आल-इमरान · 53/200
अनुवाद उच्चारण — आल-इमरान
رَبَّنَا آمَنَّا بِمَا أَنزَلْتَ وَاتَّبَعْنَا الرَّسُولَ فَاكْتُبْنَا مَعَ الشَّاهِدِينَ ۝٥٣
Rabbanaaa aamannaa bimaaa anzalta wattaba`nar Rasoola faktubnaa ma`ash shaahideen
📖 हिंदी अर्थ
और (ईसा से कहा) आप गवाह रहिए कि हम फ़रमाबरदार हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • رَبَّنَا: हे हमारे पालनहार!
  • آمَنَّا: हम ईमान लाए।
  • بِمَا أَنزَلْتَ: उस पर जो तूने उतारा।
  • وَاتَّبَعْنَا الرَّسُولَ: और हमने रसूल का अनुसरण किया।
  • فَاكْتُبْنَا: तो हमें लिख ले।
  • مَعَ الشَّاهِدِينَ: गवाही देने वालों के साथ।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) के हवारियों (शिष्यों) की दुआ को बयान करती है। जब हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम से पूछा कि अल्लाह की राह में कौन मेरा मददगार बनेगा, तो हवारियों ने कहा: "हम अल्लाह के मददगार हैं, हम ईमान लाए और आप गवाह रहें कि हम मुसलमान हैं।" फिर उन्होंने यह दुआ की: "हे हमारे रब! हम उस किताब पर ईमान लाए जो तूने उतारी (इंजील), और हमने तेरे रसूल (ईसा अलैहिस्सलाम) का अनुसरण किया। तो हमें उन गवाही देने वालों के साथ लिख ले, जो तेरी वहदानियत (एकता) और तेरे रसूलों की सच्चाई की गवाही देते हैं।"

इस दुआ में हवारियों ने तीन चीज़ें माँगीं: पहली, ईमान का इज़हार किया; दूसरी, रसूल की इताअत (पालन) का एलान किया; और तीसरी, अल्लाह से दरख़्वास्त की कि उन्हें उन लोगों में शामिल कर लिया जाए जो सच्चाई की गवाही देते हैं। ये गवाह देने वाले वे लोग हैं जो अल्लाह की वहदानियत और उसके रसूलों के सच्चे होने की गवाही देते हैं। कुछ मुफ़स्सिरीन के अनुसार, यहाँ "शाहिदीन" से मुराद उम्मते मुहम्मदिया (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) है, क्योंकि यह उम्मत क़यामत के दिन सभी रसूलों पर गवाह होगी कि उन्होंने अपनी उम्मतों तक अल्लाह का पैग़ाम पहुँचा दिया। हवारियों ने यह दुआ करके यह आरज़ू की कि उन्हें भी उस उम्मत में शामिल कर लिया जाए जो सबसे आख़िरी और सबसे अफ़ज़ल उम्मत होगी।

फ़ायदे (सबक़):

  1. ईमान और इताअत (पालन) को एक साथ जोड़ा गया है — सिर्फ़ ईमान का दावा काफ़ी नहीं, बल्कि रसूल की पैरवी भी ज़रूरी है। यही सच्चे ईमान की निशानी है।
  2. दुआ में अल्लाह से अच्छे लोगों के साथ दर्ज होने की आरज़ू करनी चाहिए। इंसान को चाहिए कि वह नेक लोगों की संगत और उनके साथ उठने की दुआ माँगे।
  3. यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की राह में मदद करने का एलान करना और उस पर साबित क़दम रहना बड़ी फज़ीलत की बात है।
  4. उम्मते मुहम्मदिया (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की गवाही का ज़िक्र हमें यह अहसास दिलाता है कि हमारी उम्मत को अल्लाह ने बड़ा मर्तबा दिया है, इसलिए हमें अपनी ज़िम्मेदारी समझनी चाहिए और दीन पर अमल करके उस गवाही के लायक़ बनना चाहिए।
  5. दुआ में "रब्बना" (हे हमारे रब) का अंदाज़ इस्तेमाल करना सिखाता है कि अल्लाह से मुख़ातिब होते वक़्त अपनी अज्ज़ती (विनम्रता) और उसकी रुबूबियत (पालनहार होने) का एहसास रखना चाहिए।


