यासीन · 8/83
अनुवाद उच्चारण — यासीन
إِنَّا جَعَلْنَا فِي أَعْنَاقِهِمْ أَغْلَالًا فَهِيَ إِلَى الْأَذْقَانِ فَهُم مُّقْمَحُونَ ۝٨
Innaa ja`alnaa feee a`naaqihim aghlaalan fahiya ilal azqaani fahum muqmahoon
📖 हिंदी अर्थ
हमने उनकी गर्दनों में (भारी-भारी लोहे के) तौक़ डाल दिए हैं और ठुड्डियों तक पहुँचे हुए हैं कि वह गर्दनें उठाए हुए हैं (सर झुका नहीं सकते)

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَغْلَالًا (अग़लाल): गले में डाली जाने वाली लोहे की बेड़ियाँ या तौक।
  • الْأَذْقَانِ (अज़क़ान): ठुड्डियाँ (ठोड़ी का निचला हिस्सा)।
  • مُقْمَحُونَ (मुक़्महून): सिर ऊपर उठाए हुए, जिनकी गर्दनें बंधी हों और वे नीचे झुक न सकें।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला फ़रमाता है कि हमने इन काफ़िरों के गले में बेड़ियाँ डाल दी हैं, जो उनकी ठुड्डियों तक जा पहुँची हैं, और उनके हाथ उनकी गर्दनों के साथ जकड़ दिए गए हैं, जिससे वे सिर ऊपर उठाए हुए हैं और नीचे झुक नहीं सकते। यह एक ऐसी हालत है जिसमें वे न तो सच्चाई को देख सकते हैं और न ही उसे क़बूल कर सकते हैं। यह उनकी उस हठधर्मिता और अहंकार की मिसाल है जो उन्होंने हक़ (सत्य) के सामने अपनाया था। जब उन्हें ईमान की दावत दी गई, तो उन्होंने घमंड से उसे ठुकरा दिया और अपने दिलों को अंधा कर लिया। अल्लाह ने उनकी इसी स्थिति को इस तरह बयान किया जैसे उनके गले में बेड़ियाँ डाल दी गई हों जो उन्हें हर भलाई से रोक रही हैं।

यह आयत उन लोगों के बारे में है जिन्होंने सच्चाई को साफ़ देखने के बाद भी उसे नकार दिया और अपनी ज़िद और अहंकार पर अड़े रहे। उनके दिल इस क़दर सख्त हो गए थे कि वे नसीहत क़बूल करने के काबिल ही नहीं रहे। यह उनकी आज़माइश और सज़ा दोनों है। लेकिन यह भी याद रखना चाहिए कि अल्लाह का यह फैसला उनके अपने कर्मों का नतीजा है, क्योंकि उन्होंने खुद ही हक़ को ठुकराने का रास्ता चुना।

दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि इंसान को चाहिए कि वह अपने दिल को नरम रखे और हक़ की आवाज़ पर कान दे। जो व्यक्ति सच्चाई के सामने अहंकार करता है और उसे क़बूल नहीं करता, वह धीरे-धीरे ऐसी हालत में पहुँच जाता है कि उसके लिए हिदायत के दरवाज़े बंद हो जाते हैं। यह अल्लाह की रहमत है कि उसने हमें अभी भी मौका दिया है कि हम अपने दिलों को साफ़ करें, अहंकार को छोड़ें और ईमान की रोशनी को अपने दिलों में जगह दें। अल्लाह तआला बड़ा मेहरबान है और अपने बंदों की हिदायत चाहता है, लेकिन जब बंदा खुद ही हक़ से मुँह मोड़ लेता है, तो उसका अंजाम यही होता है। आओ हम अपने दिलों को झुकाना सीखें — अल्लाह के सामने झुकना, उसकी इबादत में सर झुकाना — क्योंकि यही सबसे बड़ी आज़ादी है। जो अल्लाह के सामने झुक गया, उसकी गर्दन कभी बेड़ियों में नहीं जकड़ी जाएगी।



📜 आयत 6-10 — यासीन

6لِتُنذِرَ قَوْمًا مَّا أُنذِرَ آبَاؤُهُمْ فَهُمْ غَافِلُونَ
ताकि तुम उन लोगों को (अज़ाबे खुदा से) डराओ जिनके बाप दादा (तुमसे पहले किसी पैग़म्बर से) डराए नहीं गए
7لَقَدْ حَقَّ الْقَوْلُ عَلَىٰ أَكْثَرِهِمْ فَهُمْ لَا يُؤْمِنُونَ
तो वह दीन से बिल्कुल बेख़बर हैं उन में अक्सर तो (अज़ाब की) बातें यक़ीनन बिल्कुल ठीक पूरी उतरे ये लोग तो ईमान लाएँगे नहीं
8إِنَّا جَعَلْنَا فِي أَعْنَاقِهِمْ أَغْلَالًا فَهِيَ إِلَى الْأَذْقَانِ فَهُم مُّقْمَحُونَ
हमने उनकी गर्दनों में (भारी-भारी लोहे के) तौक़ डाल दिए हैं और ठुड्डियों तक पहुँचे हुए हैं कि वह गर्दनें उठाए हुए हैं (सर झुका नहीं सकते)
9وَجَعَلْنَا مِن بَيْنِ أَيْدِيهِمْ سَدًّا وَمِنْ خَلْفِهِمْ سَدًّا فَأَغْشَيْنَاهُمْ فَهُمْ لَا يُبْصِرُونَ
हमने एक दीवार उनके आगे बना दी है और एक दीवार उनके पीछे फिर ऊपर से उनको ढाँक दिया है तो वह कुछ देख नहीं सकते
10وَسَوَاءٌ عَلَيْهِمْ أَأَنذَرْتَهُمْ أَمْ لَمْ تُنذِرْهُمْ لَا يُؤْمِنُونَ
और (ऐ रसूल) उनके लिए बराबर है ख्वाह तुम उन्हें डराओ या न डराओ ये (कभी) ईमान लाने वाले नहीं हैं
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अनुवाद — यासीन 8

सूरा यासीन आयत 8 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : हमने उनकी गर्दनों में (भारी-भारी लोहे के) तौक़ डाल दिए…

सूरा आयत 8/83 — यासीन يس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यासीन सुनें, यासीन अनुवाद, यासीन mp3, यासीन pdf. आयत 6–10. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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