अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- رَبَّنَا: हे हमारे पालनहार!
- آمَنَّا: हम ईमान लाए।
- بِمَا أَنزَلْتَ: उस पर जो तूने उतारा।
- وَاتَّبَعْنَا الرَّسُولَ: और हमने रसूल का अनुसरण किया।
- فَاكْتُبْنَا: तो हमें लिख ले।
- مَعَ الشَّاهِدِينَ: गवाही देने वालों के साथ।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) के हवारियों (शिष्यों) की दुआ को बयान करती है। जब हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम से पूछा कि अल्लाह की राह में कौन मेरा मददगार बनेगा, तो हवारियों ने कहा: "हम अल्लाह के मददगार हैं, हम ईमान लाए और आप गवाह रहें कि हम मुसलमान हैं।" फिर उन्होंने यह दुआ की: "हे हमारे रब! हम उस किताब पर ईमान लाए जो तूने उतारी (इंजील), और हमने तेरे रसूल (ईसा अलैहिस्सलाम) का अनुसरण किया। तो हमें उन गवाही देने वालों के साथ लिख ले, जो तेरी वहदानियत (एकता) और तेरे रसूलों की सच्चाई की गवाही देते हैं।"
इस दुआ में हवारियों ने तीन चीज़ें माँगीं: पहली, ईमान का इज़हार किया; दूसरी, रसूल की इताअत (पालन) का एलान किया; और तीसरी, अल्लाह से दरख़्वास्त की कि उन्हें उन लोगों में शामिल कर लिया जाए जो सच्चाई की गवाही देते हैं। ये गवाह देने वाले वे लोग हैं जो अल्लाह की वहदानियत और उसके रसूलों के सच्चे होने की गवाही देते हैं। कुछ मुफ़स्सिरीन के अनुसार, यहाँ "शाहिदीन" से मुराद उम्मते मुहम्मदिया (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) है, क्योंकि यह उम्मत क़यामत के दिन सभी रसूलों पर गवाह होगी कि उन्होंने अपनी उम्मतों तक अल्लाह का पैग़ाम पहुँचा दिया। हवारियों ने यह दुआ करके यह आरज़ू की कि उन्हें भी उस उम्मत में शामिल कर लिया जाए जो सबसे आख़िरी और सबसे अफ़ज़ल उम्मत होगी।
फ़ायदे (सबक़):
- ईमान और इताअत (पालन) को एक साथ जोड़ा गया है — सिर्फ़ ईमान का दावा काफ़ी नहीं, बल्कि रसूल की पैरवी भी ज़रूरी है। यही सच्चे ईमान की निशानी है।
- दुआ में अल्लाह से अच्छे लोगों के साथ दर्ज होने की आरज़ू करनी चाहिए। इंसान को चाहिए कि वह नेक लोगों की संगत और उनके साथ उठने की दुआ माँगे।
- यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की राह में मदद करने का एलान करना और उस पर साबित क़दम रहना बड़ी फज़ीलत की बात है।
- उम्मते मुहम्मदिया (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की गवाही का ज़िक्र हमें यह अहसास दिलाता है कि हमारी उम्मत को अल्लाह ने बड़ा मर्तबा दिया है, इसलिए हमें अपनी ज़िम्मेदारी समझनी चाहिए और दीन पर अमल करके उस गवाही के लायक़ बनना चाहिए।
- दुआ में "रब्बना" (हे हमारे रब) का अंदाज़ इस्तेमाल करना सिखाता है कि अल्लाह से मुख़ातिब होते वक़्त अपनी अज्ज़ती (विनम्रता) और उसकी रुबूबियत (पालनहार होने) का एहसास रखना चाहिए।
📜 आयत 51-55 — आल-इमरान
अनुवाद — आल-इमरान 53
सूरा आल-इमरान आयत 53 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (ईसा से कहा) आप गवाह रहिए कि हम फ़रमाबरदार…सूरा आयत 53/200 — आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: आल-इमरान सुनें, आल-इमरान अनुवाद, आल-इमरान mp3, आल-इमरान pdf. आयत 51–55. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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