अज़-ज़ुमर · 51/75
अनुवाद उच्चारण — अज़-ज़ुमर
فَأَصَابَهُمْ سَيِّئَاتُ مَا كَسَبُوا ۚ وَالَّذِينَ ظَلَمُوا مِنْ هَٰؤُلَاءِ سَيُصِيبُهُمْ سَيِّئَاتُ مَا كَسَبُوا وَمَا هُم بِمُعْجِزِينَ ٥١
Transliteration
Fa asaabahum saiyi aatu maa kasaboo; wallazeena zalamoo min haaa`ulaaa`i sa yuzeebuhum saiyi aatu maa kasaboo wa maa hum bimu`jizeen
अनुवाद (हिंदी अर्थ)
📖 हिंदी अर्थ
ग़रज़ उनके आमाल के बुरे नतीजे उन्हें भुगतने पड़े और उन (कुफ्फ़ारे मक्का) में से जिन लोगों ने नाफरमानियाँ की हैं उन्हें भी अपने अपने आमाल की सज़ाएँ भुगतनी पड़ेंगी और ये लोग (ख़ुदा को)े आजिज़ नहीं कर सकते
Additional reference in اردو
🎧 सुनें
📜 आयत 49-53 — अज़-ज़ुमर
49فَإِذَا مَسَّ الْإِنسَانَ ضُرٌّ دَعَانَا ثُمَّ إِذَا خَوَّلْنَاهُ نِعْمَةً مِّنَّا قَالَ إِنَّمَا أُوتِيتُهُ عَلَىٰ عِلْمٍ ۚ بَلْ هِيَ فِتْنَةٌ وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَهُمْ لَا يَعْلَمُونَ
इन्सान को तो जब कोई बुराई छू गयी बस वह लगा हमसे दुआएँ माँगने, फिर जब हम उसे अपनी तरफ़ से कोई नेअमत अता करते हैं तो कहने लगता है कि ये तो सिर्फ (मेरे) इल्म के ज़ोर से मुझे दिया गया है (ये ग़लती है) बल्कि ये तो एक आज़माइश है मगर उन में के अक्सर नहीं जानते हैं
50قَدْ قَالَهَا الَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ فَمَا أَغْنَىٰ عَنْهُم مَّا كَانُوا يَكْسِبُونَ
जो लोग उनसे पहले थे वह भी ऐसी बातें बका करते थे फिर (जब हमारा अज़ाब आया) तो उनकी कारस्तानियाँ उनके कुछ भी काम न आई
51فَأَصَابَهُمْ سَيِّئَاتُ مَا كَسَبُوا ۚ وَالَّذِينَ ظَلَمُوا مِنْ هَٰؤُلَاءِ سَيُصِيبُهُمْ سَيِّئَاتُ مَا كَسَبُوا وَمَا هُم بِمُعْجِزِينَ
ग़रज़ उनके आमाल के बुरे नतीजे उन्हें भुगतने पड़े और उन (कुफ्फ़ारे मक्का) में से जिन लोगों ने नाफरमानियाँ की हैं उन्हें भी अपने अपने आमाल की सज़ाएँ भुगतनी पड़ेंगी और ये लोग (ख़ुदा को)े आजिज़ नहीं कर सकते
52أَوَلَمْ يَعْلَمُوا أَنَّ اللَّهَ يَبْسُطُ الرِّزْقَ لِمَن يَشَاءُ وَيَقْدِرُ ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّقَوْمٍ يُؤْمِنُونَ
क्या उन लोगों को इतनी बात भी मालूम नहीं कि ख़ुदा ही जिसके लिए चाहता है रोज़ी फराख़ करता है और (जिसके लिए चाहता है) तंग करता है इसमें शक नहीं कि क्या इसमें ईमानदार लोगों के (कुदरत की) बहुत सी निशानियाँ हैं
53۞ قُلْ يَا عِبَادِيَ الَّذِينَ أَسْرَفُوا عَلَىٰ أَنفُسِهِمْ لَا تَقْنَطُوا مِن رَّحْمَةِ اللَّهِ ۚ إِنَّ اللَّهَ يَغْفِرُ الذُّنُوبَ جَمِيعًا ۚ إِنَّهُ هُوَ الْغَفُورُ الرَّحِيمُ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि ऐ मेरे (ईमानदार) बन्दों जिन्होने (गुनाह करके) अपनी जानों पर ज्यादतियाँ की हैं तुम लोग ख़ुदा की रहमत से नाउम्मीद न होना बेशक ख़ुदा (तुम्हारे) कुल गुनाहों को बख्श देगा वह बेशक बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
अज़-ज़ुमरकुरान सूची
75आयत
मक्कीRevelation
51आयत
अनुवाद — अज़-ज़ुमर 51
सूरा अज़-ज़ुमर आयत 51 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ग़रज़ उनके आमाल के बुरे नतीजे उन्हें भुगतने पड़े और…सूरा आयत 51/75 — अज़-ज़ुमर الزمر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अज़-ज़ुमर सुनें, अज़-ज़ुमर अनुवाद, अज़-ज़ुमर mp3, अज़-ज़ुमर pdf. आयत 49–53. हिंदी अर्थ: اردو.
العربية
English
Bahasa Indonesia
Türkçe
Русский
فارسی
Français
اردو
বাংলা
Deutsch
Español
中文
हिन्दी
Português
Italiano
ภาษาไทย
Polski
Nederlands
Shqip
Kiswahili
O'zbek
தமிழ்
Melayu
Bosanski
Soomaali
Azərbaycan
کوردی
한국어
日本語
Svenska
Dansk
Norsk
پښتو
മലയാളം
සිංහල
Tamazight
Hausa
አማርኛ
Български
Тоҷикӣ
Қазақша
Filipino
سنڌي
Yorùbá
Fulfulde
Татарча
ئۇيغۇرچە
Кыргызча
ਪੰਜਾਬੀ
Jawa
తెలుగు
မြန်မာ
ગુજરાતી
Oromo
मराठी
Tiếng Việt
Malagasy
Нохчийн
Wolof
ދިވެހި
ಕನ್ನಡ
Українська
Ελληνικά
ქართული
ខ្មែរ
دری
Qafar af
Maranao
नेपाली
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








