अर-रूम · 48/60
अनुवाद उच्चारण — अर-रूम
اللَّهُ الَّذِي يُرْسِلُ الرِّيَاحَ فَتُثِيرُ سَحَابًا فَيَبْسُطُهُ فِي السَّمَاءِ كَيْفَ يَشَاءُ وَيَجْعَلُهُ كِسَفًا فَتَرَى الْوَدْقَ يَخْرُجُ مِنْ خِلَالِهِ ۖ فَإِذَا أَصَابَ بِهِ مَن يَشَاءُ مِنْ عِبَادِهِ إِذَا هُمْ يَسْتَبْشِرُونَ ۝٤٨
Allaahul lazee yursilur riyaaha fatuseeru sahaaban fa yabsutuhoo fis samaaa`i kaifa yashaaa`u wa yaj`aluhoo kisafan fataral wadqa yakhruju min khilaalihee fa izaaa asaaba bihee mai yashaaa`u min `ibaadiheee izaa hum yastabshiroon
📖 हिंदी अर्थ
ख़ुदा ही (क़ादिर तवाना) है जो हवाओं को भेजता है तो वह बादलों को उड़ाए उड़ाए फिरती हैं फिर वही ख़ुदा बादल को जिस तरह चाहता है आसमान में फैला देता है और (कभी) उसको टुकड़े (टुकड़े) कर देता है फिर तुम देखते हो कि बूँदियां उसके दरमियान से निकल पड़ती हैं फिर जब ख़ुदा उन्हें अपने बन्दों में से जिस पर चहता है बरसा देता है तो वह लोग खुशियाँ माानने लगते हैं
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يُرْسِلُ الرِّيَاحَ: हवाओं को भेजता है
  • فَتُثِيرُ سَحَابًا: तो वह बादलों को उठाती हैं
  • فَيَبْسُطُهُ: तो वह उसे फैला देता है
  • كِسَفًا: टुकड़े-टुकड़े
  • الْوَدْقَ: वर्षा (बारिश)
  • مِنْ خِلَالِهِ: उसके बीच से
  • يَسْتَبْشِرُونَ: खुश होते हैं, शुभ समाचार पाते हैं

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ही वह है जो अपनी रहमत से हवाओं को भेजता है। ये हवाएँ बादलों को उठाती हैं, फिर अल्लाह उन बादलों को आसमान में जिस तरह चाहता है फैला देता है—कभी उन्हें हल्का रखता है, कभी घना कर देता है, और कभी उन्हें टुकड़ों-टुकड़ों में बाँट देता है। फिर आप देखते हैं कि उन्हीं बादलों के बीच से बारिश की बूँदें निकलती हैं। जब अल्लाह उस बारिश को अपने बंदों में से जिन पर चाहता है बरसाता है, तो वे लोग खुशी से झूम उठते हैं और शुभ समाचार पाकर प्रसन्न हो जाते हैं।

यह आयत हमें अल्लाह की कुदरत और उसकी रहमत पर ग़ौर करने की दावत देती है। जिस तरह बारिश के बाद ज़मीन हरी-भरी हो जाती है और लोगों के चेहरे खिल उठते हैं, उसी तरह अल्लाह की रहमत जब किसी बंदे पर नाज़िल होती है, तो उसका दिल इत्मिनान और सुकून से भर जाता है। यह आयत हमें सिखाती है कि हमें हर हाल में अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए और उसकी रहमत से कभी निराश नहीं होना चाहिए। जिस अल्लाह ने बादलों से पानी बरसाकर ज़मीन को ज़िंदा किया, वही अल्लाह मुर्दा दिलों को भी हिदायत की बारिश से ज़िंदा कर सकता है। इसलिए हमें अपने दिलों को अल्लाह की याद और उसकी इबादत से तर-बतर रखना चाहिए, ताकि हमारे दिल भी उसी तरह खिल उठें जैसे बारिश के बाद ज़मीन खिल उठती है। यह आयत मुसलमानों के लिए एक प्यारा पैग़ाम है कि अल्लाह की रहमत के दरवाज़े हमेशा खुले हैं, बस ज़रूरत है उसकी तरफ रुजू करने की और उसके एहसानों का शुक्र अदा करने की।

