Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- طَائِفَةٌ – एक गिरोह या समूह
- وَجْهَ النَّهَارِ – दिन की शुरुआत, सुबह का समय
- آخِرَهُ – दिन का अंत, अंतिम भाग
- لَعَلَّهُمْ يَرْجِعُونَ – ताकि वे (मुसलमान) अपने धर्म से लौट जाएँ या संदेह में पड़ जाएँ
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने इस आयत में यहूदियों की एक चालाक और कपटपूर्ण साज़िश का पर्दाफाश किया है। उनके कुछ विद्वानों और नेताओं ने आपस में साजिश रची कि वे सुबह के समय मुसलमानों के सामने ईमान लाने का ढोंग करें — यानी क़ुरआन और रसूलुल्लाह ﷺ पर ईमान लाने का इज़हार करें — और जब दिन ढले तो उसी दिन कुफ़्र का एलान कर दें। उनका मक़सद यह था कि साधारण मुसलमान, जो इन्हें अहले-किताब और जानकार समझते थे, जब यह देखेंगे कि ये लोग ईमान लाने के बाद वापस कुफ़्र की तरफ लौट गए, तो वे कहेंगे: "ये लोग तो किताबों के जानकार हैं, अगर इस दीन में भलाई होती तो ये इसे छोड़कर नहीं जाते।" इस तरह वे मुसलमानों के दिलों में शुबहा (संदेह) डालकर उन्हें इस्लाम से फेरना चाहते थे।
यह आयत हमें सिखाती है कि दुश्मन कितनी भी चालाकियाँ करें, अल्लाह उनकी हर साज़िश को नाकाम कर देता है। अल्लाह ने उनकी यह योजना उसी वक़्त बेनक़ाब कर दी और मुसलमानों को उनके मक्र (धोखे) से आगाह कर दिया। यह हमारे लिए एक बड़ी नेमत है कि अल्लाह ने अपने कलाम में दुश्मनों की चालों का ज़िक्र किया ताकि हम सतर्क रहें और अपने ईमान को मज़बूत करें।
इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि सच्चा ईमान सिर्फ़ ज़ुबान का इज़हार नहीं, बल्कि दिल का यक़ीन और अमल की पाबंदी है। हमें अपने दीन पर मज़बूती से क़ायम रहना चाहिए और किसी की धोखेबाज़ी से नहीं डरना चाहिए, क्योंकि अल्लाह अपने बंदों का हाथ पकड़ने वाला है। जो लोग अल्लाह पर भरोसा करते हैं, अल्लाह उन्हें दुश्मनों की साज़िशों से बचाता है। यह भी याद रखें कि दीन की सच्चाई किसी इंसान के ईमान लाने या छोड़ने से बदलती नहीं — सच्चाई तो वही है जो अल्लाह ने अपनी किताब में उतारी है। हमें अपने ईमान को इल्म, अमल और यक़ीन से मज़बूत करना है, ताकि कोई शुबहा हमें हिला न सके। अल्लाह हमें सच्चे दिल से ईमान लाने और उस पर साबित-क़दम रहने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 70-74 — सूरा आल-इमरान
अनुवाद — आल-इमरान 72
सूरा आल-इमरान आयत 72 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और अहले किताब से एक गिरोह ने (अपने लोगों से)…सूरा आयत 72/200 — सूरा आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा आल-इमरान सुनें, सूरा आल-इमरान अनुवाद, सूरा आल-इमरान mp3, सूरा आल-इमरान pdf. आयत 70–74. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा आल-इमरान
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
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