आल-इमरान · 51/200
अनुवाद उच्चारण — आल-इमरान
إِنَّ اللَّهَ رَبِّي وَرَبُّكُمْ فَاعْبُدُوهُ ۗ هَٰذَا صِرَاطٌ مُّسْتَقِيمٌ ۝٥١
Innal laaha Rabbee wa Rabbukum fa`budooh; haazaa Siraatum Mustaqeem
📖 हिंदी अर्थ
पस तुम ख़ुदा से डरो और मेरी इताअत करो बेशक ख़ुदा ही मेरा और तुम्हारा परवरदिगार है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • رَبِّي وَرَبُّكُمْ: मेरा पालनहार और तुम्हारा पालनहार।
  • فَاعْبُدُوهُ: अतः तुम उसी की पूजा/इबादत करो।
  • صِرَاطٌ مُّسْتَقِيمٌ: सीधा एवं सत्य मार्ग, जिसमें कोई टेढ़ापन न हो।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) के उस वक्तव्य का भाग है जो उन्होंने अपनी क़ौम से कहा था। इसका अर्थ यह है कि जिस ईश्वर की ओर मैं तुम्हें बुलाता हूँ, वही मेरा भी पालनहार है और तुम्हारा भी पालनहार है। वही सृष्टि का स्वामी, पालनकर्ता और प्रशासक है। मैं और तुम सब उसकी इबादत में समान हैं — कोई भी उसकी इबादत से मुक्त नहीं है। अतः तुम सब उसी की विशेष रूप से पूजा करो, उसके साथ किसी को साझी न बनाओ। यही वह सीधा मार्ग है जिसमें कोई विचलन नहीं — यह मार्ग अल्लाह की ओर ले जाता है और इसी पर चलकर व्यक्ति सफलता प्राप्त करता है। यह वही सत्य है जिसे सभी पैग़म्बर लेकर आए — कि अल्लाह ही एकमात्र पूज्य है और उसी की आज्ञा का पालन करना चाहिए। यही वह सीधा रास्ता है जो जन्नत तक पहुँचाता है, और इसके अतिरिक्त जो भी मार्ग हैं वे टेढ़े और भटकाने वाले हैं।

फ़ायदे (शिक्षाएँ):

  1. इस आयत से स्पष्ट होता है कि इस्लाम का मूल सिद्धांत — तौहीद (एकेश्वरवाद) — वही सच्चा धर्म है जिसे सभी पैग़म्बरों ने पेश किया। हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) ने स्वयं अपनी उपासना से इनकार किया और लोगों को केवल अल्लाह की इबादत का आदेश दिया।
  2. यह आयत हमें सिखाती है कि नबी और रसूल भी अल्लाह के बन्दे हैं — वे पूजा के पात्र नहीं, बल्कि स्वयं पूजा करने वाले हैं। अतः किसी इंसान को ईश्वर का दर्जा देना स्पष्ट गुमराही है।
  3. "सीधा मार्ग" का अर्थ है — अल्लाह की इबादत और उसकी आज्ञा का पालन। यही वह मार्ग है जो व्यक्ति को दुनिया और आख़िरत दोनों में सफलता दिलाता है। इस मार्ग पर चलने से मन को शांति, जीवन को स्थिरता और मृत्यु के बाद की ज़िन्दगी में सुख मिलता है।
  4. यह आयत मुसलमानों को यह भी सिखाती है कि हमें अपने जीवन के हर क्षेत्र — चाहे वह पूजा हो, व्यवहार हो या सामाजिक जीवन — में अल्लाह के आदेशों को सर्वोपरि रखना चाहिए। यही सच्ची इबादत है और यही सीधा रास्ता है।


