अर-रूम · 50/60
अनुवाद उच्चारण — अर-रूम
فَانظُرْ إِلَىٰ آثَارِ رَحْمَتِ اللَّهِ كَيْفَ يُحْيِي الْأَرْضَ بَعْدَ مَوْتِهَا ۚ إِنَّ ذَٰلِكَ لَمُحْيِي الْمَوْتَىٰ ۖ وَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ ۝٥٠
Fanzur ilaaa aasaari rahmatil laahi kaifa yuhyil arda ba`da mawtihaa; inna zaalika lamuhyil mawtaa wa Huwa `alaa kulli shai`in Qadeer
📖 हिंदी अर्थ
ग़रज़ ख़ुदा की रहमत के आसार की तरफ देखो तो कि वह क्योंकर ज़मीन को उसकी परती होने के बाद आबाद करता है बेशक यक़ीनी वही मुर्दो को ज़िन्दा करने वाला और वही हर चीज़ पर क़ादिर है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • آثار رحمت الله: अल्लाह की रहमत के निशान, यानी बारिश के प्रभाव और उसके परिणाम।
  • يُحْيِي الْأَرْضَ بَعْدَ مَوْتِهَا: ज़मीन को उसके सूखेपन और बंजर होने के बाद जीवित करता है (यानी हरा-भरा करता है)।
  • لَمُحْيِي الْمَوْتَى: यह (वही ज़मीन को जीवित करने वाला) मुर्दों को जीवित करने वाला है।
  • قَدِير: हर चीज़ पर पूर्ण सामर्थ्य रखने वाला।

तफसीर (व्याख्या):

ऐ नज़र रखने वाले इंसान! ज़रा ग़ौर और फ़िक्र की नज़र से अल्लाह की रहमत के निशानों को देख — यानी बारिश को, जो अल्लाह अपने बंदों पर रहमत के तौर पर नाज़िल करता है। देखो कि वह बारिश किस तरह सूखी, बंजर और मुर्दा ज़मीन को जीवित कर देती है, और उसमें तरह-तरह के पौधे, पेड़, खेती और फल उगा देती है। जो ज़मीन कल तक बिल्कुल बेजान और सूखी पड़ी थी, वही आज हरी-भरी, लहलहाती और जीवन से भरपूर नज़र आती है।

यह मंज़र सिर्फ़ एक कुदरती नज़ारा नहीं है, बल्कि यह अल्लाह की क़ुदरत की एक ज़िंदा निशानी है। जिस अल्लाह ने इस मुर्दा ज़मीन को जीवित कर दिया, वही अल्लाह क़यामत के दिन मुर्दों को भी जीवित करेगा और उन्हें उनकी क़ब्रों से उठाएगा। यह कोई मुश्किल काम नहीं है, क्योंकि वह हर चीज़ पर पूर्ण सामर्थ्य रखता है — उसके लिए कुछ भी नामुमकिन नहीं है। जिस तरह वह बारिश के ज़रिए मुर्दा ज़मीन को ज़िंदगी देता है, उसी तरह वह मुर्दा इंसानों को भी दोबारा ज़िंदा करने पर पूरी तरह क़ादिर है।


दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):

यह आयत हमें अल्लाह की रहमत और क़ुदरत पर ग़ौर करने की दावत देती है। जब हम बारिश के बाद धरती को हरा-भरा होते देखते हैं, तो यह हमारे लिए एक जीती-जागती सबक़ है कि जिस रब ने यह किया, वह हमें भी मौत के बाद ज़िंदा करके हमारे अच्छे और बुरे आमाल का हिसाब लेगा। यह आयत हमें अल्लाह की रहमत से उम्मीद रखना सिखाती है और साथ ही उसके इंसाफ़ से डरना भी सिखाती है। अल्लाह की रहमत असीम है — जैसे वह सूखी ज़मीन पर बारिश भेजता है, वैसे ही वह गुनाहगार बंदों पर भी रहमत की बारिश भेजता है, बशर्ते वे तौबा करके उसकी तरफ़ पलटें। यह आयत हमें यक़ीन दिलाती है कि मौत के बाद की ज़िंदगी हक़ है, और उस दिन का इम्तिहान हमारे आज के आमाल पर होगा। इसलिए हमें चाहिए कि हम अल्लाह की नेमतों पर ग़ौर करें, उसका शुक्र अदा करें, और उसकी रहमत की तरफ़ दौड़ें — क्योंकि वही सबसे बड़ा रहम करने वाला और हर चीज़ पर क़ादिर है।

