अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- تَلْبِسُونَ (तल्बिसून): मिलाना, गड्ड-मड्ड करना, सच को झूठ में मिला देना।
- الْحَقّ (अल-हक़): सत्य, सच्चाई — यहाँ अर्थ है वह सत्य जो अल्लाह ने अपनी किताबों में उतारा।
- الْبَاطِل (अल-बातिल): असत्य, झूठ — यहाँ अर्थ है वह बातें जो उन्होंने अपनी ओर से गढ़ लीं या बदल दीं।
- تَكْتُمُونَ (तकतुमून): छिपाना, छुपा देना।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ अहले-किताब (यहूदी और ईसाई)! तुम्हें क्या हो गया है? तुम सत्य को असत्य के साथ क्यों मिलाते हो? तुमने अपनी किताबों (तौरात और इंजील) में अल्लाह की भेजी हुई सच्ची शिक्षाओं को अपने मनगढ़ंत विचारों, झूठी व्याख्याओं और अपने हाथों से लिखी हुई बातों के साथ इस तरह मिला दिया कि सच और झूठ में फ़र्क़ करना मुश्किल हो गया। तुम सच को झूठ के रंग में रंग देते हो, ताकि लोग उसे सच समझें और तुम्हारी बात मान लें।
और सबसे बड़ी बात — तुम उस सत्य को भी छिपाते हो जो तुम्हारी अपनी किताबों में मौजूद है। तुम्हें मालूम है कि हज़रत मुहम्मद ﷺ की नबुव्वत की सच्ची निशानियाँ और उनके आने की ख़बरें तुम्हारी किताबों में लिखी हुई हैं। तुम यह भी जानते हो कि उनका दीन ही सच्चा दीन है, और उनका अनुसरण करना ही हर इंसान पर फ़र्ज़ है। लेकिन फिर भी तुम इस सच्चाई को जानबूझकर छिपाते हो, ताकि लोग उन पर ईमान न लाएँ और तुम्हारी दुनियावी सत्ता और फ़ायदे बने रहें।
तुम्हें अच्छी तरह पता है कि सच क्या है और झूठ क्या है, हिदायत क्या है और गुमराही क्या है — फिर भी तुम जानते-बूझते हुए यह सब करते हो। यह तुम्हारी बड़ी बेईमानी और ज़ुल्म है।
फ़ायदे (सीख):
- सच को झूठ के साथ मिलाना बड़ा गुनाह है — इंसान को चाहिए कि वह सच को साफ़-साफ़ पेश करे, उसे मिलावट से बचाए। दीन के मामले में मिलावट करना अल्लाह की नज़र में बहुत बुरा काम है।
- सच्चाई छिपाना भी झूठ बोलने जैसा है — जिसे सच्चाई का इल्म हो और वह उसे छिपाए, वह अल्लाह के सामने ज़िम्मेदार है। इस्लाम सिखाता है कि सच्चाई को बयान करना अमानत है, चाहे वह अपने ख़िलाफ़ ही क्यों न हो।
- इल्म के साथ अमल ज़रूरी है — जो जानता है और फिर भी जानबूझकर गलत रास्ता अपनाता है, उसका इल्म उसे अल्लाह के अज़ाब से नहीं बचा सकता। सच्चा इल्म वही है जो इंसान को अल्लाह की इताअत की तरफ़ ले जाए।
- यह आयत हमें सिखाती है कि हम अपने दीन को पाक और साफ़ रखें — किसी भी तरह की बिद'अत (नई बात) या गलत रिवायत को दीन में शामिल न करें, और न ही दीन की कोई बात लोगों से छिपाएँ।
- इस आयत में मुहम्मद ﷺ की सच्चाई की गवाही है — क़ुरआन बताता है कि पहले की किताबों में भी उनकी नबुव्वत की ख़बरें थीं, और यह उनके सच्चे नबी होने की एक बड़ी निशानी है। यह हमारे ईमान को मज़बूत करती है और हमें अपने नबी ﷺ से मुहब्बत की तरफ़ बढ़ाती है।
📜 आयत 69-73 — सूरा आल-इमरान
अनुवाद — आल-इमरान 71
सूरा आल-इमरान आयत 71 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ऐ अहले किताब तुम क्यो हक़ व बातिल को गड़बड़…सूरा आयत 71/200 — सूरा आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा आल-इमरान सुनें, सूरा आल-इमरान अनुवाद, सूरा आल-इमरान mp3, सूरा आल-इमरान pdf. आयत 69–73. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, September 8, 2026
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