अर-रूम · 47/60
अनुवाद उच्चारण — अर-रूम
وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا مِن قَبْلِكَ رُسُلًا إِلَىٰ قَوْمِهِمْ فَجَاءُوهُم بِالْبَيِّنَاتِ فَانتَقَمْنَا مِنَ الَّذِينَ أَجْرَمُوا ۖ وَكَانَ حَقًّا عَلَيْنَا نَصْرُ الْمُؤْمِنِينَ ۝٤٧
Wa laqad arsalnaa min qablika Rusulan ilaa qawmihim fajaaa`oohum bil baiyinaati fantaqamnaa minal lazeena ajramoo wa kaana haqqan `alainaa nasrul mu`mineen
📖 हिंदी अर्थ
औ (ऐ रसूल) हमने तुमसे पहले और भी बहुत से पैग़म्बर उनकी क़ौमों के पास भेजे तो वह पैग़म्बर वाज़ेए व रौशन लेकर आए (मगर उन लोगों ने न माना) तो उन मुजरिमों से हमने (खूब) बदला लिया और हम पर तो मोमिनीन की मदद करना लाज़िम था ही
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • بِالْبَيِّنَاتِ: स्पष्ट प्रमाण, चमत्कार और तर्क जो रसूलों की सच्चाई को साबित करते हैं।
  • فَانتَقَمْنَا: हमने बदला लिया, अर्थात उन्हें दंड दिया और विनष्ट किया।
  • أَجْرَمُوا: जिन्होंने अपराध किए, यानी झुठलाया और कुफ्र किया।
  • نَصْرُ الْمُؤْمِنِينَ: ईमानवालों की सहायता और विजय।

तफसीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आपसे पहले हमने कई रसूल भेजे, और हर रसूल को उसकी अपनी क़ौम की ओर भेजा। वे सब अपनी क़ौम के पास स्पष्ट प्रमाण, चमत्कार और ऐसे सबूत लेकर आए जो उनकी सच्चाई को साबित करते थे। उन्होंने लोगों को एक ईश्वर की इबादत की ओर बुलाया और शिर्क से डराया। लेकिन अधिकांश लोगों ने उन्हें झुठलाया और कुफ्र पर अड़े रहे। फिर हमने उन अपराधियों से बदला लिया — उन्हें अपनी यातना में पकड़ा और विनष्ट कर दिया। और जो लोग ईमान लाए थे, उन्होंने अपने रसूलों का साथ दिया, हमने उन्हें बचाया और उनकी सहायता की। यह हमारा वादा है — ईमानवालों की सहायता करना हमारे ऊपर एक सच्चा और अनिवार्य हक़ है, जिसे हम पूरा करते हैं।

यह सुन्नत (ईश्वरीय नियम) हमेशा से रही है और आगे भी रहेगी। जो लोग सच्चाई को झुठलाते हैं और ज़ुल्म पर अड़े रहते हैं, उनका अंजाम विनाश है। और जो ईमान लाते हैं, नेक काम करते हैं और अल्लाह के रसूलों का साथ देते हैं, उनके लिए सहायता और विजय निश्चित है। यही अल्लाह का वादा है, और अल्लाह का वादा कभी नहीं टूटता।

दावत और नसीहत:

ऐ ईमानवालों! यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चाई की राह पर चलने वालों को अकेला नहीं छोड़ा जाता। चाहे मुश्किलें कितनी भी हों, अल्लाह अपने नेक बंदों की मदद ज़रूर करता है। जिस तरह पिछले रसूलों के साथी ईमानवालों को अल्लाह ने नस्र दी, उसी तरह आज भी जो लोग क़ुरआन और सुन्नत पर अमल करते हैं, अल्लाह उनके साथ है। यह आयत हमें सब्र और भरोसे की तालीम देती है — कि हम सच्चाई पर डटे रहें, क्योंकि अल्लाह का वादा है कि ईमानवालों की सहायता करना उसके ऊपर हक़ है। यह वादा कभी बदलता नहीं। इसलिए अपने ईमान को मज़बूत करें, नेक काम करें, और यक़ीन रखें कि अल्लाह की मदद ज़रूर आएगी — चाहे देर से ही सही।

