Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- تَتَجَافَىٰ: अलग होना, ऊपर उठना, दूर हटना।
- جُنُوبُهُمْ: उनके पहलू (करवटें)।
- الْمَضَاجِعِ: सोने के स्थान, बिस्तर, पलंग।
- خَوْفًا وَطَمَعًا: डर (अल्लाह के अज़ाब से) और लालच (उसकी रहमत की उम्मीद)।
- يُنفِقُونَ: खर्च करते हैं (अल्लाह की राह में)।
तफसीर (व्याख्या):
यह आयत उन मोमिनों के खूबसूरत और पाकीज़ा औसाफ (गुणों) का ज़िक्र करती है जो रात की नमाज़ (तहज्जुद) के लिए उठते हैं। उनके पहलू नरम बिस्तरों से अलग हो जाते हैं, यानी वे आराम और नींद की मिठास को छोड़कर अल्लाह की इबादत के लिए खड़े हो जाते हैं। वे रात के सन्नाटे में अपने रब को पुकारते हैं—उसके अज़ाब से डरते हुए और उसकी रहमत की उम्मीद रखते हुए। उनका दिल दोनों के बीच झूलता है: एक तरफ़ खौफ़ कि कहीं उनकी इबादत क़ुबूल न हो, और दूसरी तरफ़ तमअ (लालच) कि अल्लाह की रहमत उन्हें जन्नत तक पहुँचाए। यही वह संतुलन है जो मोमिन को इख़लास (शुद्ध नियत) पर क़ायम रखता है।
इसके साथ ही, वे सिर्फ़ रात की इबादत तक सीमित नहीं रहते, बल्कि दिन में भी अल्लाह ने उन्हें जो रिज़्क़ दिया है, उसमें से खर्च करते हैं—चाहे वह ज़कात हो, सदक़ा हो, या अल्लाह की राह में किसी भी तरह की भलाई। यानी उनकी ज़िंदगी इबादत और खिदमत का एक समग्र नमूना है: रात को आँसू और दुआ, दिन को खर्च और नेकी।
यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चा ईमान सिर्फ़ ज़ुबान का दावा नहीं, बल्कि अमल का सबूत है। जो लोग रात को उठकर अल्लाह से जुड़ते हैं और दिन में अपने माल से दूसरों की मदद करते हैं, उनके लिए अल्लाह ने ऐसा इनाम तैयार किया है जो किसी आँख ने नहीं देखा, किसी कान ने नहीं सुना और किसी दिल ने नहीं सोचा। यही वह लोग हैं जिनकी आँखें ठंडी होंगी और जो अपने रब की मेहरबानी से जन्नत की नेमतों में होंगे।
प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें बुला रही है कि हम अपनी नींद में से थोड़ा सा हिस्सा अल्लाह के लिए निकालें, अपने बिस्तर की गर्माहट को छोड़कर सजदे की ठंडक महसूस करें, और अपने माल में से कुछ हिस्सा उन लोगों के लिए निकालें जो ज़रूरतमंद हैं। यही वह रास्ता है जो हमें अल्लाह की मुहब्बत तक पहुँचाता है और हमारे दिलों को सुकून देता है। अल्लाह हमें इस नेक अमल की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 14-18 — सूरा अस-सजदा
अनुवाद — अस-सजदा 16
सूरा अस-सजदा आयत 16 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (रात) के वक्त उनके पहलू बिस्तरों से आशना नहीं होते…सूरा आयत 16/30 — सूरा अस-सजदा السجدة (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अस-सजदा सुनें, सूरा अस-सजदा अनुवाद, सूरा अस-सजदा mp3, सूरा अस-सजदा pdf. आयत 14–18. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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