अर-रूम · 46/60
अनुवाद उच्चारण — अर-रूम
وَمِنْ آيَاتِهِ أَن يُرْسِلَ الرِّيَاحَ مُبَشِّرَاتٍ وَلِيُذِيقَكُم مِّن رَّحْمَتِهِ وَلِتَجْرِيَ الْفُلْكُ بِأَمْرِهِ وَلِتَبْتَغُوا مِن فَضْلِهِ وَلَعَلَّكُمْ تَشْكُرُونَ ۝٤٦
Wa min Aayaatiheee anyyursilar riyaaha mubashshi raatinw wa li yuzeeqakum mir rahmatihee wa litajriyal fulku bi amrihee wa litabtaghoo min fadlihee wa la`allakum tashkuroon
📖 हिंदी अर्थ
उसी की (क़ुदरत) की निशानियों में से एक ये भी है कि वह हवाओं को (बारिश) की ख़ुशख़बरी के वास्ते (क़ब्ल से) भेज दिया करता है और ताकि तुम्हें अपनी रहमत की लज्ज़त चखाए और इसलिए भी कि (इसकी बदौलत) कश्तियां उसके हुक्म से चल खड़ी हो और ताकि तुम उसके फज़ल व करम से (अपनी रोज़ी) की तलाश करो और इसलिए भी ताकि तुम शुक्र करो
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • मुबश्शिरात (मुबश्शिरात): खुशखबरी देने वाली (हवाएँ)।
  • अल-फुल्क (अल-फुल्क): जहाज़।
  • तब्तग़ू (तब्तग़ू): तलाश करो, ढूँढो।
  • फ़ज़्लिही (फ़ज़्लिही): उसकी कृपा (रिज़्क़ और रोज़ी)।
  • तश्कुरून (तश्कुरून): शुक्र अदा करो।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला की महान शक्ति और उसकी वहदानियत (एकता) की निशानियों में से एक यह है कि वह हवाओं को भेजता है, जो बारिश की खुशखबरी लेकर आती हैं। ये हवाएँ बादलों को उठाती हैं और उन्हें उन जगहों की ओर ले जाती हैं जहाँ अल्लाह चाहता है, ताकि इंसानों के दिलों में रहमत की बारिश की उम्मीद पैदा हो। यह अल्लाह की रहमत का एक नमूना है कि वह बारिश भेजकर ज़मीन को ज़िंदा करता है, फसलें उगाता है, और तुम्हें अपनी रहमत का मज़ा चखाता है।

इसी तरह, इन हवाओं की बदौलत समुद्र में जहाज़ चलते हैं, जो अल्लाह के हुक्म से सफर करते हैं। यह अल्लाह ही है जो हवाओं को नियंत्रित करता है, ताकि तुम समुद्र के रास्ते अपनी रोज़ी की तलाश कर सको, व्यापार कर सको, और दूर-दराज़ के इलाकों से जुड़ सको। यह सब कुछ अल्लाह की कृपा और उसकी ताक़त का सबूत है।

अल्लाह ने यह सब इसलिए किया ताकि तुम उसके एहसानों को पहचानो और उसका शुक्र अदा करो। जब तुम देखते हो कि हवाएँ बारिश लाती हैं, ज़मीन हरी-भरी हो जाती है, और जहाज़ समुद्र में चलते हैं, तो तुम्हें याद रखना चाहिए कि यह सब अल्लाह की देन है। वही सब कुछ करने वाला है, और उसी की इबादत करनी चाहिए।

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की निशानियों पर ग़ौर करना चाहिए। हवाएँ, बारिश, समुद्र और जहाज़ — ये सब अल्लाह की कुदरत के नमूने हैं। जो इंसान इन पर ग़ौर करता है, वह अल्लाह की अज़मत को पहचानता है और उसका शुक्र अदा करता है। शुक्र अदा करने से अल्लाह और नेमतें देता है, और यही इंसान की कामयाबी का रास्ता है।

