अल-अहज़ाब · 45/73
अनुवाद उच्चारण — अल-अहज़ाब
يَا أَيُّهَا النَّبِيُّ إِنَّا أَرْسَلْنَاكَ شَاهِدًا وَمُبَشِّرًا وَنَذِيرًا ۝٤٥
Yaaa aiyuhan Nabiyyu innaaa arsalnaaka shaahidanw wa mubashshiranw wa nazeeraa
📖 हिंदी अर्थ
ऐ नबी हमने तुमको (लोगों का) गवाह और (नेकों को बेहश्त की) खुशख़बरी देने वाला और बदों को अज़ाब से डराने वाला

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • شَاهِدًا (शाहिदन): गवाह बनाकर भेजा।
  • مُبَشِّرًا (मुबश्शिरन): खुशखबरी सुनाने वाला।
  • نَذِيرًا (नज़ीरन): डराने वाला, सावधान करने वाला।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! हमने आपको इस उम्मत के लिए गवाह बनाकर भेजा है, ताकि आप अपनी उम्मत पर गवाह हों कि आपने अल्लाह का पैग़ाम पूरा-पूरा पहुँचा दिया। आप उन लोगों के लिए खुशखबरी सुनाने वाले हैं जो ईमान लाएँगे और नेक अमल करेंगे, उन्हें जन्नत की रहमत की बशारत देंगे। और आप उन लोगों के लिए डराने वाले हैं जो नाफ़रमानी करेंगे और झुठलाएँगे, उन्हें अल्लाह के अज़ाब से आगाह करेंगे। आप अल्लाह की तरफ़ बुलाने वाले हैं, उसके हुक्म से, और आप एक रौशन चिराग़ हैं — जो आपके पास आए, उसके लिए रौशनी का ज़रिया बनते हैं। आपकी लाई हुई हिदायत सूरज की तरह रौशन है, जिसे साफ़ दिन की तरह कोई नहीं झुठला सकता सिवाय उसके जो हठधर्मी करे।

दावती पहलू:

यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह ने अपने नबी को दो बड़ी ज़िम्मेदारियाँ दीं: एक खुशखबरी सुनाना और दूसरी डराना। यही दो पहलू हमारी ज़िंदगी में भी होने चाहिए — हमें लोगों को अल्लाह की रहमत और जन्नत की खुशखबरी देनी चाहिए, और साथ ही उन्हें अल्लाह के अज़ाब से डराना भी चाहिए, ताकि वे ग़लत रास्ते से बचें। यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि नबी ﷺ की तरह हमें भी अपने आस-पास के लोगों के लिए रहमत का ज़रिया बनना चाहिए — उन्हें अच्छाई की तरफ़ बुलाना चाहिए और बुराई से रोकना चाहिए। जो लोग नबी ﷺ की इस दावत को क़बूल करेंगे, उनके लिए जन्नत की खुशखबरी है; और जो इनकार करेंगे, उनके लिए अल्लाह का अज़ाब है। यह हमारे लिए एक बड़ी नेमत है कि अल्लाह ने हमें ऐसा नबी दिया जो हमारे लिए रहमत और रौशनी बनकर आया।



📜 आयत 43-47 — अल-अहज़ाब

43هُوَ الَّذِي يُصَلِّي عَلَيْكُمْ وَمَلَائِكَتُهُ لِيُخْرِجَكُم مِّنَ الظُّلُمَاتِ إِلَى النُّورِ ۚ وَكَانَ بِالْمُؤْمِنِينَ رَحِيمًا
वह वही तो है जो खुद तुमपर दूरूद (दर्दों रहमत) भेजता है और उसके फ़रिश्ते ताकि तुमको (कुफ़्र की) तारीक़ियों से निकालकर (ईमान की) रौशनी में ले जाए और खुदा ईमानवालों पर बड़ा मेहरबान है
44تَحِيَّتُهُمْ يَوْمَ يَلْقَوْنَهُ سَلَامٌ ۚ وَأَعَدَّ لَهُمْ أَجْرًا كَرِيمًا
जिस दिन उसकी बारगाह में हाज़िर होंगे (उस दिन) उनकी मुरादात (उसकी तरफ से हर क़िस्म की) सलामती होगी और खुदा ने तो उनके वास्ते बहुत अच्छा बदला (बेहश्त) तैयार रखा है
45يَا أَيُّهَا النَّبِيُّ إِنَّا أَرْسَلْنَاكَ شَاهِدًا وَمُبَشِّرًا وَنَذِيرًا
ऐ नबी हमने तुमको (लोगों का) गवाह और (नेकों को बेहश्त की) खुशख़बरी देने वाला और बदों को अज़ाब से डराने वाला
46وَدَاعِيًا إِلَى اللَّهِ بِإِذْنِهِ وَسِرَاجًا مُّنِيرًا
और खुदा की तरफ उसी के हुक्म से बुलाने वाला और (ईमान व हिदायत का) रौशन चिराग़ बनाकर भेजा
47وَبَشِّرِ الْمُؤْمِنِينَ بِأَنَّ لَهُم مِّنَ اللَّهِ فَضْلًا كَبِيرًا
और तुम मोमिनीन को खुशख़बरी दे दो कि उनके लिए खुदा की तरफ से बहुत बड़ी (मेहरबानी और) बख्शिश है
अल-अहज़ाबकुरान सूची
73आयत
मदनीRevelation
45आयत

अनुवाद — अल-अहज़ाब 45

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Tuesday, August 18, 2026

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