अज़-ज़ुमर · 27/75
अनुवाद उच्चारण — सूरा अज़-ज़ुमर
وَلَقَدْ ضَرَبْنَا لِلنَّاسِ فِي هَٰذَا الْقُرْآنِ مِن كُلِّ مَثَلٍ لَّعَلَّهُمْ يَتَذَكَّرُونَ ۝٢٧
Wa laqad darabnaa linnaasi fee haazal Qur-aani min kulli masalil la`allahum yatazakkaroon
📖 हिंदी अर्थ
और हमने तो इस क़ुरान में लोगों के (समझाने के) वास्ते हर तरह की मिसाल बयान कर दी है ताकि ये लोग नसीहत हासिल करें

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
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A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
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A Abdullah Al-Juhani ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • ضَرَبْنَا مَثَلًا: हमने उदाहरण बयान किया, समझाने के लिए मिसाल पेश की।
  • مِن كُلِّ مَثَلٍ: हर प्रकार की मिसाल, हर ज़रूरत के अनुसार उदाहरण।
  • لَعَلَّهُمْ يَتَذَكَّرُونَ: ताकि वे ध्यान दें, सीखें और अपनी ग़लतियों से बाज़ आएँ।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने इस पवित्र क़ुरआन में लोगों के लिए हर तरह की मिसालें बयान की हैं—भलाई और बुराई, सच और झूठ, ईमान और कुफ़्र, जन्नत और जहन्नम, अच्छे और बुरे लोगों के हालात—ताकि इंसान इन उदाहरणों से सबक़ हासिल करे। ये मिसालें पिछली उम्मतों के क़िस्सों, क़ुदरत के नज़ारों, और इंसानी ज़िंदगी के अनुभवों से ली गई हैं, ताकि हर इंसान अपनी समझ के अनुसार इनसे फ़ायदा उठा सके।

इस आयत में अल्लाह तआला फ़रमाता है कि हमने ये क़ुरआन सिर्फ़ एक ज़बान या एक क़ौम के लिए नहीं भेजा, बल्कि इसमें हर ज़माने और हर मकान के लोगों के लिए हिदायत का सामान रखा है। हर मिसाल इसलिए बयान की गई है ताकि लोग अपनी आँखें खोलें, अपने दिलों को जगाएँ, और उन बातों से बाज़ आएँ जो उन्हें अल्लाह से दूर करती हैं। ये क़ुरआन अरबी ज़बान में है, साफ़ और आसान अल्फ़ाज़ के साथ, जिसमें कोई पेचीदगी नहीं, ताकि लोग आसानी से समझ सकें और अल्लाह के अहकाम पर अमल कर सकें।

दावती पहलू:

प्यारे भाइयों और बहनों! ये आयत हमें बताती है कि अल्लाह तआला ने हमारी हिदायत के लिए कितनी रहमत और मेहरबानी से काम लिया है। उसने हमें अकेला नहीं छोड़ा, बल्कि हर मोड़ पर हमारी रहनुमाई के लिए निशानियाँ और मिसालें रख दीं। जब हम क़ुरआन पढ़ते हैं, तो हमें महसूस करना चाहिए कि अल्लाह हमसे बात कर रहा है, हमें समझा रहा है, और हमें अपनी रहमत की तरफ बुला रहा है। ये मिसालें सिर्फ़ कहानियाँ नहीं हैं, बल्कि हमारी ज़िंदगी का आईना हैं—अगर हम इन पर ग़ौर करें, तो अपनी हर मुश्किल का हल पा सकते हैं। अल्लाह ने ये सब इसलिए किया ताकि हम भटकने से बचें, अपनी ज़िंदगी को सही राह पर चलाएँ, और उसकी रज़ा और जन्नत के हक़दार बनें। आओ, हम क़ुरआन की इन मिसालों पर दिल से ग़ौर करें, उनसे सबक़ लें, और अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की बताई राह पर ढालें—यही हमारी कामयाबी है, दुनिया में भी और आख़िरत में भी।



📜 आयत 25-29 — सूरा अज़-ज़ुमर

25كَذَّبَ الَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ فَأَتَاهُمُ الْعَذَابُ مِنْ حَيْثُ لَا يَشْعُرُونَ
जो लोग उनसे पहले गुज़र गए उन्होंने भी (पैग़म्बरों को) झुठलाया तो उन पर अज़ाब इस तरह आ पहुँचा कि उन्हें ख़बर भी न हुई
26فَأَذَاقَهُمُ اللَّهُ الْخِزْيَ فِي الْحَيَاةِ الدُّنْيَا ۖ وَلَعَذَابُ الْآخِرَةِ أَكْبَرُ ۚ لَوْ كَانُوا يَعْلَمُونَ
तो खुदा ने उन्हें (इसी) दुनिया की ज़िन्दगी में रूसवाई की लज्ज़त चखा दी और आख़ेरत का अज़ाब तो यक़ीनी उससे कहीं बढ़कर है काश ये लोग ये बात जानते
27وَلَقَدْ ضَرَبْنَا لِلنَّاسِ فِي هَٰذَا الْقُرْآنِ مِن كُلِّ مَثَلٍ لَّعَلَّهُمْ يَتَذَكَّرُونَ
और हमने तो इस क़ुरान में लोगों के (समझाने के) वास्ते हर तरह की मिसाल बयान कर दी है ताकि ये लोग नसीहत हासिल करें
28قُرْآنًا عَرَبِيًّا غَيْرَ ذِي عِوَجٍ لَّعَلَّهُمْ يَتَّقُونَ
(हम ने तो साफ और सलीस) एक अरबी कुरान (नाज़िल किया) जिसमें ज़रा भी कजी (पेचीदगी) नहीं
29ضَرَبَ اللَّهُ مَثَلًا رَّجُلًا فِيهِ شُرَكَاءُ مُتَشَاكِسُونَ وَرَجُلًا سَلَمًا لِّرَجُلٍ هَلْ يَسْتَوِيَانِ مَثَلًا ۚ الْحَمْدُ لِلَّهِ ۚ بَلْ أَكْثَرُهُمْ لَا يَعْلَمُونَ
ताकि ये लोग (समझकर) खुदा से डरे ख़ुदा ने एक मिसाल बयान की है कि एक शख्स (ग़ुलाम) है जिसमें कई झगड़ालू साझी हैं और एक ज़ालिम है कि पूरा एक शख्स का है उन दोनों की हालत यकसाँ हो सकती हैं (हरगिज़ नहीं) अल्हमदोलिल्लाह मगर उनमें अक्सर इतना भी नहीं जानते
अज़-ज़ुमरकुरान सूची
75आयत
मक्कीअवतरण स्थान
27आयत

अनुवाद — अज़-ज़ुमर 27

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Friday, October 2, 2026

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