सबा · 11/54
अनुवाद उच्चारण — सबा
أَنِ اعْمَلْ سَابِغَاتٍ وَقَدِّرْ فِي السَّرْدِ ۖ وَاعْمَلُوا صَالِحًا ۖ إِنِّي بِمَا تَعْمَلُونَ بَصِيرٌ ۝١١
Ani`mal saabighaatinw wa qaddir fis sardi wa`maloo saalihan innee bimaa ta`maloona Baseer
📖 हिंदी अर्थ
कि फँराख़ व कुशादा जिरह बनाओ और (कड़ियों के) जोड़ने में अन्दाज़े का ख्याल रखो और तुम सब के सब अच्छे (अच्छे) काम करो वो कुछ तुम लोग करते हो मैं यक़ीनन देख रहा हूँ
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • سَابِغَاتٍ (साबिग़ात): पूर्ण और चौड़े कवच (ज़िरह), जो शरीर को अच्छी तरह ढकें।
  • السَّرْدِ (सर्द): कवच की कड़ियों को जोड़ना या बुनना।
  • قَدِّرْ (क़द्दिर): अंदाज़े से बनाना, यानी हर चीज़ को सही माप और अनुपात में रखना।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने हज़रत दाऊद (अलैहिस्सलाम) को एक अद्भुत नेमत और ख़ास फ़न (हुनर) अता किया था—लोहे को नरम करके उससे कवच बनाने का काम। इस आयत में अल्लाह उन्हें हिदायत देता है कि ऐ दाऊद! तुम पूरे और चौड़े कवच बनाओ जो शरीर को अच्छी तरह ढक सकें, और कड़ियों में काम आने वाली कीलों (मेखों) को सही अंदाज़े से बनाओ—ना इतनी बारीक कि कड़ियों में टिक न सकें और कवच कमज़ोर हो जाए, और न इतनी मोटी कि कड़ियों में न समा सकें और बोझ बढ़ जाए। बल्कि हर चीज़ को नाप और तराज़ू से बनाओ ताकि कवच मज़बूत भी हो और पहनने में आरामदेह भी।

इसके बाद अल्लाह तआला फ़रमाता है: "और तुम (ऐ दाऊद!) और तुम्हारा ख़ानदान नेक अमल करो।" यानी सिर्फ़ दुनियावी हुनर और कारीगरी ही काफ़ी नहीं, बल्कि साथ में अच्छे कर्म भी ज़रूरी हैं। अल्लाह ने यहाँ दो चीज़ों को जोड़ा—दुनियावी काम (कवच बनाना) और आख़िरत का काम (नेक अमल)—ताकि यह सिखाया जाए कि एक मोमिन की ज़िंदगी में दोनों का तवाज़ुन (संतुलन) होना चाहिए।

आख़िर में अल्लाह फ़रमाता है: "बेशक मैं तुम्हारे सब अमलों को देखने वाला हूँ।" यह एक बहुत बड़ी तसल्ली और चेतावनी दोनों है—तसल्ली इसलिए कि अल्लाह हर नेक काम को देखता है और उसका अज्र (इनाम) ज़रूर देगा, और चेतावनी इसलिए कि कोई भी बुरा काम उससे छिपा नहीं है।


दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):

यह आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम सिर्फ़ इबादत का नाम नहीं, बल्कि हर हलाल काम—चाहे वह हुनर हो, कारोबार हो या कोई पेशा—अगर नीयत सही हो और अल्लाह की रज़ा के लिए किया जाए, तो वह इबादत बन जाता है। हज़रत दाऊद (अलैहिस्सलाम) एक नबी थे, फिर भी वह अपने हाथों से काम करते थे और अपनी रोज़ी कमाते थे। यह हमारे लिए एक ज़बरदस्त सबक़ है कि हम अपने काम को अल्लाह की याद से जोड़ें, उसमें ईमानदारी और एहतिमाम (परिश्रम) से काम करें, और साथ में नेक अमल को न भूलें।

और सबसे खूबसूरत बात यह है कि अल्लाह हमारे हर अमल को देख रहा है—ना सिर्फ़ हमारी नमाज़ और रोज़ा, बल्कि हमारी कारीगरी, हमारी मेहनत और हमारी नीयत भी। जब यह यक़ीन हो जाए कि अल्लाह सब कुछ देख रहा है, तो इंसान कभी बुराई की तरफ नहीं जाएगा, और नेकी में उसे पूरा इत्मिनान होगा कि उसका अज्र उसके रब के पास महफ़ूज़ है।

