अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- يُؤَاخِذُ – पकड़ना, दंड देना
- بِمَا كَسَبُوا – उनके किए हुए कर्मों के कारण
- دَابَّةٍ – चलने-फिरने वाला जीव (जानवर)
- يُؤَخِّرُهُمْ – उन्हें टालता है, मोहलत देता है
- أَجَلٍ مُسَمًّى – एक निश्चित समय, नियत अवधि
तफ़सीर (व्याख्या):
यदि अल्लाह तआला लोगों को उनके किए हुए गुनाहों और नाफ़रमानियों की सज़ा तुरंत देने लगे, तो धरती की पीठ पर कोई भी चलने-फिरने वाला जीव-जंतु न बचे — इंसान भी नहीं और जानवर भी नहीं। क्योंकि इंसानों के गुनाहों की वजह से सारी दुनिया तबाह हो जाती। लेकिन अल्लाह रहीम और करीम है, वह अपने बंदों पर रहम करता है और उन्हें मोहलत देता है। वह उन्हें उनके नियत समय तक टालता रहता है, जो उसके इल्म में मुक़र्रर है — और वह समय क़यामत का दिन है।
जब वह निश्चित समय आ जाएगा, तो अल्लाह अपने बंदों के साथ पूरी बसीरत (देख-भाल) वाला होगा। उससे कोई चीज़ छिपी नहीं है — न छोटा, न बड़ा, न अच्छा, न बुरा। वह हर एक को उसके कर्मों का पूरा-पूरा बदला देगा: जिसने नेकी की होगी उसे नेकी का बदला, और जिसने बुराई की होगी उसे बुराई की सज़ा।
दावत और नसीहत:
यह आयत हमें अल्लाह की रहमत और अदल (न्याय) दोनों की याद दिलाती है। अल्लाह जल्दी सज़ा नहीं देता — वह तौबा का दरवाज़ा खुला रखता है, ताकि लोग पलट आएँ। यह उसकी महान दया है कि हम गुनाह करते रहते हैं और वह हमें मोहलत देता है, हमारी रोज़ी देता है, हम पर रहम करता है। लेकिन यह मोहलत हमेशा के लिए नहीं है — एक दिन वह समय आएगा जब हर आत्मा को उसके कर्मों का हिसाब दिया जाएगा।
इसलिए ऐ बंदे! अल्लाह की रहमत से निराश न हो, लेकिन उसकी पकड़ से भी बेख़ौफ़ न हो। जब तक ज़िंदगी है, तौबा का दरवाज़ा खुला है। अपने गुनाहों से तौबा करो, अल्लाह की ओर लौटो, और उस दिन की तैयारी करो जब कोई किसी के काम न आएगा। याद रखो — अल्लाह सब कुछ देख रहा है, और उसका वादा सच्चा है।
📜 आयत 43-45 — फातिर
अनुवाद — फातिर 45
सूरा फातिर आयत 45 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और अगर (कहीं) खुदा लोगों की करतूतों की गिरफ्त करता…सूरा आयत 45/45 — फातिर فاطر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: फातिर सुनें, फातिर अनुवाद, फातिर mp3, फातिर pdf. आयत 43–45. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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