अल-अहज़ाब · 44/73
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-अहज़ाब
تَحِيَّتُهُمْ يَوْمَ يَلْقَوْنَهُ سَلَامٌ ۚ وَأَعَدَّ لَهُمْ أَجْرًا كَرِيمًا ۝٤٤
Tahiyyatuhum Yawma yalqawnahoo salaamunw wa a`adda lahum ajran kareemaa
📖 हिंदी अर्थ
जिस दिन उसकी बारगाह में हाज़िर होंगे (उस दिन) उनकी मुरादात (उसकी तरफ से हर क़िस्म की) सलामती होगी और खुदा ने तो उनके वास्ते बहुत अच्छा बदला (बेहश्त) तैयार रखा है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • تَحِيَّةُهُمْ: उनका स्वागत/अभिवादन
  • يَوْمَ يَلْقَوْنَهُ: जिस दिन वे उससे (अल्लाह से) मिलेंगे
  • سَلَامٌ: सलामती, शांति और सुरक्षा
  • أَجْرًا كَرِيمًا: बड़ा सम्मानजनक और उत्तम प्रतिफल

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत मोमिनीन (ईमानवालों) के लिए उस महान दिन की खुशखबरी देती है जब वे अपने रब से मुलाक़ात करेंगे। उस दिन उनका स्वागत "सलाम" से किया जाएगा—यानी अल्लाह तआला खुद उन पर सलाम भेजेगा और उन्हें हर परेशानी, हर डर और हर अज़ाब से महफूज़ रखेगा। यह सलाम सिर्फ़ एक शब्द नहीं, बल्कि एक ऐसा तोहफा है जो उनके दिलों को सुकून से भर देगा और उन्हें हमेशा के लिए सुरक्षित कर देगा।

अल्लाह तआला ने उनके लिए एक "करीम" (बहुत ही सम्मानजनक और उदार) अज्र तैयार किया है—और वह अज्र जन्नत है। यह जन्नत उनके उन आमाल (अच्छे कामों) का इनाम है जो उन्होंने दुनिया में अल्लाह की इताअत (आज्ञाकारिता) में किए, और उन गुनाहों से बचे रहे जिनसे अल्लाह ने मना किया था।

दावत और नसीहत:

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह तआला अपने नेक बंदों से कितना मुहब्बत करता है। जिस दिन लोग अपने रब के सामने हाज़िर होंगे, उस दिन मोमिनीन के लिए सलामती और खुशी होगी। यह वही दिन है जिसके लिए हमें तैयारी करनी है। अगर हम चाहते हैं कि हमारा स्वागत भी उस दिन सलाम से हो, तो आज ही अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक ढाल लें। नमाज़ की पाबंदी करें, अच्छे कामों में जल्दी करें, और उन चीज़ों से बचें जो अल्लाह को नापसंद हैं। याद रखें, जन्नत की यह "करीम" मेहमाननवाज़ी उन्हीं के लिए है जो दुनिया में अल्लाह के मेहमान बनकर रहे—यानी उसकी इबादत करते रहे और उसकी राह में भलाई करते रहे। अल्लाह हम सबको इस महान इनाम का हक़दार बनाए। आमीन।



📜 आयत 42-46 — सूरा अल-अहज़ाब

42وَسَبِّحُوهُ بُكْرَةً وَأَصِيلًا
सुबह व शाम उसकी तसबीह करते रहो
43هُوَ الَّذِي يُصَلِّي عَلَيْكُمْ وَمَلَائِكَتُهُ لِيُخْرِجَكُم مِّنَ الظُّلُمَاتِ إِلَى النُّورِ ۚ وَكَانَ بِالْمُؤْمِنِينَ رَحِيمًا
वह वही तो है जो खुद तुमपर दूरूद (दर्दों रहमत) भेजता है और उसके फ़रिश्ते ताकि तुमको (कुफ़्र की) तारीक़ियों से निकालकर (ईमान की) रौशनी में ले जाए और खुदा ईमानवालों पर बड़ा मेहरबान है
44تَحِيَّتُهُمْ يَوْمَ يَلْقَوْنَهُ سَلَامٌ ۚ وَأَعَدَّ لَهُمْ أَجْرًا كَرِيمًا
जिस दिन उसकी बारगाह में हाज़िर होंगे (उस दिन) उनकी मुरादात (उसकी तरफ से हर क़िस्म की) सलामती होगी और खुदा ने तो उनके वास्ते बहुत अच्छा बदला (बेहश्त) तैयार रखा है
45يَا أَيُّهَا النَّبِيُّ إِنَّا أَرْسَلْنَاكَ شَاهِدًا وَمُبَشِّرًا وَنَذِيرًا
ऐ नबी हमने तुमको (लोगों का) गवाह और (नेकों को बेहश्त की) खुशख़बरी देने वाला और बदों को अज़ाब से डराने वाला
46وَدَاعِيًا إِلَى اللَّهِ بِإِذْنِهِ وَسِرَاجًا مُّنِيرًا
और खुदा की तरफ उसी के हुक्म से बुलाने वाला और (ईमान व हिदायत का) रौशन चिराग़ बनाकर भेजा
अल-अहज़ाबकुरान सूची
73आयत
मदनीअवतरण स्थान
44आयत

अनुवाद — अल-अहज़ाब 44

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Thursday, October 1, 2026

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