अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- سَابِغَاتٍ (साबिग़ात): पूर्ण और चौड़े कवच (ज़िरह), जो शरीर को अच्छी तरह ढकें।
- السَّرْدِ (सर्द): कवच की कड़ियों को जोड़ना या बुनना।
- قَدِّرْ (क़द्दिर): अंदाज़े से बनाना, यानी हर चीज़ को सही माप और अनुपात में रखना।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने हज़रत दाऊद (अलैहिस्सलाम) को एक अद्भुत नेमत और ख़ास फ़न (हुनर) अता किया था—लोहे को नरम करके उससे कवच बनाने का काम। इस आयत में अल्लाह उन्हें हिदायत देता है कि ऐ दाऊद! तुम पूरे और चौड़े कवच बनाओ जो शरीर को अच्छी तरह ढक सकें, और कड़ियों में काम आने वाली कीलों (मेखों) को सही अंदाज़े से बनाओ—ना इतनी बारीक कि कड़ियों में टिक न सकें और कवच कमज़ोर हो जाए, और न इतनी मोटी कि कड़ियों में न समा सकें और बोझ बढ़ जाए। बल्कि हर चीज़ को नाप और तराज़ू से बनाओ ताकि कवच मज़बूत भी हो और पहनने में आरामदेह भी।
इसके बाद अल्लाह तआला फ़रमाता है: "और तुम (ऐ दाऊद!) और तुम्हारा ख़ानदान नेक अमल करो।" यानी सिर्फ़ दुनियावी हुनर और कारीगरी ही काफ़ी नहीं, बल्कि साथ में अच्छे कर्म भी ज़रूरी हैं। अल्लाह ने यहाँ दो चीज़ों को जोड़ा—दुनियावी काम (कवच बनाना) और आख़िरत का काम (नेक अमल)—ताकि यह सिखाया जाए कि एक मोमिन की ज़िंदगी में दोनों का तवाज़ुन (संतुलन) होना चाहिए।
आख़िर में अल्लाह फ़रमाता है: "बेशक मैं तुम्हारे सब अमलों को देखने वाला हूँ।" यह एक बहुत बड़ी तसल्ली और चेतावनी दोनों है—तसल्ली इसलिए कि अल्लाह हर नेक काम को देखता है और उसका अज्र (इनाम) ज़रूर देगा, और चेतावनी इसलिए कि कोई भी बुरा काम उससे छिपा नहीं है।
दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):
यह आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम सिर्फ़ इबादत का नाम नहीं, बल्कि हर हलाल काम—चाहे वह हुनर हो, कारोबार हो या कोई पेशा—अगर नीयत सही हो और अल्लाह की रज़ा के लिए किया जाए, तो वह इबादत बन जाता है। हज़रत दाऊद (अलैहिस्सलाम) एक नबी थे, फिर भी वह अपने हाथों से काम करते थे और अपनी रोज़ी कमाते थे। यह हमारे लिए एक ज़बरदस्त सबक़ है कि हम अपने काम को अल्लाह की याद से जोड़ें, उसमें ईमानदारी और एहतिमाम (परिश्रम) से काम करें, और साथ में नेक अमल को न भूलें।
और सबसे खूबसूरत बात यह है कि अल्लाह हमारे हर अमल को देख रहा है—ना सिर्फ़ हमारी नमाज़ और रोज़ा, बल्कि हमारी कारीगरी, हमारी मेहनत और हमारी नीयत भी। जब यह यक़ीन हो जाए कि अल्लाह सब कुछ देख रहा है, तो इंसान कभी बुराई की तरफ नहीं जाएगा, और नेकी में उसे पूरा इत्मिनान होगा कि उसका अज्र उसके रब के पास महफ़ूज़ है।
📜 आयत 9-13 — सबा
अनुवाद — सबा 11
सूरा सबा आयत 11 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : कि फँराख़ व कुशादा जिरह बनाओ और (कड़ियों के) जोड़ने…सूरा आयत 11/54 — सबा سبأ (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सबा सुनें, सबा अनुवाद, सबा mp3, सबा pdf. आयत 9–13. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