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📜 आयत 9-13 — सबा

9أَفَلَمْ يَرَوْا إِلَىٰ مَا بَيْنَ أَيْدِيهِمْ وَمَا خَلْفَهُم مِّنَ السَّمَاءِ وَالْأَرْضِ ۚ إِن نَّشَأْ نَخْسِفْ بِهِمُ الْأَرْضَ أَوْ نُسْقِطْ عَلَيْهِمْ كِسَفًا مِّنَ السَّمَاءِ ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً لِّكُلِّ عَبْدٍ مُّنِيبٍ
तो क्या उन लोगों ने आसमान और ज़मीन की तरफ भी जो उनके आगे और उनके पीछे (सब तरफ से घेरे) हैं ग़ौर नहीं किया कि अगर हम चाहे तो उन लोगों को ज़मीन में धँसा दें या उन पर आसमान का कोई टुकड़ा ही गिरा दें इसमें शक नहीं कि इसमें हर रूजू करने वाले बन्दे के लिए यक़ीनी बड़ी इबरत है
10۞ وَلَقَدْ آتَيْنَا دَاوُودَ مِنَّا فَضْلًا ۖ يَا جِبَالُ أَوِّبِي مَعَهُ وَالطَّيْرَ ۖ وَأَلَنَّا لَهُ الْحَدِيدَ
और हमने यक़ीनन दाऊद को अपनी बारगाह से बुर्जुग़ी इनायत की थी (और पहाड़ों को हुक्म दिया) कि ऐ पहाड़ों तसबीह करने में उनका साथ दो और परिन्द को (ताबेए कर दिया) और उनके वास्ते लोहे को (मोम की तरह) नरम कर दिया था
11أَنِ اعْمَلْ سَابِغَاتٍ وَقَدِّرْ فِي السَّرْدِ ۖ وَاعْمَلُوا صَالِحًا ۖ إِنِّي بِمَا تَعْمَلُونَ بَصِيرٌ
कि फँराख़ व कुशादा जिरह बनाओ और (कड़ियों के) जोड़ने में अन्दाज़े का ख्याल रखो और तुम सब के सब अच्छे (अच्छे) काम करो वो कुछ तुम लोग करते हो मैं यक़ीनन देख रहा हूँ
12وَلِسُلَيْمَانَ الرِّيحَ غُدُوُّهَا شَهْرٌ وَرَوَاحُهَا شَهْرٌ ۖ وَأَسَلْنَا لَهُ عَيْنَ الْقِطْرِ ۖ وَمِنَ الْجِنِّ مَن يَعْمَلُ بَيْنَ يَدَيْهِ بِإِذْنِ رَبِّهِ ۖ وَمَن يَزِغْ مِنْهُمْ عَنْ أَمْرِنَا نُذِقْهُ مِنْ عَذَابِ السَّعِيرِ
और हवा को सुलेमान का (ताबेइदार बना दिया था) कि उसकी सुबह की रफ्तार एक महीने (मुसाफ़त) की थी और इसी तरह उसकी शाम की रफ्तार एक महीने (के मुसाफत) की थी और हमने उनके लिए तांबे (को पिघलाकर) उसका चश्मा जारी कर दिया था और जिन्नात (को उनका ताबेदार कर दिया था कि उन) में कुछ लोग उनके परवरदिगार के हुक्म से उनके सामने काम काज करते थे और उनमें से जिसने हमारे हुक्म से इनहराफ़ किया है उसे हम (क़यामत में) जहन्नुम के अज़ाब का मज़ा चख़ाँएगे
13يَعْمَلُونَ لَهُ مَا يَشَاءُ مِن مَّحَارِيبَ وَتَمَاثِيلَ وَجِفَانٍ كَالْجَوَابِ وَقُدُورٍ رَّاسِيَاتٍ ۚ اعْمَلُوا آلَ دَاوُودَ شُكْرًا ۚ وَقَلِيلٌ مِّنْ عِبَادِيَ الشَّكُورُ
ग़रज़ सुलेमान को जो बनवाना मंज़ूर होता ये जिन्नात उनके लिए बनाते थे (जैसे) मस्जिदें, महल, क़िले और (फरिश्ते अम्बिया की) तस्वीरें और हौज़ों के बराबर प्याले और (एक जगह) गड़ी हुई (बड़ी बड़ी) देग़ें (कि एक हज़ार आदमी का खाना पक सके) ऐ दाऊद की औलाद शुक्र करते रहो और मेरे बन्दों में से शुक्र करने वाले (बन्दे) थोड़े से हैं
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अनुवाद — सबा 11

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Tuesday, August 18, 2026

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