यासीन · 70/83
अनुवाद उच्चारण — यासीन
لِّيُنذِرَ مَن كَانَ حَيًّا وَيَحِقَّ الْقَوْلُ عَلَى الْكَافِرِينَ ۝٧٠
Liyunzira man kaana haiyanw-wa yahiqqal qawlu `alal-kaafireen
📖 हिंदी अर्थ
ताकि जो ज़िन्दा (दिल आक़िल) हों उसे (अज़ाब से) डराए और काफ़िरों पर (अज़ाब का) क़ौल साबित हो जाए (और हुज्जत बाक़ी न रहे)
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لِيُنذِرَ – डराने के लिए, सचेत करने के लिए
  • مَن كَانَ حَيًّا – जो ज़िंदा दिल वाला हो (यानी समझदार और सीधे रास्ते को समझने वाला)
  • وَيَحِقَّ الْقَوْلُ – और सज़ा का फैसला सच हो जाए, यानी अज़ाब वाजिब हो जाए
  • عَلَى الْكَافِرِينَ – उन लोगों पर जो ईमान नहीं लाते और कुफ्र पर अड़े रहते हैं

तफ़सीर:

यह आयत बताती है कि यह क़ुरआन किसी शायर का कलाम नहीं, बल्कि अल्लाह की तरफ से उतारा हुआ एक ऐसा पवित्र ग्रंथ है जो हक़ और बातिल को साफ़-साफ़ अलग कर देता है। इसकी आयतें अपने अंदर हिदायत का पूरा सामान रखती हैं। अल्लाह ने यह क़ुरआन इसलिए नाज़िल किया ताकि यह उन लोगों को डराए और सचेत करे जिनके दिल ज़िंदा हैं — यानी जो अक्ल से काम लेते हैं, जिनकी आँखें सच्चाई देखने की क्षमता रखती हैं, और जो अपने दिल की आँखों से हक़ को पहचानने के लिए तैयार हैं। ऐसे लोग ही इस किताब से नसीहत हासिल करते हैं, उस पर अमल करते हैं और अपनी ज़िंदगी को रोशन कर लेते हैं।

वहीं दूसरी तरफ, जो लोग कुफ्र पर अड़े रहते हैं और हक़ को सुनने के बाद भी उसे ठुकरा देते हैं, उन पर अल्लाह का फैसला सच हो जाता है — यानी उनके लिए अज़ाब वाजिब हो जाता है। क्योंकि क़ुरआन उन तक पहुँच चुका है, उनके सामने दलीलें क़ायम हो चुकी हैं, और उनके पास कोई बहाना नहीं बचा। यह अल्लाह की रहमत भी है और उसका इंसाफ़ भी — रहमत इसलिए कि हिदायत का रास्ता साफ़ कर दिया गया, और इंसाफ़ इसलिए कि जिसने जानबूझकर हक़ को ठुकराया, उसे उसकी सज़ा मिलकर रहेगी।

प्यारे भाइयो और बहनो! यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह ने अपनी रहमत से हमारे लिए यह क़ुरआन उतारा, ताकि हमारे दिल जागें और हम सीधे रास्ते पर चलें। यह किताब हमारे लिए नूर है, शिफ़ा है और हिदायत है। जो इसे पकड़ लेगा, वह कभी गुमराह नहीं होगा। और जो इसे ठुकराएगा, वह खुद अपने ऊपर ज़ुल्म करेगा। अल्लाह हमें इस किताब को समझने, उस पर अमल करने और उसे अपनी ज़िंदगी में उतारने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 68-72 — यासीन

68وَمَن نُّعَمِّرْهُ نُنَكِّسْهُ فِي الْخَلْقِ ۖ أَفَلَا يَعْقِلُونَ
और हम जिस शख्स को (बहुत) ज्यादा उम्र देते हैं तो उसे ख़िलक़त में उलट (कर बच्चों की तरह मजबूर कर) देते हैं तो क्या वह लोग समझते नहीं
69وَمَا عَلَّمْنَاهُ الشِّعْرَ وَمَا يَنبَغِي لَهُ ۚ إِنْ هُوَ إِلَّا ذِكْرٌ وَقُرْآنٌ مُّبِينٌ
और हमने न उस (पैग़म्बर) को शेर की तालीम दी है और न शायरी उसकी शान के लायक़ है ये (किताब) तो बस (निरी) नसीहत और साफ-साफ कुरान है
70لِّيُنذِرَ مَن كَانَ حَيًّا وَيَحِقَّ الْقَوْلُ عَلَى الْكَافِرِينَ
ताकि जो ज़िन्दा (दिल आक़िल) हों उसे (अज़ाब से) डराए और काफ़िरों पर (अज़ाब का) क़ौल साबित हो जाए (और हुज्जत बाक़ी न रहे)
71أَوَلَمْ يَرَوْا أَنَّا خَلَقْنَا لَهُم مِّمَّا عَمِلَتْ أَيْدِينَا أَنْعَامًا فَهُمْ لَهَا مَالِكُونَ
क्या उन लोगों ने इस पर भी ग़ौर नहीं किया कि हमने उनके फायदे के लिए चारपाए उस चीज़ से पैदा किए जिसे हमारी ही क़ुदरत ने बनाया तो ये लोग (ख्वाहमाख्वाह) उनके मालिक बन गए
72وَذَلَّلْنَاهَا لَهُمْ فَمِنْهَا رَكُوبُهُمْ وَمِنْهَا يَأْكُلُونَ
और हम ही ने चार पायों को उनका मुतीय बना दिया तो बाज़ उनकी सवारियां हैं और बाज़ को खाते हैं
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अनुवाद — यासीन 70

सूरा यासीन आयत 70 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ताकि जो ज़िन्दा (दिल आक़िल) हों उसे (अज़ाब से) डराए…

सूरा आयत 70/83 — यासीन يس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यासीन सुनें, यासीन अनुवाद, यासीन mp3, यासीन pdf. आयत 68–72. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

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