📜 आयत 49-53 — आल-इमरान

49وَرَسُولًا إِلَىٰ بَنِي إِسْرَائِيلَ أَنِّي قَدْ جِئْتُكُم بِآيَةٍ مِّن رَّبِّكُمْ ۖ أَنِّي أَخْلُقُ لَكُم مِّنَ الطِّينِ كَهَيْئَةِ الطَّيْرِ فَأَنفُخُ فِيهِ فَيَكُونُ طَيْرًا بِإِذْنِ اللَّهِ ۖ وَأُبْرِئُ الْأَكْمَهَ وَالْأَبْرَصَ وَأُحْيِي الْمَوْتَىٰ بِإِذْنِ اللَّهِ ۖ وَأُنَبِّئُكُم بِمَا تَأْكُلُونَ وَمَا تَدَّخِرُونَ فِي بُيُوتِكُمْ ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً لَّكُمْ إِن كُنتُم مُّؤْمِنِينَ
और बनी इसराइल का रसूल (क़रार देगा और वह उनसे यूं कहेगा कि) मैं तुम्हारे पास तुम्हारे परवरदिगार की तरफ़ से (अपनी नबूवत की) यह निशानी लेकर आया हूं कि मैं गुंधीं हुई मिट्टी से एक परिन्दे की सूरत बनाऊॅगा फ़िर उस पर (कुछ) दम करूंगा तो वो ख़ुदा के हुक्म से उड़ने लगेगा और मैं ख़ुदा ही के हुक्म से मादरज़ाद (पैदायशी) अंधे और कोढ़ी को अच्छा करूंगा और मुर्दो को ज़िन्दा करूंगा और जो कुछ तुम खाते हो और अपने घरों में जमा करते हो मैं (सब) तुमको बता दूंगा अगर तुम ईमानदार हो तो बेशक तुम्हारे लिये इन बातों में (मेरी नबूवत की) बड़ी निशानी है
50وَمُصَدِّقًا لِّمَا بَيْنَ يَدَيَّ مِنَ التَّوْرَاةِ وَلِأُحِلَّ لَكُم بَعْضَ الَّذِي حُرِّمَ عَلَيْكُمْ ۚ وَجِئْتُكُم بِآيَةٍ مِّن رَّبِّكُمْ فَاتَّقُوا اللَّهَ وَأَطِيعُونِ
और तौरेत जो मेरे सामने मौजूद है मैं उसकी तसदीक़ करता हूं और (मेरे आने की) एक ग़रज़ यह (भी) है कि जो चीजे तुम पर हराम है उनमें से बाज़ को (हुक्मे ख़ुदा से) हलाल कर दूं और मैं तुम्हारे परवरदिगार की तरफ़ से (अपनी नबूवत की) निशानी लेकर तुम्हारे पास आया हूं
51إِنَّ اللَّهَ رَبِّي وَرَبُّكُمْ فَاعْبُدُوهُ ۗ هَٰذَا صِرَاطٌ مُّسْتَقِيمٌ
पस तुम ख़ुदा से डरो और मेरी इताअत करो बेशक ख़ुदा ही मेरा और तुम्हारा परवरदिगार है
52۞ فَلَمَّا أَحَسَّ عِيسَىٰ مِنْهُمُ الْكُفْرَ قَالَ مَنْ أَنصَارِي إِلَى اللَّهِ ۖ قَالَ الْحَوَارِيُّونَ نَحْنُ أَنصَارُ اللَّهِ آمَنَّا بِاللَّهِ وَاشْهَدْ بِأَنَّا مُسْلِمُونَ
पस उसकी इबादत करो (क्योंकि) यही नजात का सीधा रास्ता है फिर जब ईसा ने (इतनी बातों के बाद भी) उनका कुफ़्र (पर अड़े रहना) देखा तो (आख़िर) कहने लगे कौन ऐसा है जो ख़ुदा की तरफ़ होकर मेरा मददगार बने (ये सुनकर) हवारियों ने कहा हम ख़ुदा के तरफ़दार हैं और हम ख़ुदा पर ईमान लाए
53رَبَّنَا آمَنَّا بِمَا أَنزَلْتَ وَاتَّبَعْنَا الرَّسُولَ فَاكْتُبْنَا مَعَ الشَّاهِدِينَ
और (ईसा से कहा) आप गवाह रहिए कि हम फ़रमाबरदार हैं
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अनुवाद — आल-इमरान 51

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सूरा आयत 51/200 — आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: आल-इमरान सुनें, आल-इमरान अनुवाद, आल-इमरान mp3, आल-इमरान pdf. आयत 49–53. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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