अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- اسْتِكْبَارًا: अहंकार, घमंड, बड़प्पन का दिखावा।
- مَكْرَ السَّيِّئِ: बुरी चाल, धोखा, छल-कपट।
- يَحِيقُ: घेर लेना, अपने शिकंजे में ले लेना, वापस लौट आना।
- سُنَّتَ الْأَوَّلِينَ: पिछले लोगों के साथ अल्लाह का वह नियम (कानून) जिसके अनुसार उन्होंने नुबुव्वत को झुठलाने वालों को पकड़ा।
- تَبْدِيلًا: बदल देना, किसी और चीज़ से बदल देना।
- تَحْوِيلًا: एक जगह से दूसरी जगह हटा देना, किसी और पर डाल देना।
तफ़सीर (व्याख्या):
ये लोग जब क़समें खाते थे, तो उनका मक़सद हक़ की तलाश या नेक नीयत नहीं होती थी, बल्कि उनका असली मक़सद ज़मीन में अहंकार करना और लोगों को धोखा देने के लिए बुरी चालें चलना होता था। वे अपनी इन चालों से सोचते थे कि वे सच्चाई को छिपा लेंगे और लोगों को रास्ते से भटका देंगे, लेकिन अल्लाह तआला फ़रमाता है कि ये बुरी चालें और धोखे अपने चलने वालों को ही घेर लेते हैं। यानी जो लोग दूसरों के साथ छल-कपट करते हैं, उसका नुक़सान आख़िरकार उन्हीं को उठाना पड़ता है, ठीक उसी तरह जैसे जाल बुनने वाला खुद उसी में फंस जाता है।
फिर अल्लाह तआला फ़रमाता है: क्या ये अहंकारी और मक्कार लोग उसी अंजाम का इंतज़ार नहीं कर रहे जो उनसे पहले के लोगों का हुआ? जिन्होंने अपने नबियों को झुठलाया और अल्लाह के दीन से मुँह मोड़ा, उन पर अल्लाह का अज़ाब नाज़िल हुआ और उन्होंने अपनी आँखों से वह कुछ देखा जो उनके लिए बहुत बुरा साबित हुआ। यह अल्लाह का क़ानून है जो कभी नहीं बदलता। जिस तरह पिछले ज़ालिमों को अज़ाब से नहीं बचाया गया, उसी तरह इन ज़ालिमों को भी नहीं बचाया जा सकता। अल्लाह की सुन्नत (क़ानून) में न कोई बदलाव आता है और न ही उसे किसी और की तरफ मोड़ा जा सकता है। यानी अज़ाब उसी पर आएगा जो उसका हक़दार है, किसी बेगुनाह पर नहीं डाला जा सकता।
दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):
यह आयत हमें एक बहुत बड़ी सीख देती है कि अहंकार और छल-कपट की ज़िंदगी कभी कामयाब नहीं हो सकती। इंसान चाहे कितनी भी चालाकियाँ कर ले, लेकिन अल्लाह का क़ानून उसके ऊपर हावी रहता है। जो लोग सच्चाई को दबाने की कोशिश करते हैं, वे खुद दब जाते हैं। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी में सच्चाई, नम्रता और अच्छे अख़लाक़ को अपनाएँ। अल्लाह के क़ानून पर भरोसा रखें और याद रखें कि हर बुराई का अंजाम बुरा होता है, और हर नेकी का अंजाम नेक होता है। यही अल्लाह का वादा है, और अल्लाह का वादा कभी नहीं बदलता।
📜 आयत 41-45 — फातिर
अनुवाद — फातिर 43
सूरा फातिर आयत 43 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (उसके आने से) उनकी नफरत को तरक्की ही होती गयी…सूरा आयत 43/45 — फातिर فاطر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: फातिर सुनें, फातिर अनुवाद, फातिर mp3, फातिर pdf. आयत 41–45. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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