यासीन · 7/83
अनुवाद उच्चारण — यासीन
لَقَدْ حَقَّ الْقَوْلُ عَلَىٰ أَكْثَرِهِمْ فَهُمْ لَا يُؤْمِنُونَ ۝٧
Laqad haqqal qawlu `alaaa aksarihim fahum laa yu`minoon
📖 हिंदी अर्थ
तो वह दीन से बिल्कुल बेख़बर हैं उन में अक्सर तो (अज़ाब की) बातें यक़ीनन बिल्कुल ठीक पूरी उतरे ये लोग तो ईमान लाएँगे नहीं
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • حَقَّ الْقَوْلُ: अज़ाब (दंड) का फैसला सिद्ध और वाजिब हो गया।
  • عَلَىٰ أَكْثَرِهِمْ: उनमें से अधिकतर लोगों पर (अर्थात मक्का के काफिरों पर)।

तफसीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला फरमाता है कि उन काफिरों में से अधिकतर पर अज़ाब का फैसला सिद्ध हो चुका है। यह फैसला अल्लाह की ओर से उन पर वाजिब हो गया, क्योंकि उनके पास हक़ (सत्य) आ चुका था—रसूल ﷺ की ज़ुबानी—लेकिन उन्होंने उसे ठुकरा दिया और अपने कुफ्र पर डटे रहे। उन्होंने न अल्लाह पर ईमान लाया, न उसके रसूल पर, और न ही उस हक़ पर अमल किया जो उनके पास आया। यह सब अल्लाह के उस इल्म के मुताबिक़ हुआ जो उसने उनके बारे में पहले से रखा था कि वे ईमान नहीं लाएँगे। चूँकि उन्होंने हक़ को सुनने और समझने के बावजूद उसे कबूल नहीं किया, इसलिए अल्लाह का फैसला उन पर सिद्ध हो गया कि वे ईमान नहीं लाएँगे और उनके लिए अज़ाब है।

दावत (नसीहत) का पहलू:

यह आयत हमें एक बहुत बड़ी सीख देती है कि अल्लाह का फैसला उसके इल्म और हिकमत पर आधारित होता है। जब इंसान के पास हक़ आ जाए और वह उसे जानबूझकर ठुकरा दे, तो उसका अंजाम बहुत बुरा होता है। इसलिए हमें चाहिए कि जब हमारे पास सत्य पहुँचे, तो हम उसे खुले दिल से कबूल करें। अल्लाह ने हमें अक्ल और समझ दी है, और रसूल ﷺ को हमारी हिदायत के लिए भेजा। जो लोग इस नेमत का शुक्र अदा करते हैं और ईमान लाते हैं, उनके लिए अल्लाह के पास जन्नत और खुशियाँ हैं। यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि हम अपने दिलों को सख्त न होने दें, बल्कि हर हाल में अल्लाह की रहमत की उम्मीद रखें और उसकी तरफ रुजू करें। अल्लाह तआला बड़ा मेहरबान है और तौबा करने वालों को प्यार करता है।

🎧 सुनें

📜 आयत 5-9 — यासीन

5تَنزِيلَ الْعَزِيزِ الرَّحِيمِ
जो बड़े मेहरबान (और) ग़ालिब (खुदा) का नाज़िल किया हुआ (है)
6لِتُنذِرَ قَوْمًا مَّا أُنذِرَ آبَاؤُهُمْ فَهُمْ غَافِلُونَ
ताकि तुम उन लोगों को (अज़ाबे खुदा से) डराओ जिनके बाप दादा (तुमसे पहले किसी पैग़म्बर से) डराए नहीं गए
7لَقَدْ حَقَّ الْقَوْلُ عَلَىٰ أَكْثَرِهِمْ فَهُمْ لَا يُؤْمِنُونَ
तो वह दीन से बिल्कुल बेख़बर हैं उन में अक्सर तो (अज़ाब की) बातें यक़ीनन बिल्कुल ठीक पूरी उतरे ये लोग तो ईमान लाएँगे नहीं
8إِنَّا جَعَلْنَا فِي أَعْنَاقِهِمْ أَغْلَالًا فَهِيَ إِلَى الْأَذْقَانِ فَهُم مُّقْمَحُونَ
हमने उनकी गर्दनों में (भारी-भारी लोहे के) तौक़ डाल दिए हैं और ठुड्डियों तक पहुँचे हुए हैं कि वह गर्दनें उठाए हुए हैं (सर झुका नहीं सकते)
9وَجَعَلْنَا مِن بَيْنِ أَيْدِيهِمْ سَدًّا وَمِنْ خَلْفِهِمْ سَدًّا فَأَغْشَيْنَاهُمْ فَهُمْ لَا يُبْصِرُونَ
हमने एक दीवार उनके आगे बना दी है और एक दीवार उनके पीछे फिर ऊपर से उनको ढाँक दिया है तो वह कुछ देख नहीं सकते
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अनुवाद — यासीन 7

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सूरा आयत 7/83 — यासीन يس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यासीन सुनें, यासीन अनुवाद, यासीन mp3, यासीन pdf. आयत 5–9. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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