इसलिए, ऐ इंसान! अल्लाह की इन नेमतों को कभी भूलना नहीं चाहिए। हर सुबह जब तुम हवा का झोंका महसूस करो, या बारिश की बूँदें देखो, या समुद्र में जहाज़ को चलते देखो, तो याद करो कि यह सब अल्लाह की रहमत और कृपा है। उसका शुक्र अदा करो, उसकी इबादत करो, और उसी की तरफ़ रुजू करो। यही सच्ची कामयाबी है।

🎧 सुनें

📜 आयत 44-48 — अर-रूम

44مَن كَفَرَ فَعَلَيْهِ كُفْرُهُ ۖ وَمَنْ عَمِلَ صَالِحًا فَلِأَنفُسِهِمْ يَمْهَدُونَ
जो काफ़िर बन बैठा उस पर उस के कुफ्र का वबाल है और जिन्होने अच्छे काम किए वह अपने ही आसाइश का सामान कर रहें है
45لِيَجْزِيَ الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ مِن فَضْلِهِ ۚ إِنَّهُ لَا يُحِبُّ الْكَافِرِينَ
ताकि जो लोग ईमान लाए और अच्छे अच्छे काम किए उनको ख़ुदा अपने फज़ल व (करम) से अच्छी जज़ा अता करेगा वह यक़ीनन कुफ्फ़ार से उलफ़त नहीं रखता
46وَمِنْ آيَاتِهِ أَن يُرْسِلَ الرِّيَاحَ مُبَشِّرَاتٍ وَلِيُذِيقَكُم مِّن رَّحْمَتِهِ وَلِتَجْرِيَ الْفُلْكُ بِأَمْرِهِ وَلِتَبْتَغُوا مِن فَضْلِهِ وَلَعَلَّكُمْ تَشْكُرُونَ
उसी की (क़ुदरत) की निशानियों में से एक ये भी है कि वह हवाओं को (बारिश) की ख़ुशख़बरी के वास्ते (क़ब्ल से) भेज दिया करता है और ताकि तुम्हें अपनी रहमत की लज्ज़त चखाए और इसलिए भी कि (इसकी बदौलत) कश्तियां उसके हुक्म से चल खड़ी हो और ताकि तुम उसके फज़ल व करम से (अपनी रोज़ी) की तलाश करो और इसलिए भी ताकि तुम शुक्र करो
47وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا مِن قَبْلِكَ رُسُلًا إِلَىٰ قَوْمِهِمْ فَجَاءُوهُم بِالْبَيِّنَاتِ فَانتَقَمْنَا مِنَ الَّذِينَ أَجْرَمُوا ۖ وَكَانَ حَقًّا عَلَيْنَا نَصْرُ الْمُؤْمِنِينَ
औ (ऐ रसूल) हमने तुमसे पहले और भी बहुत से पैग़म्बर उनकी क़ौमों के पास भेजे तो वह पैग़म्बर वाज़ेए व रौशन लेकर आए (मगर उन लोगों ने न माना) तो उन मुजरिमों से हमने (खूब) बदला लिया और हम पर तो मोमिनीन की मदद करना लाज़िम था ही
48اللَّهُ الَّذِي يُرْسِلُ الرِّيَاحَ فَتُثِيرُ سَحَابًا فَيَبْسُطُهُ فِي السَّمَاءِ كَيْفَ يَشَاءُ وَيَجْعَلُهُ كِسَفًا فَتَرَى الْوَدْقَ يَخْرُجُ مِنْ خِلَالِهِ ۖ فَإِذَا أَصَابَ بِهِ مَن يَشَاءُ مِنْ عِبَادِهِ إِذَا هُمْ يَسْتَبْشِرُونَ
ख़ुदा ही (क़ादिर तवाना) है जो हवाओं को भेजता है तो वह बादलों को उड़ाए उड़ाए फिरती हैं फिर वही ख़ुदा बादल को जिस तरह चाहता है आसमान में फैला देता है और (कभी) उसको टुकड़े (टुकड़े) कर देता है फिर तुम देखते हो कि बूँदियां उसके दरमियान से निकल पड़ती हैं फिर जब ख़ुदा उन्हें अपने बन्दों में से जिस पर चहता है बरसा देता है तो वह लोग खुशियाँ माानने लगते हैं
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अनुवाद — अर-रूम 46

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Tuesday, August 18, 2026

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