अर-रूम · 49/60
अनुवाद उच्चारण — अर-रूम
وَإِن كَانُوا مِن قَبْلِ أَن يُنَزَّلَ عَلَيْهِم مِّن قَبْلِهِ لَمُبْلِسِينَ ۝٤٩
Wa in kaanoo min qabli any yunazzala `alaihim min qablihee lamubliseen
📖 हिंदी अर्थ
अगरचे ये लोग उन पर (बाराने रहमत) नाज़िल होने से पहले (बारिश से) शुरु ही से बिल्कुल मायूस (और मज़बूर) थे
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • मुब्लिसीन (مُبْلِسِينَ): अत्यधिक निराशा और हताशा में डूबे हुए, ऐसे लोग जो किसी भी अच्छी उम्मीद से मायूस हो चुके हों।

तफसीर (व्याख्या):

यह आयत उस अल्लाह की रहमत और कुदरत का बयान करती है जो बारिश से पहले लोगों की हालत को उजागर करती है। जब आसमान से बारिश नहीं होती और सूखा पड़ता है, तो लोग अपनी फसलों, जानवरों और जीवन के साधनों के बारे में सोचकर बेहद निराश और हताश हो जाते हैं। उनके चेहरे पर मायूसी छा जाती है, और उन्हें लगता है कि शायद अब कभी बारिश नहीं होगी। वे अपनी कमजोरी और लाचारी को महसूस करते हैं, क्योंकि वे जानते हैं कि पानी उनके हाथ में नहीं है।

लेकिन जब अल्लाह की रहमत से बारिश आती है, तो वही लोग खुशी से झूम उठते हैं। यह दृश्य इंसान को सिखाता है कि असली ताकत और रिज़्क़ देने वाला केवल अल्लाह है। वही है जो बंदों की मायूसी को खुशी में बदल देता है, और उसकी रहमत से ही ज़मीन हरी-भरी हो जाती है। यह आयत हमें याद दिलाती है कि मुसीबत के वक्त में भी अल्लाह की रहमत से निराश नहीं होना चाहिए, क्योंकि उसकी कुदरत हर चीज़ पर छाई हुई है।

दावत और नसीहत:

प्यारे भाइयों और बहनों! जब आप किसी मुसीबत या परेशानी में हों, तो याद रखें कि अल्लाह की रहमत का दरवाज़ा हमेशा खुला है। जिस तरह बारिश से पहले लोग मायूस होते हैं, लेकिन फिर अल्लाह की रहमत उन पर बरसती है, उसी तरह आपकी ज़िंदगी की हर मुश्किल के बाद आसानी आ सकती है। अल्लाह से उम्मीद न छोड़ें, क्योंकि वही है जो अंधेरी रात के बाद सुबह की रोशनी लाता है। उसकी रहमत से निराश होना शैतान की तरफ से है, जो आपको अल्लाह की तरफ से दूर करना चाहता है। इसलिए हमेशा अल्लाह पर भरोसा रखें, और उससे दुआ करते रहें, क्योंकि वह सुनने वाला और क़रीब है। उसकी रहमत की बारिश आपकी ज़िंदगी को भी खुशियों और बरकतों से भर देगी, इंशाअल्लाह।

🎧 सुनें

📜 आयत 47-51 — अर-रूम

47وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا مِن قَبْلِكَ رُسُلًا إِلَىٰ قَوْمِهِمْ فَجَاءُوهُم بِالْبَيِّنَاتِ فَانتَقَمْنَا مِنَ الَّذِينَ أَجْرَمُوا ۖ وَكَانَ حَقًّا عَلَيْنَا نَصْرُ الْمُؤْمِنِينَ
औ (ऐ रसूल) हमने तुमसे पहले और भी बहुत से पैग़म्बर उनकी क़ौमों के पास भेजे तो वह पैग़म्बर वाज़ेए व रौशन लेकर आए (मगर उन लोगों ने न माना) तो उन मुजरिमों से हमने (खूब) बदला लिया और हम पर तो मोमिनीन की मदद करना लाज़िम था ही
48اللَّهُ الَّذِي يُرْسِلُ الرِّيَاحَ فَتُثِيرُ سَحَابًا فَيَبْسُطُهُ فِي السَّمَاءِ كَيْفَ يَشَاءُ وَيَجْعَلُهُ كِسَفًا فَتَرَى الْوَدْقَ يَخْرُجُ مِنْ خِلَالِهِ ۖ فَإِذَا أَصَابَ بِهِ مَن يَشَاءُ مِنْ عِبَادِهِ إِذَا هُمْ يَسْتَبْشِرُونَ
ख़ुदा ही (क़ादिर तवाना) है जो हवाओं को भेजता है तो वह बादलों को उड़ाए उड़ाए फिरती हैं फिर वही ख़ुदा बादल को जिस तरह चाहता है आसमान में फैला देता है और (कभी) उसको टुकड़े (टुकड़े) कर देता है फिर तुम देखते हो कि बूँदियां उसके दरमियान से निकल पड़ती हैं फिर जब ख़ुदा उन्हें अपने बन्दों में से जिस पर चहता है बरसा देता है तो वह लोग खुशियाँ माानने लगते हैं
49وَإِن كَانُوا مِن قَبْلِ أَن يُنَزَّلَ عَلَيْهِم مِّن قَبْلِهِ لَمُبْلِسِينَ
अगरचे ये लोग उन पर (बाराने रहमत) नाज़िल होने से पहले (बारिश से) शुरु ही से बिल्कुल मायूस (और मज़बूर) थे
50فَانظُرْ إِلَىٰ آثَارِ رَحْمَتِ اللَّهِ كَيْفَ يُحْيِي الْأَرْضَ بَعْدَ مَوْتِهَا ۚ إِنَّ ذَٰلِكَ لَمُحْيِي الْمَوْتَىٰ ۖ وَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ
ग़रज़ ख़ुदा की रहमत के आसार की तरफ देखो तो कि वह क्योंकर ज़मीन को उसकी परती होने के बाद आबाद करता है बेशक यक़ीनी वही मुर्दो को ज़िन्दा करने वाला और वही हर चीज़ पर क़ादिर है
51وَلَئِنْ أَرْسَلْنَا رِيحًا فَرَأَوْهُ مُصْفَرًّا لَّظَلُّوا مِن بَعْدِهِ يَكْفُرُونَ
और अगर हम (खेती की नुकसान देह) हवा भेजें फिर लोग खेती को (उसी हवा की वजह से) ज़र्द (परस मुर्दा) देखें तो वह लोग इसके बाद (फौरन) नाशुक्री करने लगें
अर-रूमकुरान सूची
60आयत
मक्कीRevelation
49आयत

अनुवाद — अर-रूम 49

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Tuesday, August 18, 2026

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