अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- अवलम यसीरू – क्या वे चले नहीं?
- अक़िबत – अंजाम, परिणाम
- अशद्द मिन्हुम क़ुव्वतन – उनसे अधिक शक्तिशाली
- यु'जिज़हु – उसे विवश कर देना, उससे बच निकलना
- अलीमन – सब कुछ जानने वाला
- क़दीरन – हर चीज़ पर पूर्ण सामर्थ्य रखने वाला
तफ़सीर (व्याख्या):
क्या ये मक्का के काफ़िर लोग धरती पर चलते-फिरते नहीं हैं? क्या वे उन बस्तियों और खंडहरों को नहीं देखते जो उनसे पहले गुज़री हुई क़ौमों के हैं? आद, समूद और उनके जैसे अन्य लोग, जिन्होंने अपने नबियों को झुठलाया और जिनका अंजाम विनाश और तबाही के सिवा कुछ नहीं था। वे क़ौमें इन मक्का वालों से कहीं अधिक ताक़तवर थीं, उनकी इमारतें ऊँची थीं, उनके जिस्म मज़बूत थे, उनके साधन और हथियार बेहतर थे, लेकिन जब उन्होंने अल्लाह के रसूलों को झुठलाया और हक़ को ठुकराया, तो अल्लाह ने उन्हें ऐसे पकड़ा कि कोई उन्हें बचा न सका।
यह एक बड़ी सीख है – ताक़त और सामर्थ्य का घमंड किसी को अल्लाह की पकड़ से नहीं बचा सकता। अल्लाह आसमानों और ज़मीन में किसी भी चीज़ से विवश नहीं होता, न कोई चीज़ उससे बच सकती है, न छिप सकती है। वह हर चीज़ पर पूरी तरह क़ाबू रखता है। वह अपने बंदों के सारे कामों को जानता है – चाहे वे छोटे हों या बड़े, चाहे वे दिल में हों या ज़ुबान पर। उसके ज्ञान से कोई चीज़ बाहर नहीं है, और उसकी क़ुदरत से कोई चीज़ निकल नहीं सकती।
यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि जब हम इतिहास की ओर देखते हैं, तो हमें अपने अंजाम के बारे में सोचना चाहिए। अल्लाह ने पहले की क़ौमों के साथ जो किया, वह इसलिए किया क्योंकि उन्होंने हक़ को झुठलाया और ज़ुल्म पर अड़े रहे। आज भी वही क़ानून है – जो हक़ को झुठलाएगा और अल्लाह के हुक्म से सरकशी करेगा, उसका अंजाम बुरा होगा। लेकिन जो अल्लाह की ओर रुजू करे, तौबा करे और नेक काम करे, उसके लिए अल्लाह की रहमत और मग़फ़िरत है।
यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि अल्लाह की क़ुदरत से घबराना नहीं चाहिए, बल्कि उस पर भरोसा करना चाहिए। वही सब कुछ कर सकता है, वही सब कुछ जानता है। जब हम यह समझ लें कि अल्लाह हर चीज़ पर क़ादिर है और हर चीज़ का इल्म रखता है, तो हमारा दिल उसकी इबादत में लग जाता है और हम उसके सिवा किसी से नहीं डरते। यही सच्ची मुसलमानी है – अल्लाह पर पूरा भरोसा, उसके हुक्म के आगे सर झुकाना, और उसकी रहमत की उम्मीद रखना।
📜 आयत 42-45 — फातिर
अनुवाद — फातिर 44
सूरा फातिर आयत 44 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो क्या उन लोगों ने रूए ज़मीन पर चल फिर…सूरा आयत 44/45 — फातिर فاطر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: फातिर सुनें, फातिर अनुवाद, फातिर mp3, फातिर pdf. आयत 42–45. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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