🎧 सुनें

📜 आयत 48-52 — अर-रूम

48اللَّهُ الَّذِي يُرْسِلُ الرِّيَاحَ فَتُثِيرُ سَحَابًا فَيَبْسُطُهُ فِي السَّمَاءِ كَيْفَ يَشَاءُ وَيَجْعَلُهُ كِسَفًا فَتَرَى الْوَدْقَ يَخْرُجُ مِنْ خِلَالِهِ ۖ فَإِذَا أَصَابَ بِهِ مَن يَشَاءُ مِنْ عِبَادِهِ إِذَا هُمْ يَسْتَبْشِرُونَ
ख़ुदा ही (क़ादिर तवाना) है जो हवाओं को भेजता है तो वह बादलों को उड़ाए उड़ाए फिरती हैं फिर वही ख़ुदा बादल को जिस तरह चाहता है आसमान में फैला देता है और (कभी) उसको टुकड़े (टुकड़े) कर देता है फिर तुम देखते हो कि बूँदियां उसके दरमियान से निकल पड़ती हैं फिर जब ख़ुदा उन्हें अपने बन्दों में से जिस पर चहता है बरसा देता है तो वह लोग खुशियाँ माानने लगते हैं
49وَإِن كَانُوا مِن قَبْلِ أَن يُنَزَّلَ عَلَيْهِم مِّن قَبْلِهِ لَمُبْلِسِينَ
अगरचे ये लोग उन पर (बाराने रहमत) नाज़िल होने से पहले (बारिश से) शुरु ही से बिल्कुल मायूस (और मज़बूर) थे
50فَانظُرْ إِلَىٰ آثَارِ رَحْمَتِ اللَّهِ كَيْفَ يُحْيِي الْأَرْضَ بَعْدَ مَوْتِهَا ۚ إِنَّ ذَٰلِكَ لَمُحْيِي الْمَوْتَىٰ ۖ وَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ
ग़रज़ ख़ुदा की रहमत के आसार की तरफ देखो तो कि वह क्योंकर ज़मीन को उसकी परती होने के बाद आबाद करता है बेशक यक़ीनी वही मुर्दो को ज़िन्दा करने वाला और वही हर चीज़ पर क़ादिर है
51وَلَئِنْ أَرْسَلْنَا رِيحًا فَرَأَوْهُ مُصْفَرًّا لَّظَلُّوا مِن بَعْدِهِ يَكْفُرُونَ
और अगर हम (खेती की नुकसान देह) हवा भेजें फिर लोग खेती को (उसी हवा की वजह से) ज़र्द (परस मुर्दा) देखें तो वह लोग इसके बाद (फौरन) नाशुक्री करने लगें
52فَإِنَّكَ لَا تُسْمِعُ الْمَوْتَىٰ وَلَا تُسْمِعُ الصُّمَّ الدُّعَاءَ إِذَا وَلَّوْا مُدْبِرِينَ
(ऐ रसूल) तुम तो (अपनी) आवाज़ न मुर्दो ही को सुना सकते हो और न बहरों को सुना सकते हो (ख़ुसूसन) जब वह पीठ फेरकर चले जाएँ
अर-रूमकुरान सूची
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50आयत

अनुवाद — अर-रूम 50

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Tuesday, August 18, 2026

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