आल-इमरान · 52/200
अनुवाद उच्चारण — आल-इमरान
۞ فَلَمَّا أَحَسَّ عِيسَىٰ مِنْهُمُ الْكُفْرَ قَالَ مَنْ أَنصَارِي إِلَى اللَّهِ ۖ قَالَ الْحَوَارِيُّونَ نَحْنُ أَنصَارُ اللَّهِ آمَنَّا بِاللَّهِ وَاشْهَدْ بِأَنَّا مُسْلِمُونَ ۝٥٢
Falammaaa ahassa `Eesaa minhumul kufra qaala man ansaaree ilal laahi qaalal Hawaariyyoona nahnu ansaarul laahi aamannaa billaahi washhad bi annaa muslimoon
📖 हिंदी अर्थ
पस उसकी इबादत करो (क्योंकि) यही नजात का सीधा रास्ता है फिर जब ईसा ने (इतनी बातों के बाद भी) उनका कुफ़्र (पर अड़े रहना) देखा तो (आख़िर) कहने लगे कौन ऐसा है जो ख़ुदा की तरफ़ होकर मेरा मददगार बने (ये सुनकर) हवारियों ने कहा हम ख़ुदा के तरफ़दार हैं और हम ख़ुदा पर ईमान लाए

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَحَسَّ: महसूस किया, जान लिया, भाँप लिया।
  • الْكُفْرَ: इनकार, अविश्वास, सत्य को छिपाना।
  • أَنصَارِي: मेरे सहायक, मेरा साथ देने वाले।
  • الْحَوَارِيُّونَ: ईसा (अलैहिस्सलाम) के विशेष और चुने हुए साथी, जो उनके धर्म के शुद्ध अनुयायी थे।

व्याख्या:

जब ईसा (अलैहिस्सलाम) ने बनी इस्राईल की ओर से कुफ्र (इनकार) और सत्य के विरुद्ध हठ की भावना को स्पष्ट रूप से महसूस किया, और यह समझ गए कि वे उन्हें मानने से इनकार कर रहे हैं और उनके विरुद्ध साजिश कर रहे हैं, तो उन्होंने अपने विशेष और निष्ठावान साथियों को संबोधित करते हुए पूछा: "कौन है जो अल्लाह की ओर बुलाने और उसके धर्म की मदद करने में मेरा साथ देगा?" यह प्रश्न उन्होंने इसलिए किया ताकि सच्चे और ईमानदार लोग सामने आ जाएँ।

इस पर हवारियों (उनके चुने हुए साथियों) ने उत्तर दिया: "हम अल्लाह के धर्म के सहायक हैं। हमने अल्लाह पर ईमान लाया है और आपकी पुष्टि की है। हे ईसा! आप गवाह रहें कि हम पूर्ण रूप से अल्लाह के आज्ञाकारी और उसके प्रति समर्पित (मुस्लिम) हैं।" उन्होंने यह बात इसलिए कही ताकि यह बात उनके लिए क़ियामत के दिन गवाही बन जाए और वे अपने ईमान पर दृढ़ रहें।

शिक्षाएँ और लाभ:

  1. सत्य के मार्ग पर चलने वालों को चाहिए कि जब वे विरोध और इनकार देखें, तो वे सच्चे और निष्ठावान साथियों की तलाश करें और उन्हें एकत्र करें, क्योंकि अकेले सत्य की रक्षा करना कठिन होता है।
  2. अल्लाह के धर्म की मदद करना सबसे बड़ा सम्मान और सौभाग्य है। हवारियों ने जिस प्रकार तुरंत सहायता का प्रस्ताव रखा, यह हमें सिखाता है कि सच्चे ईमानवाले कभी भी सत्य के समर्थन में पीछे नहीं हटते।
  3. ईमान का अर्थ केवल मौखिक घोषणा नहीं, बल्कि अल्लाह के प्रति पूर्ण समर्पण और आज्ञाकारिता है। हवारियों ने "मुस्लिम" होने की गवाही माँगी, जो दर्शाता है कि सच्चा ईमान अल्लाह के प्रति समर्पण का नाम है।
  4. यह आयत हमें सिखाती है कि नेक कामों में एक-दूसरे का साथ देना और सत्य के लिए खड़ा होना चाहिए, चाहे विरोध कितना भी बड़ा क्यों न हो। अल्लाह अपने सहायकों की मदद करता है और उन्हें कभी अकेला नहीं छोड़ता।


📜 आयत 50-54 — आल-इमरान

50وَمُصَدِّقًا لِّمَا بَيْنَ يَدَيَّ مِنَ التَّوْرَاةِ وَلِأُحِلَّ لَكُم بَعْضَ الَّذِي حُرِّمَ عَلَيْكُمْ ۚ وَجِئْتُكُم بِآيَةٍ مِّن رَّبِّكُمْ فَاتَّقُوا اللَّهَ وَأَطِيعُونِ
और तौरेत जो मेरे सामने मौजूद है मैं उसकी तसदीक़ करता हूं और (मेरे आने की) एक ग़रज़ यह (भी) है कि जो चीजे तुम पर हराम है उनमें से बाज़ को (हुक्मे ख़ुदा से) हलाल कर दूं और मैं तुम्हारे परवरदिगार की तरफ़ से (अपनी नबूवत की) निशानी लेकर तुम्हारे पास आया हूं
51إِنَّ اللَّهَ رَبِّي وَرَبُّكُمْ فَاعْبُدُوهُ ۗ هَٰذَا صِرَاطٌ مُّسْتَقِيمٌ
पस तुम ख़ुदा से डरो और मेरी इताअत करो बेशक ख़ुदा ही मेरा और तुम्हारा परवरदिगार है
52۞ فَلَمَّا أَحَسَّ عِيسَىٰ مِنْهُمُ الْكُفْرَ قَالَ مَنْ أَنصَارِي إِلَى اللَّهِ ۖ قَالَ الْحَوَارِيُّونَ نَحْنُ أَنصَارُ اللَّهِ آمَنَّا بِاللَّهِ وَاشْهَدْ بِأَنَّا مُسْلِمُونَ
पस उसकी इबादत करो (क्योंकि) यही नजात का सीधा रास्ता है फिर जब ईसा ने (इतनी बातों के बाद भी) उनका कुफ़्र (पर अड़े रहना) देखा तो (आख़िर) कहने लगे कौन ऐसा है जो ख़ुदा की तरफ़ होकर मेरा मददगार बने (ये सुनकर) हवारियों ने कहा हम ख़ुदा के तरफ़दार हैं और हम ख़ुदा पर ईमान लाए
53رَبَّنَا آمَنَّا بِمَا أَنزَلْتَ وَاتَّبَعْنَا الرَّسُولَ فَاكْتُبْنَا مَعَ الشَّاهِدِينَ
और (ईसा से कहा) आप गवाह रहिए कि हम फ़रमाबरदार हैं
54وَمَكَرُوا وَمَكَرَ اللَّهُ ۖ وَاللَّهُ خَيْرُ الْمَاكِرِينَ
और ख़ुदा की बारगाह में अर्ज़ की कि ऐ हमारे पालने वाले जो कुछ तूने नाज़िल किया हम उसपर ईमान लाए और हमने तेरे रसूल (ईसा) की पैरवी इख्तेयार की पस तू हमें (अपने रसूल के) गवाहों के दफ्तर में लिख ले
आल-इमरानकुरान सूची
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मदनीRevelation
52आयत

अनुवाद — आल-इमरान 52

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Tuesday, August 18, 2026

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