अज़-ज़ुमर · 28/75
अनुवाद उच्चारण — सूरा अज़-ज़ुमर
قُرْآنًا عَرَبِيًّا غَيْرَ ذِي عِوَجٍ لَّعَلَّهُمْ يَتَّقُونَ ۝٢٨
Qur-aanan `Arabiyyan ghaira zee `iwajil la`allahum yattaqoon
📖 हिंदी अर्थ
(हम ने तो साफ और सलीस) एक अरबी कुरान (नाज़िल किया) जिसमें ज़रा भी कजी (पेचीदगी) नहीं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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A Abdurrahman As-Sudais ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • قُرْآنًا عَرَبِيًّا: अरबी भाषा में उतारा गया कुरआन
  • غَيْرَ ذِي عِوَجٍ: जिसमें कोई टेढ़ापन, विरोधाभास या कमी नहीं
  • لَعَلَّهُمْ يَتَّقُونَ: ताकि वे अल्लाह से डरें और उसकी अवज्ञा से बचें

तफसीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने यह कुरआन मुबारक अरबी भाषा में उतारा, जो अत्यंत स्पष्ट, सरल और समझने में आसान है। इसमें कोई टेढ़ापन नहीं, कोई विरोधाभास नहीं, कोई कमी नहीं और न ही कोई भ्रम या संदेह की गुंजाइश है। यह एक ऐसी किताब है जो सीधे रास्ते पर चलने की पूरी रहनुमाई करती है।

इस कुरआन में अल्लाह ने पिछली उम्मतों की मिसालें, अच्छे और बुरे लोगों के अंजाम और हर तरह की नसीहतें बयान की हैं, ताकि लोग सोचें, समझें और अपनी गलतियों से बाज़ आएं। यह किताब किसी ख़ास ज़ात या गिरोह के लिए नहीं, बल्कि पूरी इंसानियत की हिदायत के लिए उतारी गई है।

इसका मक़सद यह है कि लोग अल्लाह से डरें, उसके हुक्मों की पैरवी करें, उसकी मनाही से बचें और अपनी ज़िंदगी को उसकी रज़ा के मुताबिक ढालें। जब इंसान इस कुरआन को पढ़ता है और उस पर अमल करता है, तो उसका दिल रोशन हो जाता है, उसका ईमान मज़बूत होता है और वह दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी हासिल करता है।

प्यारे भाइयों और बहनों! यह कुरआन हमारे लिए अल्लाह की सबसे बड़ी नेमत है। इसे पढ़ें, समझें और इस पर अमल करें। यही वह रास्ता है जो हमें जन्नत तक पहुंचाएगा और हमें अल्लाह की रहमत का हक़दार बनाएगा। अल्लाह तआला हम सबको कुरआन को समझने और उस पर अमल करने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।



📜 आयत 26-30 — सूरा अज़-ज़ुमर

26فَأَذَاقَهُمُ اللَّهُ الْخِزْيَ فِي الْحَيَاةِ الدُّنْيَا ۖ وَلَعَذَابُ الْآخِرَةِ أَكْبَرُ ۚ لَوْ كَانُوا يَعْلَمُونَ
तो खुदा ने उन्हें (इसी) दुनिया की ज़िन्दगी में रूसवाई की लज्ज़त चखा दी और आख़ेरत का अज़ाब तो यक़ीनी उससे कहीं बढ़कर है काश ये लोग ये बात जानते
27وَلَقَدْ ضَرَبْنَا لِلنَّاسِ فِي هَٰذَا الْقُرْآنِ مِن كُلِّ مَثَلٍ لَّعَلَّهُمْ يَتَذَكَّرُونَ
और हमने तो इस क़ुरान में लोगों के (समझाने के) वास्ते हर तरह की मिसाल बयान कर दी है ताकि ये लोग नसीहत हासिल करें
28قُرْآنًا عَرَبِيًّا غَيْرَ ذِي عِوَجٍ لَّعَلَّهُمْ يَتَّقُونَ
(हम ने तो साफ और सलीस) एक अरबी कुरान (नाज़िल किया) जिसमें ज़रा भी कजी (पेचीदगी) नहीं
29ضَرَبَ اللَّهُ مَثَلًا رَّجُلًا فِيهِ شُرَكَاءُ مُتَشَاكِسُونَ وَرَجُلًا سَلَمًا لِّرَجُلٍ هَلْ يَسْتَوِيَانِ مَثَلًا ۚ الْحَمْدُ لِلَّهِ ۚ بَلْ أَكْثَرُهُمْ لَا يَعْلَمُونَ
ताकि ये लोग (समझकर) खुदा से डरे ख़ुदा ने एक मिसाल बयान की है कि एक शख्स (ग़ुलाम) है जिसमें कई झगड़ालू साझी हैं और एक ज़ालिम है कि पूरा एक शख्स का है उन दोनों की हालत यकसाँ हो सकती हैं (हरगिज़ नहीं) अल्हमदोलिल्लाह मगर उनमें अक्सर इतना भी नहीं जानते
30إِنَّكَ مَيِّتٌ وَإِنَّهُم مَّيِّتُونَ
(ऐ रसूल) बेशक तुम भी मरने वाले हो
अज़-ज़ुमरकुरान सूची
75आयत
मक्कीअवतरण स्थान
28आयत

अनुवाद — अज़-ज़ुमर 28

सूरा अज़-ज़ुमर आयत 28 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (हम ने तो साफ और सलीस) एक अरबी कुरान (नाज़िल…

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Friday, October 2, 2026

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