यासीन · 71/83
अनुवाद उच्चारण — यासीन
أَوَلَمْ يَرَوْا أَنَّا خَلَقْنَا لَهُم مِّمَّا عَمِلَتْ أَيْدِينَا أَنْعَامًا فَهُمْ لَهَا مَالِكُونَ ۝٧١
Awalam yaraw annaa khalaqnaa lahum mimmaa `amilat aideenaaa an`aaman fahum lahaa maalikoon
📖 हिंदी अर्थ
क्या उन लोगों ने इस पर भी ग़ौर नहीं किया कि हमने उनके फायदे के लिए चारपाए उस चीज़ से पैदा किए जिसे हमारी ही क़ुदरत ने बनाया तो ये लोग (ख्वाहमाख्वाह) उनके मालिक बन गए

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَنْعَامًا: चौपाए (ऊँट, गाय, बकरी, भेड़ आदि)
  • مَالِكُونَ: स्वामी, अधिकार रखने वाले, इन पर पूरा नियंत्रण रखने वाले

तफ़सीर (व्याख्या):

क्या इन लोगों ने कभी विचार नहीं किया कि हमने उनके लिए चौपाए जानवर पैदा किए हैं? ये जानवर हमारी अपनी रचना हैं, हमने उन्हें अपनी कुदरत से बनाया है, किसी की सहायता के बिना। फिर हमने उन्हें इंसानों के अधीन कर दिया, उन्हें वश में कर दिया, ताकि वे इन पर पूरा अधिकार रखें।

ये जानवर जंगली और भयानक नहीं हैं, बल्कि हमने उन्हें नरम और विनम्र बनाया है, ताकि इंसान उन्हें आसानी से काबू कर सके। इंसान इन्हें दूध, मांस, ऊन, खाल और सवारी के लिए इस्तेमाल करता है। यह अल्लाह की बड़ी रहमत है कि उसने इन जानवरों को इंसान के लिए वश में कर दिया, वरना ये जंगली जानवरों की तरह होते जिन्हें कोई काबू नहीं कर सकता।

यह आयत हमें अल्लाह की कुदरत और उसकी असीम रहमत पर गौर करने की तरफ बुलाती है। जब हम इन चौपाओं को देखते हैं, तो हमें याद रखना चाहिए कि ये हमारी कमाई से नहीं, बल्कि अल्लाह की देन से हैं। वही उन्हें पैदा करता है, वही उन्हें पालता है, और वही उन्हें हमारे काम में लगाता है। यह हमारे लिए एक बड़ी नेमत है, जिसका शुक्र अदा करना चाहिए।

इस आयत से हमें यह भी सीख मिलती है कि अल्लाह ने इंसान को इन जानवरों पर अधिकार दिया है, लेकिन यह अधिकार ज़िम्मेदारी भी है। हमें इन जानवरों के साथ अच्छा व्यवहार करना चाहिए, उन्हें खाना देना चाहिए, उनकी देखभाल करनी चाहिए, क्योंकि ये अल्लाह की अमानत हैं। जो इन पर रहम नहीं करता, अल्लाह उस पर रहम नहीं करता।

यह आयत उन लोगों के लिए एक सबक है जो अल्लाह की नेमतों को देखकर भी उसका शुक्र नहीं करते और उसकी इबादत से मुंह मोड़ लेते हैं। अगर हम अपने आस-पास देखें, तो हर तरफ अल्लाह की रहमतें बिखरी पड़ी हैं। ये चौपाए जानवर, ये खेत, ये फल, ये पानी — सब कुछ अल्लाह की देन है। हमें चाहिए कि इन नेमतों को देखकर अल्लाह का शुक्र अदा करें और उसकी इबादत में लगे रहें।



📜 आयत 69-73 — यासीन

69وَمَا عَلَّمْنَاهُ الشِّعْرَ وَمَا يَنبَغِي لَهُ ۚ إِنْ هُوَ إِلَّا ذِكْرٌ وَقُرْآنٌ مُّبِينٌ
और हमने न उस (पैग़म्बर) को शेर की तालीम दी है और न शायरी उसकी शान के लायक़ है ये (किताब) तो बस (निरी) नसीहत और साफ-साफ कुरान है
70لِّيُنذِرَ مَن كَانَ حَيًّا وَيَحِقَّ الْقَوْلُ عَلَى الْكَافِرِينَ
ताकि जो ज़िन्दा (दिल आक़िल) हों उसे (अज़ाब से) डराए और काफ़िरों पर (अज़ाब का) क़ौल साबित हो जाए (और हुज्जत बाक़ी न रहे)
71أَوَلَمْ يَرَوْا أَنَّا خَلَقْنَا لَهُم مِّمَّا عَمِلَتْ أَيْدِينَا أَنْعَامًا فَهُمْ لَهَا مَالِكُونَ
क्या उन लोगों ने इस पर भी ग़ौर नहीं किया कि हमने उनके फायदे के लिए चारपाए उस चीज़ से पैदा किए जिसे हमारी ही क़ुदरत ने बनाया तो ये लोग (ख्वाहमाख्वाह) उनके मालिक बन गए
72وَذَلَّلْنَاهَا لَهُمْ فَمِنْهَا رَكُوبُهُمْ وَمِنْهَا يَأْكُلُونَ
और हम ही ने चार पायों को उनका मुतीय बना दिया तो बाज़ उनकी सवारियां हैं और बाज़ को खाते हैं
73وَلَهُمْ فِيهَا مَنَافِعُ وَمَشَارِبُ ۖ أَفَلَا يَشْكُرُونَ
और चार पायों में उनके (और) बहुत से फायदे हैं और पीने की चीज़ (दूध) तो क्या ये लोग (इस पर भी) शुक्र नहीं करते
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अनुवाद — यासीन 71

सूरा यासीन आयत 71 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : क्या उन लोगों ने इस पर भी ग़ौर नहीं किया…

सूरा आयत 71/83 — यासीन يس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यासीन सुनें, यासीन अनुवाद, यासीन mp3, यासीन pdf. आयत 69–73. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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