Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لِيُنذِرَ – डराने के लिए, सचेत करने के लिए
- مَن كَانَ حَيًّا – जो ज़िंदा दिल वाला हो (यानी समझदार और सीधे रास्ते को समझने वाला)
- وَيَحِقَّ الْقَوْلُ – और सज़ा का फैसला सच हो जाए, यानी अज़ाब वाजिब हो जाए
- عَلَى الْكَافِرِينَ – उन लोगों पर जो ईमान नहीं लाते और कुफ्र पर अड़े रहते हैं
तफ़सीर:
यह आयत बताती है कि यह क़ुरआन किसी शायर का कलाम नहीं, बल्कि अल्लाह की तरफ से उतारा हुआ एक ऐसा पवित्र ग्रंथ है जो हक़ और बातिल को साफ़-साफ़ अलग कर देता है। इसकी आयतें अपने अंदर हिदायत का पूरा सामान रखती हैं। अल्लाह ने यह क़ुरआन इसलिए नाज़िल किया ताकि यह उन लोगों को डराए और सचेत करे जिनके दिल ज़िंदा हैं — यानी जो अक्ल से काम लेते हैं, जिनकी आँखें सच्चाई देखने की क्षमता रखती हैं, और जो अपने दिल की आँखों से हक़ को पहचानने के लिए तैयार हैं। ऐसे लोग ही इस किताब से नसीहत हासिल करते हैं, उस पर अमल करते हैं और अपनी ज़िंदगी को रोशन कर लेते हैं।
वहीं दूसरी तरफ, जो लोग कुफ्र पर अड़े रहते हैं और हक़ को सुनने के बाद भी उसे ठुकरा देते हैं, उन पर अल्लाह का फैसला सच हो जाता है — यानी उनके लिए अज़ाब वाजिब हो जाता है। क्योंकि क़ुरआन उन तक पहुँच चुका है, उनके सामने दलीलें क़ायम हो चुकी हैं, और उनके पास कोई बहाना नहीं बचा। यह अल्लाह की रहमत भी है और उसका इंसाफ़ भी — रहमत इसलिए कि हिदायत का रास्ता साफ़ कर दिया गया, और इंसाफ़ इसलिए कि जिसने जानबूझकर हक़ को ठुकराया, उसे उसकी सज़ा मिलकर रहेगी।
प्यारे भाइयो और बहनो! यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह ने अपनी रहमत से हमारे लिए यह क़ुरआन उतारा, ताकि हमारे दिल जागें और हम सीधे रास्ते पर चलें। यह किताब हमारे लिए नूर है, शिफ़ा है और हिदायत है। जो इसे पकड़ लेगा, वह कभी गुमराह नहीं होगा। और जो इसे ठुकराएगा, वह खुद अपने ऊपर ज़ुल्म करेगा। अल्लाह हमें इस किताब को समझने, उस पर अमल करने और उसे अपनी ज़िंदगी में उतारने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 68-72 — सूरा यासीन
अनुवाद — यासीन 70
सूरा यासीन आयत 70 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ताकि जो ज़िन्दा (दिल आक़िल) हों उसे (अज़ाब से) डराए…सूरा आयत 70/83 — सूरा यासीन يس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा यासीन सुनें, सूरा यासीन अनुवाद, सूरा यासीन mp3, सूरा यासीन pdf. आयत 68–72. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