🎧 सुनें

📜 आयत 46-50 — अर-रूम

46وَمِنْ آيَاتِهِ أَن يُرْسِلَ الرِّيَاحَ مُبَشِّرَاتٍ وَلِيُذِيقَكُم مِّن رَّحْمَتِهِ وَلِتَجْرِيَ الْفُلْكُ بِأَمْرِهِ وَلِتَبْتَغُوا مِن فَضْلِهِ وَلَعَلَّكُمْ تَشْكُرُونَ
उसी की (क़ुदरत) की निशानियों में से एक ये भी है कि वह हवाओं को (बारिश) की ख़ुशख़बरी के वास्ते (क़ब्ल से) भेज दिया करता है और ताकि तुम्हें अपनी रहमत की लज्ज़त चखाए और इसलिए भी कि (इसकी बदौलत) कश्तियां उसके हुक्म से चल खड़ी हो और ताकि तुम उसके फज़ल व करम से (अपनी रोज़ी) की तलाश करो और इसलिए भी ताकि तुम शुक्र करो
47وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا مِن قَبْلِكَ رُسُلًا إِلَىٰ قَوْمِهِمْ فَجَاءُوهُم بِالْبَيِّنَاتِ فَانتَقَمْنَا مِنَ الَّذِينَ أَجْرَمُوا ۖ وَكَانَ حَقًّا عَلَيْنَا نَصْرُ الْمُؤْمِنِينَ
औ (ऐ रसूल) हमने तुमसे पहले और भी बहुत से पैग़म्बर उनकी क़ौमों के पास भेजे तो वह पैग़म्बर वाज़ेए व रौशन लेकर आए (मगर उन लोगों ने न माना) तो उन मुजरिमों से हमने (खूब) बदला लिया और हम पर तो मोमिनीन की मदद करना लाज़िम था ही
48اللَّهُ الَّذِي يُرْسِلُ الرِّيَاحَ فَتُثِيرُ سَحَابًا فَيَبْسُطُهُ فِي السَّمَاءِ كَيْفَ يَشَاءُ وَيَجْعَلُهُ كِسَفًا فَتَرَى الْوَدْقَ يَخْرُجُ مِنْ خِلَالِهِ ۖ فَإِذَا أَصَابَ بِهِ مَن يَشَاءُ مِنْ عِبَادِهِ إِذَا هُمْ يَسْتَبْشِرُونَ
ख़ुदा ही (क़ादिर तवाना) है जो हवाओं को भेजता है तो वह बादलों को उड़ाए उड़ाए फिरती हैं फिर वही ख़ुदा बादल को जिस तरह चाहता है आसमान में फैला देता है और (कभी) उसको टुकड़े (टुकड़े) कर देता है फिर तुम देखते हो कि बूँदियां उसके दरमियान से निकल पड़ती हैं फिर जब ख़ुदा उन्हें अपने बन्दों में से जिस पर चहता है बरसा देता है तो वह लोग खुशियाँ माानने लगते हैं
49وَإِن كَانُوا مِن قَبْلِ أَن يُنَزَّلَ عَلَيْهِم مِّن قَبْلِهِ لَمُبْلِسِينَ
अगरचे ये लोग उन पर (बाराने रहमत) नाज़िल होने से पहले (बारिश से) शुरु ही से बिल्कुल मायूस (और मज़बूर) थे
50فَانظُرْ إِلَىٰ آثَارِ رَحْمَتِ اللَّهِ كَيْفَ يُحْيِي الْأَرْضَ بَعْدَ مَوْتِهَا ۚ إِنَّ ذَٰلِكَ لَمُحْيِي الْمَوْتَىٰ ۖ وَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ
ग़रज़ ख़ुदा की रहमत के आसार की तरफ देखो तो कि वह क्योंकर ज़मीन को उसकी परती होने के बाद आबाद करता है बेशक यक़ीनी वही मुर्दो को ज़िन्दा करने वाला और वही हर चीज़ पर क़ादिर है
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अनुवाद — अर-रूम 48

सूरा अर-रूम आयत 48 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ख़ुदा ही (क़ादिर तवाना) है जो हवाओं को भेजता है…

सूरा आयत 48/60 — अर-रूम الروم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अर-रूम सुनें, अर-रूम अनुवाद, अर-रूम mp3, अर-रूम pdf. आयत 46–50. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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