقُوا اللَّهَ لَعَلَّكُمْ تُفْلِحُونَ
ऐ ईमानदारों सूद दनादन खाते न चले जाओ और ख़ुदा से डरो कि तुम छुटकारा पाओ
131وَاتَّقُوا النَّارَ الَّتِي أُعِدَّتْ لِلْكَافِرِينَ
और जहन्नुम की उस आग से डरो जो काफ़िरों के लिए तैयार की गयी है
132وَأَطِيعُوا اللَّهَ وَالرَّسُولَ لَعَلَّكُمْ تُرْحَمُونَ
और ख़ुदा और रसूल की फ़रमाबरदारी करो ताकि तुम पर रहम किया जाए
133۞ وَسَارِعُوا إِلَىٰ مَغْفِرَةٍ مِّن رَّبِّكُمْ وَجَنَّةٍ عَرْضُهَا السَّمَاوَاتُ وَالْأَرْضُ أُعِدَّتْ لِلْمُتَّقِينَ
और अपने परवरदिगार के (सबब) बख्शिश और जन्नत की तरफ़ दौड़ पड़ो जिसकी (वुसअत सारे) आसमान और ज़मीन के बराबर है और जो परहेज़गारों के लिये मुहय्या की गयी है
आल-इमरानकुरान सूची
200आयत
मदनीअवतरण स्थान
131आयत

अनुवाद — आल-इमरान 131

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Thursday, October 1, 2026

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