Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- صَدُقَاتِهِنَّ (सदुक़ातिहिन्न): उनका महर (विवाह में दिया जाने वाला अनिवार्य उपहार)।
- نِحْلَةً (निह्लतन): एक अनिवार्य और ख़ुशी-ख़ुशी दी जाने वाली भेंट, जो बिना किसी शर्त या बदले के हो।
- طِبْنَ (तिब्न): वे (औरतें) ख़ुश हों या उनका दिल राज़ी हो।
- نَفْسًا (नफ़्सन): अपनी पूरी रज़ामंदी और ख़ुशी से।
- هَنِيئًا (हनीअन): जो आराम से और बिना किसी परेशानी के खाया जाए।
- مَرِيئًا (मरीअन): जो गले से उतर जाए और बाद में कोई तकलीफ़ या पछतावा न हो।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला मुसलमानों को हुक्म देता है कि जब विवाह हो जाए, तो औरतों को उनका महर (मेहर) पूरा-पूरा दो। यह महर कोई एहसान या बाद में अदा करने वाली चीज़ नहीं है, बल्कि यह एक अनिवार्य और नियत किया गया हक़ है, जो ख़ुशी और खुले दिल से दिया जाना चाहिए। यह अल्लाह की तरफ़ से एक फ़र्ज़ है, जिसे अदा करना हर पति पर लाज़िम है।
इसके बाद अल्लाह फ़रमाता है कि अगर औरतें अपनी ख़ुशी और रज़ामंदी से, बिना किसी दबाव या डर के, महर का कुछ हिस्सा या पूरा महर अपने पति को दे दें या माफ़ कर दें, तो पति के लिए उसे लेना और उसमें से खाना-पीना या ख़र्च करना हलाल और पाक है। यह ऐसा माल है जिसमें कोई गंदगी या हराम नहीं है, और इसे इस्तेमाल करने में कोई बुराई नहीं है। लेकिन यह शर्त है कि औरत का दिल सच्चे दिल से राज़ी हो, न कि वह किसी डर या शर्मिंदगी की वजह से ऐसा करे।
फ़ायदे (सीख):
- इस आयत से पता चलता है कि इस्लाम ने औरतों को आर्थिक अधिकार दिए हैं, और महर उनका निजी हक़ है, जिसे बिना किसी कमी के अदा करना ज़रूरी है। यह औरत की इज़्ज़त और उसके अस्तित्व को मान्यता देता है।
- इस्लाम में हर लेन-देन और रिश्ते में साफ़-सफ़ाई और खुले दिल की तालीम दी गई है। महर को "निह्ला" (ख़ुशी से दी जाने वाली भेंट) कहना बताता है कि इसे अदा करते समय नेक नीयत और मुहब्बत होनी चाहिए।
- यह आयत पतियों को सिखाती है कि अगर पत्नी अपनी मर्ज़ी से कुछ दे, तो उसे लेने में कोई हर्ज नहीं, लेकिन कभी भी औरत पर दबाव नहीं डालना चाहिए। यह इस्लाम का वह नाज़ुक पहलू है जो औरत के दिल की रज़ामंदी को अहमियत देता है।
- इस आयत से यह भी सीख मिलती है कि रिश्तों में मुहब्बत और आपसी राज़ी-ख़ुशी का होना कितना ज़रूरी है। अल्लाह ने जहाँ हुक्म दिया, वहीं दिल की नरमी और खुशी को भी शर्त बनाया, ताकि घरों में मुहब्बत और भरोसा बना रहे।
- यह आयत मुसलमानों को यह भी सिखाती है कि जो माल हलाल और पाक हो, उसे इस्तेमाल करने में कोई बुराई नहीं, बल्कि वह उनके लिए बरकत वाला होता है। जबकि हराम माल दिल और ज़िंदगी दोनों को तबाह कर देता है।
📜 आयत 2-6 — सूरा अन-निसा
अनुवाद — अन-निसा 4
सूरा अन-निसा आयत 4 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और औरतों को उनके महर ख़ुशी ख़ुशी दे डालो फिर…सूरा आयत 4/176 — सूरा अन-निसा النساء (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-निसा सुनें, सूरा अन-निसा अनुवाद, सूरा अन-निसा mp3, सूरा अन-निसा pdf. आयत 2–6. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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