अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- क़ुर्रतु अ'युन (قرة أعين) — आँखों की ठंडक, यानी वह चीज़ जिसे देखकर आँखें ठंडी हो जाएँ और दिल को सुकून मिले।
- उख़फ़िया (أُخْفِيَ) — छिपाई गई, यानी वह चीज़ जो आँखों से छिपाई गई हो और किसी को उसका पता न हो।
- जज़ा (جزاء) — बदला, पुरस्कार।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में अपने नेक बंदों के लिए उस अनोखे और अज़ीम इनाम का ज़िक्र कर रहे हैं जो उन्होंने उनके लिए तैयार किया है। अल्लाह फ़रमाता है कि किसी भी इंसान को — चाहे वह कोई फ़रिश्ता हो, कोई नबी हो या कोई आम इंसान — उस चीज़ का पूरा इल्म नहीं है जो अल्लाह ने उन मोमिनों के लिए छिपा रखी है। यह वह नेमत है जो आँखों को ठंडक पहुँचाती है, दिलों को खुशी से भर देती है और हर दर्द और ग़म को भुला देती है।
यह इनाम उनके उन अच्छे आमाल का बदला है जो उन्होंने दुनिया में किए — नमाज़, रोज़ा, ज़कात, सब्र, शुक्र, अच्छे अख़्लाक़ और अल्लाह की राह में किए गए हर नेक काम का। यह जज़ा इतना बड़ा और शानदार है कि उसकी हक़ीक़त को कोई नहीं जान सकता, सिवाय अल्लाह के।
यह आयत मोमिनों के लिए खुशख़बरी है कि उनकी मेहनत और अच्छे काम बेकार नहीं जाएँगे। अल्लाह ने उनके लिए ऐसी चीज़ें छिपा रखी हैं जिन्हें किसी आँख ने नहीं देखा, किसी कान ने नहीं सुना और किसी दिल ने नहीं सोचा। यह अल्लाह की रहमत और करम का नतीजा है।
इस आयत से हमें सबक़ मिलता है कि हमें अपने अच्छे कामों पर भरोसा रखना चाहिए और अल्लाह से उसकी रहमत की उम्मीद करनी चाहिए। अल्लाह कभी किसी का अच्छा काम बेकार नहीं करता। जो लोग दुनिया में अल्लाह की इबादत करते हैं, उसके हुक्मों पर चलते हैं और उसकी राह में सब्र करते हैं, उनके लिए आख़िरत में ऐसा इनाम है जिसकी कोई इंतिहा नहीं।
यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि अल्लाह की नेमतें सिर्फ़ दुनिया तक महदूद नहीं हैं, बल्कि आख़िरत की नेमतें कहीं बेहतर और बड़ी हैं। इसलिए हमें दुनिया की चमक-दमक में खोकर आख़िरत को नहीं भूलना चाहिए। जो लोग अल्लाह के लिए अपनी ज़िंदगी बिताते हैं, उनके लिए अल्लाह के पास वह कुछ है जो किसी ने देखा नहीं, किसी ने सुना नहीं और किसी के दिल में भी नहीं आया।
यही वह चीज़ है जो मोमिन को दुनिया की मुश्किलों और परेशानियों में सब्र और सुकून देती है। उसे यक़ीन होता है कि उसकी मेहनत और कुर्बानी का अच्छा बदला उसे मिलकर रहेगा। अल्लाह हमें भी अपने नेक बंदों में शामिल करे और हमें उस इनाम का हक़दार बनाए। आमीन।
📜 आयत 15-19 — अस-सजदा
अनुवाद — अस-सजदा 17
सूरा अस-सजदा आयत 17 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : उन लोगों की कारगुज़ारियों के बदले में कैसी कैसी ऑंखों…सूरा आयत 17/30 — अस-सजदा السجدة (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अस-सजदा सुनें, अस-सजदा अनुवाद, अस-सजदा mp3, अस-सजदा pdf. आयत 15–19. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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