🎧 सुनें

📜 आयत 45-49 — अर-रूम

45لِيَجْزِيَ الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ مِن فَضْلِهِ ۚ إِنَّهُ لَا يُحِبُّ الْكَافِرِينَ
ताकि जो लोग ईमान लाए और अच्छे अच्छे काम किए उनको ख़ुदा अपने फज़ल व (करम) से अच्छी जज़ा अता करेगा वह यक़ीनन कुफ्फ़ार से उलफ़त नहीं रखता
46وَمِنْ آيَاتِهِ أَن يُرْسِلَ الرِّيَاحَ مُبَشِّرَاتٍ وَلِيُذِيقَكُم مِّن رَّحْمَتِهِ وَلِتَجْرِيَ الْفُلْكُ بِأَمْرِهِ وَلِتَبْتَغُوا مِن فَضْلِهِ وَلَعَلَّكُمْ تَشْكُرُونَ
उसी की (क़ुदरत) की निशानियों में से एक ये भी है कि वह हवाओं को (बारिश) की ख़ुशख़बरी के वास्ते (क़ब्ल से) भेज दिया करता है और ताकि तुम्हें अपनी रहमत की लज्ज़त चखाए और इसलिए भी कि (इसकी बदौलत) कश्तियां उसके हुक्म से चल खड़ी हो और ताकि तुम उसके फज़ल व करम से (अपनी रोज़ी) की तलाश करो और इसलिए भी ताकि तुम शुक्र करो
47وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا مِن قَبْلِكَ رُسُلًا إِلَىٰ قَوْمِهِمْ فَجَاءُوهُم بِالْبَيِّنَاتِ فَانتَقَمْنَا مِنَ الَّذِينَ أَجْرَمُوا ۖ وَكَانَ حَقًّا عَلَيْنَا نَصْرُ الْمُؤْمِنِينَ
औ (ऐ रसूल) हमने तुमसे पहले और भी बहुत से पैग़म्बर उनकी क़ौमों के पास भेजे तो वह पैग़म्बर वाज़ेए व रौशन लेकर आए (मगर उन लोगों ने न माना) तो उन मुजरिमों से हमने (खूब) बदला लिया और हम पर तो मोमिनीन की मदद करना लाज़िम था ही
48اللَّهُ الَّذِي يُرْسِلُ الرِّيَاحَ فَتُثِيرُ سَحَابًا فَيَبْسُطُهُ فِي السَّمَاءِ كَيْفَ يَشَاءُ وَيَجْعَلُهُ كِسَفًا فَتَرَى الْوَدْقَ يَخْرُجُ مِنْ خِلَالِهِ ۖ فَإِذَا أَصَابَ بِهِ مَن يَشَاءُ مِنْ عِبَادِهِ إِذَا هُمْ يَسْتَبْشِرُونَ
ख़ुदा ही (क़ादिर तवाना) है जो हवाओं को भेजता है तो वह बादलों को उड़ाए उड़ाए फिरती हैं फिर वही ख़ुदा बादल को जिस तरह चाहता है आसमान में फैला देता है और (कभी) उसको टुकड़े (टुकड़े) कर देता है फिर तुम देखते हो कि बूँदियां उसके दरमियान से निकल पड़ती हैं फिर जब ख़ुदा उन्हें अपने बन्दों में से जिस पर चहता है बरसा देता है तो वह लोग खुशियाँ माानने लगते हैं
49وَإِن كَانُوا مِن قَبْلِ أَن يُنَزَّلَ عَلَيْهِم مِّن قَبْلِهِ لَمُبْلِسِينَ
अगरचे ये लोग उन पर (बाराने रहमत) नाज़िल होने से पहले (बारिश से) शुरु ही से बिल्कुल मायूस (और मज़बूर) थे
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अनुवाद — अर-रूम 47

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Tuesday, August 18, 2026

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