सबा · 10/54
अनुवाद उच्चारण — सबा
۞ وَلَقَدْ آتَيْنَا دَاوُودَ مِنَّا فَضْلًا ۖ يَا جِبَالُ أَوِّبِي مَعَهُ وَالطَّيْرَ ۖ وَأَلَنَّا لَهُ الْحَدِيدَ ۝١٠
Wa laqad aatainaa Daawooda minnaa fadlany yaa jibaalu awwibee ma`ahoo wattaira wa alannaa lahul hadeed
📖 हिंदी अर्थ
और हमने यक़ीनन दाऊद को अपनी बारगाह से बुर्जुग़ी इनायत की थी (और पहाड़ों को हुक्म दिया) कि ऐ पहाड़ों तसबीह करने में उनका साथ दो और परिन्द को (ताबेए कर दिया) और उनके वास्ते लोहे को (मोम की तरह) नरम कर दिया था

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَضْلًا: विशेष अनुग्रह, नबुव्वत (पैग़म्बरी) और राज्य।
  • أَوِّبِي: (ऐ पहाड़ों!) दाऊद के साथ तस्बीह (प्रशंसा) दोहराओ।
  • أَلَنَّا: हमने नरम कर दिया।
  • الْحَدِيدَ: लोहा।

तफ़सीर (व्याख्या):

निश्चय ही अल्लाह तआला ने अपने नबी हज़रत दाऊद (अलैहिस्सलाम) को अपनी ओर से बड़ा विशेष अनुग्रह प्रदान किया था। यह अनुग्रह नबुव्वत, किताब (ज़बूर), ज्ञान और राज्य का सम्मिलित रूप था। अल्लाह ने उन्हें ऐसा उच्च स्थान दिया कि पहाड़ों को आदेश दिया गया कि वे दाऊद (अलैहिस्सलाम) के साथ तस्बीह करें — यानी जब वे अल्लाह की प्रशंसा और तस्बीह करते, तो पहाड़ भी उनकी आवाज़ के साथ तस्बीह की आवाज़ दोहराते थे, जो उनकी नबुव्वत का एक महान चमत्कार था। इसी प्रकार पक्षियों को भी उनके साथ तस्बीह करने के लिए वश में कर दिया गया — पक्षी उनके साथ अल्लाह की तस्बीह करते थे।

इसके अलावा, अल्लाह ने दाऊद (अलैहिस्सलाम) के लिए लोहे को नरम कर दिया। लोहा उनके हाथों में मोम की तरह नरम हो जाता था, जिससे वे बिना आग और बिना हथौड़े के अपनी इच्छा से उसे आकार दे सकते थे। वे इससे कवच और युद्ध के अन्य सामान बनाते थे। यह भी अल्लाह की ओर से एक चमत्कारिक शक्ति थी।

दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह तआला अपने नेक बंदों को जब चाहता है, विशेष अनुग्रह और शक्तियाँ प्रदान करता है। दाऊद (अलैहिस्सलाम) की महानता यह थी कि उन्होंने अल्लाह की दी हुई इन नेमतों का उपयोग अल्लाह की इबादत और लोगों की भलाई के लिए किया। वे तस्बीह करते थे, अल्लाह की प्रशंसा करते थे, और अपनी कला से लोगों के लिए उपयोगी चीज़ें बनाते थे।

हमें भी चाहिए कि अल्लाह की दी हुई नेमतों का सही उपयोग करें — अपने ज्ञान, कौशल और संसाधनों को अल्लाह की राह में और लोगों की सेवा में लगाएँ। जब हम अल्लाह के करीब होते हैं, तो अल्लाह हमारे लिए कठिन से कठिन कामों को भी आसान कर देता है, जैसे उसने दाऊद (अलैहिस्सलाम) के लिए लोहे को नरम कर दिया। यह हमारे लिए एक प्रेरणा है कि अल्लाह पर भरोसा रखें, उसकी इबादत में लगे रहें, और उसकी राह में अपनी क्षमताओं को समर्पित करें। अल्लाह अपने बंदों को कभी निराश नहीं करता।



