अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- अहवाउहुम (अपनी इच्छाओं): अपनी मनमर्ज़ी और ख्वाहिशों की पैरवी करना।
- बिगैरि इल्म (बिना ज्ञान के): बिना किसी सही जानकारी और दलील के।
- मन अज़ल्लल्लाह (जिसे अल्लाह ने गुमराह किया): जिसे अल्लाह ने उसकी सरकशी और हठधर्मी की वजह से हिदायत से महरूम कर दिया।
- नासिरीन (मददगार): वे लोग जो उन्हें अल्लाह के अज़ाब से बचा सकें।
तफसीर (व्याख्या):
यह आयत उन लोगों के बारे में है जो सच्चाई को जानने के बावजूद उसे क़ुबूल नहीं करते। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि ये लोग किसी दलील या इल्म की बिना पर गुमराह नहीं हुए, बल्कि इन्होंने जानबूझकर अपनी नफ़्सियानी ख्वाहिशों की पैरवी की। इन्होंने अपने बुज़ुर्गों की अंधी तक़लीद (पैरवी) की और अपनी जिद्दो-हठ पर अड़े रहे, भले ही उनके पास कोई सच्चा इल्म या सबूत न था। यह उनका अपना क़ुसूर (कसूर) है कि उन्होंने हक़ को नकारा और अपनी इच्छाओं को अपना माबूद बना लिया।
फिर अल्लाह फ़रमाता है: "फ़मन यहदी मन अज़ल्लल्लाह" यानी जब अल्लाह किसी को उसकी सरकशी और हठधर्मी की वजह से गुमराही में छोड़ देता है, तो उसे कौन हिदायत दे सकता है? कोई नहीं! क्योंकि हिदायत और गुमराही सिर्फ़ अल्लाह के हाथ में है। यह अल्लाह की सुन्नत (क़ानून) है कि जो बंदा हक़ को ठुकराता है और अपनी जिद पर अड़ा रहता है, अल्लाह उसके दिल पर मुहर लगा देता है और वह हिदायत से महरूम हो जाता है।
आख़िर में अल्लाह फ़रमाता है: "और इनका कोई मददगार नहीं" यानी क़यामत के दिन इन्हें अल्लाह के अज़ाब से बचाने वाला कोई नहीं होगा। न उनके बुत, न उनके बुज़ुर्ग, न उनके रिश्तेदार — सब उन्हें अकेला छोड़ देंगे।
दावती पहलू:
यह आयत हमें एक बहुत बड़ा सबक़ देती है कि इंसान को चाहिए कि वह अपनी इच्छाओं को नहीं, बल्कि अल्लाह की हिदायत को अपना रहनुमा बनाए। जो लोग अपनी ख्वाहिशों को पूजते हैं, वे दुनिया में भी भटके रहते हैं और आख़िरत में भी नाकाम रहेंगे। लेकिन जो लोग अल्लाह की तरफ़ रुजू करते हैं, अल्लाह उनके दिलों को रौशन कर देता है और उन्हें सीधी राह दिखाता है। यह अल्लाह की रहमत है कि उसने हमें क़ुरआन जैसी हिदायत की किताब दी, जो हर अंधेरे से निकालकर रौशनी की तरफ़ ले जाती है। आओ, हम अपनी ज़िंदगी को क़ुरआन और सुन्नत के मुताबिक ढालें और अपनी ख्वाहिशों को अल्लाह की रज़ा के ताबे करें — यही कामयाबी की असली राह है।
📜 आयत 27-31 — अर-रूम
अनुवाद — अर-रूम 29
सूरा अर-रूम आयत 29 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : मगर सरकशों ने तो बगैर समझे बूझे अपनी नफसियानी ख्वाहिशों…सूरा आयत 29/60 — अर-रूम الروم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अर-रूम सुनें, अर-रूम अनुवाद, अर-रूम mp3, अर-रूम pdf. आयत 27–31. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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