अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- مَنَّ اللهُ: अल्लाह ने उपकार किया, एहसान किया।
- بَعَثَ: भेजा, नियुक्त किया।
- مِنْ أَنْفُسِهِمْ: उन्हीं में से, उन्हीं की जाति में से।
- يَتْلُو: पढ़कर सुनाता है।
- يُزَكِّيهِمْ: उन्हें पवित्र करता है, उनके दिलों को शिर्क और बुरे आचरण से साफ़ करता है।
- الْكِتَابَ: क़ुरआन।
- الْحِكْمَةَ: सुन्नत (पैग़ंबर की शिक्षाएँ और तरीक़ा)।
- ضَلَالٍ مُبِينٍ: स्पष्ट और खुला पथ-भ्रष्टाचार।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने ईमानवालों पर बड़ा एहसान किया कि उन्हीं में से एक रसूल (मुहम्मद ﷺ) को भेजा। यह रसूल उन्हीं की जाति और भाषा का था, ताकि वे उसकी बात आसानी से समझ सकें और उससे सीधा जुड़ाव महसूस कर सकें। इस रसूल के चार प्रमुख कार्य बताए गए हैं:
- वह उन्हें अल्लाह की आयतें (क़ुरआन) पढ़कर सुनाता है — ताकि लोगों को सीधा मार्गदर्शन मिले और वे अपने रब के संदेश को समझें।
- वह उन्हें पवित्र करता है — यानी उनके दिलों को शिर्क, बुरी आदतों, झूठ, धोखे और सभी प्रकार की नैतिक बुराइयों से साफ़ करता है, ताकि वे पाक और सच्चे इंसान बनें।
- वह उन्हें किताब (क़ुरआन) सिखाता है — यानी उन्हें अल्लाह की वह पवित्र पुस्तक पढ़ाता और समझाता है जो उनके जीवन का मार्गदर्शक है।
- वह उन्हें हिक्मत (सुन्नत) सिखाता है — यानी पैग़ंबर की शिक्षाएँ, उनका तरीक़ा और वह समझ जो क़ुरआन को अमल में लाने के लिए ज़रूरी है।
इससे पहले ये लोग स्पष्ट गुमराही में थे — वे मूर्तियों की पूजा करते थे, आपस में लड़ते-झगड़ते थे, बुराइयों में डूबे हुए थे और सच्चे ज्ञान से कोसों दूर थे। अल्लाह ने इस रसूल के ज़रिए उन्हें अंधकार से निकालकर प्रकाश की ओर लाया।
फ़ायदे (लाभ और शिक्षाएँ):
- अल्लाह का सबसे बड़ा एहसान — अल्लाह ने इंसानों पर सबसे बड़ा उपकार रसूल भेजकर किया है, क्योंकि रसूल ही वह ज़रिया है जो इंसान को जहालत से निकालकर हिदायत की राह दिखाता है।
- रसूल का इंसानों में से होना — यह अल्लाह की रहमत है कि रसूल फ़रिश्ता नहीं बल्कि इंसानों में से भेजा गया, ताकि लोग उनसे सीधे सीख सकें, उनके जीवन को देख सकें और उनका अनुसरण कर सकें।
- तज़्किया (आत्म-शुद्धि) की अहमियत — सिर्फ़ ज्ञान देना काफ़ी नहीं, बल्कि दिलों को पवित्र करना भी ज़रूरी है। इस्लाम सिर्फ़ बाहरी अमल नहीं, बल्कि अंदर की सफ़ाई और अच्छे आचरण की तालीम देता है।
- क़ुरआन और सुन्नत का साथ — किताब (क़ुरआन) और हिक्मत (सुन्नत) दोनों का ज़िक्र एक साथ आया है, जो बताता है कि सही राह पाने के लिए दोनों पर अमल ज़रूरी है।
- अल्लाह का शुक्र — यह आयत हमें सिखाती है कि हमें अल्लाह का शुक्र अदा करना चाहिए कि उसने हमें इस उम्मत में पैदा किया और हम तक यह नेमत पहुँची। जो लोग इस एहसान को पहचानते हैं, वे क़ुरआन और सुन्नत से जुड़ते हैं और अपनी ज़िंदगी को संवारते हैं।
📜 आयत 162-166 — सूरा आल-इमरान
अनुवाद — आल-इमरान 164
सूरा आल-इमरान आयत 164 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ख़ुदा ने तो ईमानदारों पर बड़ा एहसान किया कि उनके…सूरा आयत 164/200 — सूरा आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा आल-इमरान सुनें, सूरा आल-इमरान अनुवाद, सूरा आल-इमरान mp3, सूरा आल-इमरान pdf. आयत 162–166. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, September 8, 2026
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