📜 आयत 51-55 — आल-इमरान

51إِنَّ اللَّهَ رَبِّي وَرَبُّكُمْ فَاعْبُدُوهُ ۗ هَٰذَا صِرَاطٌ مُّسْتَقِيمٌ
पस तुम ख़ुदा से डरो और मेरी इताअत करो बेशक ख़ुदा ही मेरा और तुम्हारा परवरदिगार है
52۞ فَلَمَّا أَحَسَّ عِيسَىٰ مِنْهُمُ الْكُفْرَ قَالَ مَنْ أَنصَارِي إِلَى اللَّهِ ۖ قَالَ الْحَوَارِيُّونَ نَحْنُ أَنصَارُ اللَّهِ آمَنَّا بِاللَّهِ وَاشْهَدْ بِأَنَّا مُسْلِمُونَ
पस उसकी इबादत करो (क्योंकि) यही नजात का सीधा रास्ता है फिर जब ईसा ने (इतनी बातों के बाद भी) उनका कुफ़्र (पर अड़े रहना) देखा तो (आख़िर) कहने लगे कौन ऐसा है जो ख़ुदा की तरफ़ होकर मेरा मददगार बने (ये सुनकर) हवारियों ने कहा हम ख़ुदा के तरफ़दार हैं और हम ख़ुदा पर ईमान लाए
53رَبَّنَا آمَنَّا بِمَا أَنزَلْتَ وَاتَّبَعْنَا الرَّسُولَ فَاكْتُبْنَا مَعَ الشَّاهِدِينَ
और (ईसा से कहा) आप गवाह रहिए कि हम फ़रमाबरदार हैं
54وَمَكَرُوا وَمَكَرَ اللَّهُ ۖ وَاللَّهُ خَيْرُ الْمَاكِرِينَ
और ख़ुदा की बारगाह में अर्ज़ की कि ऐ हमारे पालने वाले जो कुछ तूने नाज़िल किया हम उसपर ईमान लाए और हमने तेरे रसूल (ईसा) की पैरवी इख्तेयार की पस तू हमें (अपने रसूल के) गवाहों के दफ्तर में लिख ले
55إِذْ قَالَ اللَّهُ يَا عِيسَىٰ إِنِّي مُتَوَفِّيكَ وَرَافِعُكَ إِلَيَّ وَمُطَهِّرُكَ مِنَ الَّذِينَ كَفَرُوا وَجَاعِلُ الَّذِينَ اتَّبَعُوكَ فَوْقَ الَّذِينَ كَفَرُوا إِلَىٰ يَوْمِ الْقِيَامَةِ ۖ ثُمَّ إِلَيَّ مَرْجِعُكُمْ فَأَحْكُمُ بَيْنَكُمْ فِيمَا كُنتُمْ فِيهِ تَخْتَلِفُونَ
और यहूदियों (ने ईसा से) मक्कारी की और ख़ुदा ने उसके दफ़ईया की तदबीर की और ख़ुदा सब से बेहतर तदबीर करने वाला है (वह वक्त भी याद करो) जब ईसा से ख़ुदा ने फ़रमाया ऐ ईसा मैं ज़रूर तुम्हारी ज़िन्दगी की मुद्दत पूरी करके तुमको अपनी तरफ़ उठा लूंगा और काफ़िरों (की ज़िन्दगी) से तुमको पाक व पाकीज़ा रखूंगा और जिन लोगों ने तुम्हारी पैरवी की उनको क़यामत तक काफ़िरों पर ग़ालिब रखूंगा फिर तुम सबको मेरी तरफ़ लौटकर आना है
आल-इमरानकुरान सूची
200आयत
मदनीRevelation
53आयत

अनुवाद — आल-इमरान 53

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Tuesday, August 18, 2026

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