📜 आयत 8-12 — सबा

8أَفْتَرَىٰ عَلَى اللَّهِ كَذِبًا أَم بِهِ جِنَّةٌ ۗ بَلِ الَّذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِالْآخِرَةِ فِي الْعَذَابِ وَالضَّلَالِ الْبَعِيدِ
क्या उस शख्स (मोहम्मद) ने खुदा पर झूठ तूफान बाँधा है या उसे जुनून (हो गया) है (न मोहम्मद झूठा है न उसे जुनून है) बल्कि खुद वह लोग जो आख़ेरत पर ईमान नहीं रखते अज़ाब और पहले दरजे की गुमराही में पड़े हुए हैं
9أَفَلَمْ يَرَوْا إِلَىٰ مَا بَيْنَ أَيْدِيهِمْ وَمَا خَلْفَهُم مِّنَ السَّمَاءِ وَالْأَرْضِ ۚ إِن نَّشَأْ نَخْسِفْ بِهِمُ الْأَرْضَ أَوْ نُسْقِطْ عَلَيْهِمْ كِسَفًا مِّنَ السَّمَاءِ ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً لِّكُلِّ عَبْدٍ مُّنِيبٍ
तो क्या उन लोगों ने आसमान और ज़मीन की तरफ भी जो उनके आगे और उनके पीछे (सब तरफ से घेरे) हैं ग़ौर नहीं किया कि अगर हम चाहे तो उन लोगों को ज़मीन में धँसा दें या उन पर आसमान का कोई टुकड़ा ही गिरा दें इसमें शक नहीं कि इसमें हर रूजू करने वाले बन्दे के लिए यक़ीनी बड़ी इबरत है
10۞ وَلَقَدْ آتَيْنَا دَاوُودَ مِنَّا فَضْلًا ۖ يَا جِبَالُ أَوِّبِي مَعَهُ وَالطَّيْرَ ۖ وَأَلَنَّا لَهُ الْحَدِيدَ
और हमने यक़ीनन दाऊद को अपनी बारगाह से बुर्जुग़ी इनायत की थी (और पहाड़ों को हुक्म दिया) कि ऐ पहाड़ों तसबीह करने में उनका साथ दो और परिन्द को (ताबेए कर दिया) और उनके वास्ते लोहे को (मोम की तरह) नरम कर दिया था
11أَنِ اعْمَلْ سَابِغَاتٍ وَقَدِّرْ فِي السَّرْدِ ۖ وَاعْمَلُوا صَالِحًا ۖ إِنِّي بِمَا تَعْمَلُونَ بَصِيرٌ
कि फँराख़ व कुशादा जिरह बनाओ और (कड़ियों के) जोड़ने में अन्दाज़े का ख्याल रखो और तुम सब के सब अच्छे (अच्छे) काम करो वो कुछ तुम लोग करते हो मैं यक़ीनन देख रहा हूँ
12وَلِسُلَيْمَانَ الرِّيحَ غُدُوُّهَا شَهْرٌ وَرَوَاحُهَا شَهْرٌ ۖ وَأَسَلْنَا لَهُ عَيْنَ الْقِطْرِ ۖ وَمِنَ الْجِنِّ مَن يَعْمَلُ بَيْنَ يَدَيْهِ بِإِذْنِ رَبِّهِ ۖ وَمَن يَزِغْ مِنْهُمْ عَنْ أَمْرِنَا نُذِقْهُ مِنْ عَذَابِ السَّعِيرِ
और हवा को सुलेमान का (ताबेइदार बना दिया था) कि उसकी सुबह की रफ्तार एक महीने (मुसाफ़त) की थी और इसी तरह उसकी शाम की रफ्तार एक महीने (के मुसाफत) की थी और हमने उनके लिए तांबे (को पिघलाकर) उसका चश्मा जारी कर दिया था और जिन्नात (को उनका ताबेदार कर दिया था कि उन) में कुछ लोग उनके परवरदिगार के हुक्म से उनके सामने काम काज करते थे और उनमें से जिसने हमारे हुक्म से इनहराफ़ किया है उसे हम (क़यामत में) जहन्नुम के अज़ाब का मज़ा चख़ाँएगे
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अनुवाद — सबा 10

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Tuesday, August 18, 2026

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