सबा · 29/54
अनुवाद उच्चारण — सबा
وَيَقُولُونَ مَتَىٰ هَٰذَا الْوَعْدُ إِن كُنتُمْ صَادِقِينَ ۝٢٩
Wa yaqooloona mataa haazal wa`du in kuntum saadiqeen
📖 हिंदी अर्थ
और (उलटे) कहते हैं कि अगर तुम (अपने दावे में) सच्चे हो तो (आख़िर) ये क़यामत का वायदा कब पूरा होगा
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مَتَىٰ: कब? (समय पूछने के लिए)
  • هَذَا الْوَعْدُ: यह वादा (जिसका तुम वादा करते हो)
  • صَادِقِينَ: सच्चे (सत्यवान)

तफ़सीर (व्याख्या):

ये मुशरिकीन (बहुदेववादी) मज़ाक़ और उपहास के अंदाज़ में कहते हैं कि "वह वादा कब पूरा होगा जिसकी तुम हमें धमकी देते हो? अगर तुम सच्चे हो तो बताओ कि वह समय कब आएगा?" वे अल्लाह के अज़ाब और क़ियामत के दिन को दूर की बात समझते थे और इसलिए मज़ाक़ उड़ाते थे। उनका यह सवाल वास्तव में सच्चाई को मानने से इनकार और रसूलुल्लाह ﷺ तथा मोमिनीन को नीचा दिखाने की कोशिश थी।

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह का वादा सत्य है और उसका पूरा होना निश्चित है। जो लोग मज़ाक़ उड़ाते हैं, वे केवल अपने आप को नुक़सान पहुँचाते हैं। अल्लाह की ओर से आने वाला अज़ाब और क़ियामत का दिन अवश्य आएगा, चाहे वे मानें या न मानें। हमें चाहिए कि हम अल्लाह के वादों पर पूरा यक़ीन रखें और उसकी आज्ञाओं का पालन करें। याद रखें, अल्लाह का हर वादा सच्चा है और वह अपने वादे को पूरा करके रहेगा। यही ईमान की निशानी है कि इंसान अल्लाह के वादों पर दिल से भरोसा करे और उन्हें मज़ाक़ न समझे।

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📜 आयत 27-31 — सबा

27قُلْ أَرُونِيَ الَّذِينَ أَلْحَقْتُم بِهِ شُرَكَاءَ ۖ كَلَّا ۚ بَلْ هُوَ اللَّهُ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ
(ऐ रसूल तुम कह दो कि जिनको तुम ने खुदा का शरीक बनाकर) खुदा के साथ मिलाया है ज़रा उन्हें मुझे भी तो दिखा दो हरगिज़ (कोई शरीक नहीं) बल्कि खुदा ग़ालिब हिकमत वाला है
28وَمَا أَرْسَلْنَاكَ إِلَّا كَافَّةً لِّلنَّاسِ بَشِيرًا وَنَذِيرًا وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَ النَّاسِ لَا يَعْلَمُونَ
(ऐ रसूल) हमने तुमको तमाम (दुनिया के) लोगों के लिए (नेकों को बेहश्त की) खुशखबरी देने वाला और (बन्दों को अज़ाब से) डराने वाला (पैग़म्बर) बनाकर भेजा मगर बहुतेरे लोग (इतना भी) नहीं जानते
29وَيَقُولُونَ مَتَىٰ هَٰذَا الْوَعْدُ إِن كُنتُمْ صَادِقِينَ
और (उलटे) कहते हैं कि अगर तुम (अपने दावे में) सच्चे हो तो (आख़िर) ये क़यामत का वायदा कब पूरा होगा
30قُل لَّكُم مِّيعَادُ يَوْمٍ لَّا تَسْتَأْخِرُونَ عَنْهُ سَاعَةً وَلَا تَسْتَقْدِمُونَ
(ऐ रसूल) तुम उनसे कह दो कि तुम लोगों के वास्ते एक ख़ास दिन की मीयाद मुक़र्रर है कि न तुम उससे एक घड़ी पीछे रह सकते हो और न आगे ही बड़ सकते हो
31وَقَالَ الَّذِينَ كَفَرُوا لَن نُّؤْمِنَ بِهَٰذَا الْقُرْآنِ وَلَا بِالَّذِي بَيْنَ يَدَيْهِ ۗ وَلَوْ تَرَىٰ إِذِ الظَّالِمُونَ مَوْقُوفُونَ عِندَ رَبِّهِمْ يَرْجِعُ بَعْضُهُمْ إِلَىٰ بَعْضٍ الْقَوْلَ يَقُولُ الَّذِينَ اسْتُضْعِفُوا لِلَّذِينَ اسْتَكْبَرُوا لَوْلَا أَنتُمْ لَكُنَّا مُؤْمِنِينَ
और जो लोग काफिर हों बैठे कहते हैं कि हम तो न इस क़ुरान पर हरगिज़ ईमान लाएँगे और न उस (किताब) पर जो इससे पहले नाज़िल हो चुकी और (ऐ रसूल तुमको बहुत ताज्जुब हो) अगर तुम देखो कि जब ये ज़ालिम क़यामत के दिन अपने परवरदिगार के सामने खड़े किए जायेंगे (और) उनमें का एक दूसरे की तरफ (अपनी) बात को फेरता होगा कि कमज़ोर अदना (दरजे के) लोग बड़े (सरकश) लोगों से कहते होगें कि अगर तुम (हमें) न (बहकाए) होते तो हम ज़रूर ईमानवाले होते (इस मुसीबत में न पड़ते)
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अनुवाद — सबा 29

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सूरा आयत 29/54 — सबा سبأ (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सबा सुनें, सबा अनुवाद, सबा mp3, सबा pdf. आयत 27–31. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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