Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- سَدًّا (सद्दन): दीवार, आड़, रुकावट
- فَأَغْشَيْنَاهُمْ (फ़अग़शैनाहुम): हमने उन्हें ढक दिया, उनकी आँखों पर पर्दा डाल दिया
- لَا يُبْصِرُونَ (ला युब्सिरून): वे देख नहीं सकते, उन्हें दिखाई नहीं देता
विस्तृत व्याख्या:
अल्लाह तआला इस आयत में उन काफ़िरों और मुनकिरों की हालत बयान कर रहा है जिन्होंने सच्चाई को ठुकरा दिया और अपनी ज़िद व हठधर्मी पर अड़ गए। अल्लाह फ़रमाता है कि हमने उनके आगे से भी एक दीवार (आड़) बना दी और उनके पीछे से भी एक दीवार (आड़) बना दी, और उनकी आँखों पर पर्दा डाल दिया, यहाँ तक कि वे कुछ देख ही नहीं सकते।
यह एक मजाज़ी (प्रतीकात्मक) बयान है, जो उनके दिलों की अंधता और समझ की कमी को दर्शाता है। यानी जिस तरह जब किसी इंसान के आगे-पीछे दीवार खड़ी कर दी जाए, तो वह न तो आगे बढ़ सकता है और न पीछे हट सकता है, बिल्कुल उसी तरह ये काफ़िर लोग हक़ (सच्चाई) को क़बूल करने से पूरी तरह महरूम हो गए। उनके सामने सच्चाई का रास्ता बंद कर दिया गया और पीछे से भी बंद कर दिया गया, और उनकी आँखों पर अंधेरा डाल दिया गया, जिससे वे सीधे रास्ते को देख ही नहीं पाते।
यह सज़ा उन्हें उनके अपने कर्मों की वजह से मिली। उन्होंने जब हक़ को ठुकराया और अल्लाह के रसूल (ﷺ) की दावत को क़बूल करने से इनकार किया, और अपनी ज़िद व अकड़ पर अड़े रहे, तो अल्लाह ने उनके दिलों को मोहर कर दिया और उनकी आँखों को अंधा कर दिया। यह उनके लिए एक अज़ाब (यातना) है, जो उनके हठ और विद्रोह का नतीजा है।
इस आयत में एक बड़ी नसीहत है कि जब इंसान सच्चाई को देखने से इनकार करता है और अपनी ज़िद पर अड़ा रहता है, तो अल्लाह उसकी समझ और दिल की आँखों को बंद कर देता है। यह एक बड़ी सज़ा है, जो इंसान को हिदायत से महरूम कर देती है। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपने दिलों को नर्म रखें, सच्चाई को क़बूल करने के लिए तैयार रहें, और अल्लाह के रसूल (ﷺ) की लाई हुई हिदायत को खुले दिल से अपनाएँ। जो लोग हक़ के सामने झुक जाते हैं, अल्लाह उनके दिलों को रोशन करता है और उन्हें सीधा रास्ता दिखाता है। यह अल्लाह की रहमत है, जो वह अपने नेक बंदों पर नाज़िल करता है।
हमें इस आयत से यह सबक लेना चाहिए कि हम अपने दिलों को साफ रखें, अहंकार और ज़िद से बचें, और हर हाल में सच्चाई को क़बूल करने के लिए तैयार रहें। यही वह रास्ता है जो हमें अल्लाह की रहमत और जन्नत तक पहुँचाता है। अल्लाह हम सबको हिदायत दे और हमारे दिलों को सच्चाई क़बूल करने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।
📜 आयत 7-11 — सूरा यासीन
अनुवाद — यासीन 9
सूरा यासीन आयत 9 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : हमने एक दीवार उनके आगे बना दी है और एक…सूरा आयत 9/83 — सूरा यासीन يس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा यासीन सुनें, सूरा यासीन अनुवाद, सूरा यासीन mp3, सूरा यासीन pdf. आयत 7–11. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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