यासीन · 9/83
अनुवाद उच्चारण — यासीन
وَجَعَلْنَا مِن بَيْنِ أَيْدِيهِمْ سَدًّا وَمِنْ خَلْفِهِمْ سَدًّا فَأَغْشَيْنَاهُمْ فَهُمْ لَا يُبْصِرُونَ ۝٩
Wa ja`alnaa mim baini aydeehim saddanw-wa min khalfihim saddan fa aghshai naahum fahum laa yubsiroon
📖 हिंदी अर्थ
हमने एक दीवार उनके आगे बना दी है और एक दीवार उनके पीछे फिर ऊपर से उनको ढाँक दिया है तो वह कुछ देख नहीं सकते
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • سَدًّا (सद्दन): दीवार, आड़, रुकावट
  • فَأَغْشَيْنَاهُمْ (फ़अग़शैनाहुम): हमने उन्हें ढक दिया, उनकी आँखों पर पर्दा डाल दिया
  • لَا يُبْصِرُونَ (ला युब्सिरून): वे देख नहीं सकते, उन्हें दिखाई नहीं देता

विस्तृत व्याख्या:

अल्लाह तआला इस आयत में उन काफ़िरों और मुनकिरों की हालत बयान कर रहा है जिन्होंने सच्चाई को ठुकरा दिया और अपनी ज़िद व हठधर्मी पर अड़ गए। अल्लाह फ़रमाता है कि हमने उनके आगे से भी एक दीवार (आड़) बना दी और उनके पीछे से भी एक दीवार (आड़) बना दी, और उनकी आँखों पर पर्दा डाल दिया, यहाँ तक कि वे कुछ देख ही नहीं सकते।

यह एक मजाज़ी (प्रतीकात्मक) बयान है, जो उनके दिलों की अंधता और समझ की कमी को दर्शाता है। यानी जिस तरह जब किसी इंसान के आगे-पीछे दीवार खड़ी कर दी जाए, तो वह न तो आगे बढ़ सकता है और न पीछे हट सकता है, बिल्कुल उसी तरह ये काफ़िर लोग हक़ (सच्चाई) को क़बूल करने से पूरी तरह महरूम हो गए। उनके सामने सच्चाई का रास्ता बंद कर दिया गया और पीछे से भी बंद कर दिया गया, और उनकी आँखों पर अंधेरा डाल दिया गया, जिससे वे सीधे रास्ते को देख ही नहीं पाते।

यह सज़ा उन्हें उनके अपने कर्मों की वजह से मिली। उन्होंने जब हक़ को ठुकराया और अल्लाह के रसूल (ﷺ) की दावत को क़बूल करने से इनकार किया, और अपनी ज़िद व अकड़ पर अड़े रहे, तो अल्लाह ने उनके दिलों को मोहर कर दिया और उनकी आँखों को अंधा कर दिया। यह उनके लिए एक अज़ाब (यातना) है, जो उनके हठ और विद्रोह का नतीजा है।

इस आयत में एक बड़ी नसीहत है कि जब इंसान सच्चाई को देखने से इनकार करता है और अपनी ज़िद पर अड़ा रहता है, तो अल्लाह उसकी समझ और दिल की आँखों को बंद कर देता है। यह एक बड़ी सज़ा है, जो इंसान को हिदायत से महरूम कर देती है। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपने दिलों को नर्म रखें, सच्चाई को क़बूल करने के लिए तैयार रहें, और अल्लाह के रसूल (ﷺ) की लाई हुई हिदायत को खुले दिल से अपनाएँ। जो लोग हक़ के सामने झुक जाते हैं, अल्लाह उनके दिलों को रोशन करता है और उन्हें सीधा रास्ता दिखाता है। यह अल्लाह की रहमत है, जो वह अपने नेक बंदों पर नाज़िल करता है।

हमें इस आयत से यह सबक लेना चाहिए कि हम अपने दिलों को साफ रखें, अहंकार और ज़िद से बचें, और हर हाल में सच्चाई को क़बूल करने के लिए तैयार रहें। यही वह रास्ता है जो हमें अल्लाह की रहमत और जन्नत तक पहुँचाता है। अल्लाह हम सबको हिदायत दे और हमारे दिलों को सच्चाई क़बूल करने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 7-11 — यासीन

7لَقَدْ حَقَّ الْقَوْلُ عَلَىٰ أَكْثَرِهِمْ فَهُمْ لَا يُؤْمِنُونَ
तो वह दीन से बिल्कुल बेख़बर हैं उन में अक्सर तो (अज़ाब की) बातें यक़ीनन बिल्कुल ठीक पूरी उतरे ये लोग तो ईमान लाएँगे नहीं
8إِنَّا جَعَلْنَا فِي أَعْنَاقِهِمْ أَغْلَالًا فَهِيَ إِلَى الْأَذْقَانِ فَهُم مُّقْمَحُونَ
हमने उनकी गर्दनों में (भारी-भारी लोहे के) तौक़ डाल दिए हैं और ठुड्डियों तक पहुँचे हुए हैं कि वह गर्दनें उठाए हुए हैं (सर झुका नहीं सकते)
9وَجَعَلْنَا مِن بَيْنِ أَيْدِيهِمْ سَدًّا وَمِنْ خَلْفِهِمْ سَدًّا فَأَغْشَيْنَاهُمْ فَهُمْ لَا يُبْصِرُونَ
हमने एक दीवार उनके आगे बना दी है और एक दीवार उनके पीछे फिर ऊपर से उनको ढाँक दिया है तो वह कुछ देख नहीं सकते
10وَسَوَاءٌ عَلَيْهِمْ أَأَنذَرْتَهُمْ أَمْ لَمْ تُنذِرْهُمْ لَا يُؤْمِنُونَ
और (ऐ रसूल) उनके लिए बराबर है ख्वाह तुम उन्हें डराओ या न डराओ ये (कभी) ईमान लाने वाले नहीं हैं
11إِنَّمَا تُنذِرُ مَنِ اتَّبَعَ الذِّكْرَ وَخَشِيَ الرَّحْمَٰنَ بِالْغَيْبِ ۖ فَبَشِّرْهُ بِمَغْفِرَةٍ وَأَجْرٍ كَرِيمٍ
तुम तो बस उसी शख्स को डरा सकते हो जो नसीहत माने और बेदेखे भाले खुदा का ख़ौफ़ रखे तो तुम उसको (गुनाहों की) माफी और एक बाइज्ज़त (व आबरू) अज्र की खुशख़बरी दे दो
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अनुवाद — यासीन 9

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Tuesday, August 18, 2026

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