अल-अहज़ाब · 46/73
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-अहज़ाब
وَدَاعِيًا إِلَى اللَّهِ بِإِذْنِهِ وَسِرَاجًا مُّنِيرًا ۝٤٦
Wa daa`iyan ilal laahi bi iznihee wa siraajam muneeraa
📖 हिंदी अर्थ
और खुदा की तरफ उसी के हुक्म से बुलाने वाला और (ईमान व हिदायत का) रौशन चिराग़ बनाकर भेजा

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • दाइयन (دَاعِيًا): बुलाने वाला, पुकारने वाला।
  • सिराजन (سِرَاجًا): दीपक, चिराग़।
  • मुनीरन (مُنِيرًا): रोशन करने वाला, प्रकाश फैलाने वाला।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! अल्लाह ने आपको इस उम्मत के लिए एक ऐसा दीपक बनाकर भेजा है जो अंधेरों में रास्ता दिखाता है। आपका काम सिर्फ़ ख़बर सुनाना नहीं, बल्कि लोगों को अल्लाह की ओर बुलाना है—उसके दीन की ओर, उसकी इबादत की ओर, और उसके सिवा हर चीज़ से बेज़ारी की ओर। यह बुलाना आपके अपने दम-ख़म से नहीं, बल्कि अल्लाह के हुक्म और उसकी तौफ़ीक़ से है। अल्लाह ने आपको इस काम के लिए चुना और आपको वह ताक़त और हिम्मत दी जो इस दावत के लिए ज़रूरी थी।

और आपको "सिराजुन मुनीर" (रोशन दीपक) बनाया—यानी आपकी तालीमात, आपका चरित्र, आपकी सीरत, आपका क़ुरआन—सब कुछ ऐसा रोशन है कि जो कोई भी हिदायत का तालिब है, वह आपके नूर से रोशनी हासिल कर सकता है। जिस तरह अंधेरी रात में मुसाफ़िर दीपक की रोशनी से रास्ता पाता है, उसी तरह जहालत और गुमराही के अंधेरों में आपकी सुन्नत और आपका पैग़ाम ही वह रोशनी है जो इंसान को सीधे रास्ते पर लाती है।

यह आपकी दावत सिर्फ़ ज़बानी नहीं, बल्कि आपका पूरा वजूद एक ज़िंदा नमूना है। आपकी ज़िंदगी, आपके फ़ैसले, आपकी मुहब्बत, आपका अख़लाक़—सब कुछ उस दीन की तर्जुमानी करता है जिसकी तरफ़ आप बुलाते हैं। इसलिए आपकी दावत में दिलों को मोह लेने वाली तासीर है, क्योंकि आप सिर्फ़ बताते नहीं, बल्कि ख़ुद उस पर अमल करके दिखाते भी हैं।

यही वजह है कि आपकी पैरवी करने वाला कभी अंधेरे में नहीं रहता। जो आपको पकड़ लेता है, वह कभी भटकता नहीं। आपकी मुहब्बत, आपकी सुन्नत, आपके तरीक़े पर चलना—यही वह रोशनी है जो दुनिया और आख़िरत दोनों में इंसान को कामयाबी की मंज़िल तक पहुँचाती है।

और याद रखिए—यह दावत और यह रोशनी सिर्फ़ आपके ज़माने के लिए नहीं, बल्कि क़यामत तक के लिए है। आज भी जो कोई इस दीपक से रोशनी हासिल करना चाहे, वह कर सकता है। क़ुरआन और सुन्नत वही सिराजुन मुनीर हैं जो हर दौर में इंसान को ज़ुल्मत से निकालकर नूर की तरफ़ लाते हैं।



📜 आयत 44-48 — सूरा अल-अहज़ाब

44تَحِيَّتُهُمْ يَوْمَ يَلْقَوْنَهُ سَلَامٌ ۚ وَأَعَدَّ لَهُمْ أَجْرًا كَرِيمًا
जिस दिन उसकी बारगाह में हाज़िर होंगे (उस दिन) उनकी मुरादात (उसकी तरफ से हर क़िस्म की) सलामती होगी और खुदा ने तो उनके वास्ते बहुत अच्छा बदला (बेहश्त) तैयार रखा है
45يَا أَيُّهَا النَّبِيُّ إِنَّا أَرْسَلْنَاكَ شَاهِدًا وَمُبَشِّرًا وَنَذِيرًا
ऐ नबी हमने तुमको (लोगों का) गवाह और (नेकों को बेहश्त की) खुशख़बरी देने वाला और बदों को अज़ाब से डराने वाला
46وَدَاعِيًا إِلَى اللَّهِ بِإِذْنِهِ وَسِرَاجًا مُّنِيرًا
और खुदा की तरफ उसी के हुक्म से बुलाने वाला और (ईमान व हिदायत का) रौशन चिराग़ बनाकर भेजा
47وَبَشِّرِ الْمُؤْمِنِينَ بِأَنَّ لَهُم مِّنَ اللَّهِ فَضْلًا كَبِيرًا
और तुम मोमिनीन को खुशख़बरी दे दो कि उनके लिए खुदा की तरफ से बहुत बड़ी (मेहरबानी और) बख्शिश है
48وَلَا تُطِعِ الْكَافِرِينَ وَالْمُنَافِقِينَ وَدَعْ أَذَاهُمْ وَتَوَكَّلْ عَلَى اللَّهِ ۚ وَكَفَىٰ بِاللَّهِ وَكِيلًا
और (ऐ रसूल) तुम (कहीं) काफिरों और मुनाफिक़ों की इताअत न करना और उनकी ईज़ारसानी का ख्याल छोड़ दो और खुदा पर भरोसा रखो और कारसाज़ी में खुदा काफ़ी है
अल-अहज़ाबकुरान सूची
73आयत
मदनीअवतरण स्थान
46आयत

अनुवाद — अल-अहज़ाब 46

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Wednesday, September 30, 2026

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