ग़ाफिर · 21/85
अनुवाद उच्चारण — ग़ाफिर
۞ أَوَلَمْ يَسِيرُوا فِي الْأَرْضِ فَيَنظُرُوا كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ الَّذِينَ كَانُوا مِن قَبْلِهِمْ ۚ كَانُوا هُمْ أَشَدَّ مِنْهُمْ قُوَّةً وَآثَارًا فِي الْأَرْضِ فَأَخَذَهُمُ اللَّهُ بِذُنُوبِهِمْ وَمَا كَانَ لَهُم مِّنَ اللَّهِ مِن وَاقٍ ۝٢١
Awalam yaseeroo fil ardi fa yanzuroo kaifa kaana `aaqibatul lazeena kaanoo min qablihim; kaanoo hum ashadda minhum quwwatanw wa aasaaran fil ardi fa akhazahumul laahu bizunoobihim wa maa kaana lahum minal laahi minw waaq
📖 हिंदी अर्थ
क्या उन लोगों ने रूए ज़मीन पर चल फिर कर नहीं देखा कि जो लोग उनसे पहले थे उनका अन्जाम क्या हुआ (हालाँकि) वह लोग कुवत (शान और उम्र सब) में और ज़मीन पर अपनी निशानियाँ (यादगारें इमारतें) वग़ैरह छोड़ जाने में भी उनसे कहीं बढ़ चढ़ के थे तो ख़ुदा ने उनके गुनाहों की वजह से उनकी ले दे की, और ख़ुदा (के ग़ज़ब से) उनका कोई बचाने वाला भी न था
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • آثَارًا: धरती पर छोड़ी गई निशानियाँ, जैसे मजबूत इमारतें, महल और सभ्यता के अवशेष।
  • وَاقٍ: बचाने वाला, रक्षा करने वाला, जो अल्लाह के अज़ाब को टाल सके।

तफ़सीर (व्याख्या):

क्या ये लोग धरती पर चलते-फिरते नहीं हैं कि देखते कि उनसे पहले गुज़री हुई उम्मतों का अंजाम क्या हुआ? जिन्होंने अपने नबियों को झुठलाया और अल्लाह की नाफ़रमानी की। ये पिछली उम्मतें ताक़त और धरती पर अपने निशान छोड़ने में इनसे कहीं बढ़कर थीं — उनके जिस्म ज़्यादा मज़बूत थे, उनके महल ऊँचे और पुख़्ता थे, उनकी सभ्यता कहीं ज़्यादा तरक़्क़ी-याफ़्ता थी। लेकिन जब उन्होंने कुफ़्र और गुनाहों पर अड़े रहने का फ़ैसला किया, तो अल्लाह ने उन्हें उन्हीं के गुनाहों की वजह से पकड़ लिया — उनकी ताक़त उनके किसी काम न आई, न उनके महल उन्हें बचा सके, और न ही उनके पास कोई ऐसा था जो अल्लाह के अज़ाब को उनसे टाल सके।

ये आयत हमारे लिए एक बहुत बड़ी नसीहत है। अल्लाह तआला हमें सोचने और सीखने की दावत दे रहा है। इतिहास के पन्ने खोलिए — जो उम्मतें सबसे ज़्यादा ताक़तवर थीं, जिन्होंने धरती पर सबसे ज़्यादा तरक़्क़ी की, जब उन्होंने अल्लाह का हुक्म नहीं माना, तो उनका नामो-निशान तक मिट गया। ये सिर्फ़ एक कहानी नहीं, बल्कि एक सबक़ है कि असली ताक़त अल्लाह की तरफ़ से आती है, और जिसे अल्लाह पकड़ ले, उसे कोई नहीं बचा सकता।

इस आयत से हमें ये सीख मिलती है कि हमें अपनी ताक़त, अपने धन, अपनी तरक़्क़ी पर घमंड नहीं करना चाहिए। ये सब अल्लाह की देन है, और ये सब उसी की तरफ़ लौटना है। अगर हम अल्लाह की इबादत करें, उसके हुक्मों पर चलें, और अपने गुनाहों से तौबा करें, तो अल्लाह हमें अपनी रहमत से नवाज़ेगा। लेकिन अगर हम उसकी नाफ़रमानी करेंगे, तो हमारी ताक़त और हमारी तरक़्क़ी हमें अल्लाह के अज़ाब से नहीं बचा सकती।

ये आयत हमें ये भी बताती है कि अल्लाह इंसाफ़ करने वाला है — वो किसी पर ज़ुल्म नहीं करता, बल्कि इंसान अपने कर्मों से ख़ुद अपना अंजाम तय करता है। जो लोग अल्लाह की राह पर चलते हैं, उनके लिए उसकी रहमत और जन्नत है, और जो उसकी नाफ़रमानी करते हैं, उनके लिए उसका अज़ाब है। आइए, हम इस आयत से सबक़ लें और अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक़ बनाएँ, ताकि हम उन लोगों में से न हों जिनका अंजाम बुरा हो, बल्कि उन लोगों में से हों जिन्हें अल्लाह की रहमत और मग़फ़िरत मिले।

🎧 सुनें

📜 आयत 19-23 — ग़ाफिर

19يَعْلَمُ خَائِنَةَ الْأَعْيُنِ وَمَا تُخْفِي الصُّدُورُ
ख़ुदा तो ऑंखों की दुज़दीदा (ख़यानत की) निगाह को भी जानता है और उन बातों को भी जो (लोगों के) सीनों में पोशीदा है
20وَاللَّهُ يَقْضِي بِالْحَقِّ ۖ وَالَّذِينَ يَدْعُونَ مِن دُونِهِ لَا يَقْضُونَ بِشَيْءٍ ۗ إِنَّ اللَّهَ هُوَ السَّمِيعُ الْبَصِيرُ
और ख़ुदा ठीक ठीक हुक्म देता है, और उसके सिवा जिनकी ये लोग इबादत करते हैं वह तो कुछ भी हुक्म नहीं दे सकते, इसमें शक नहीं कि ख़ुदा सुनने वाला देखने वाला है
21۞ أَوَلَمْ يَسِيرُوا فِي الْأَرْضِ فَيَنظُرُوا كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ الَّذِينَ كَانُوا مِن قَبْلِهِمْ ۚ كَانُوا هُمْ أَشَدَّ مِنْهُمْ قُوَّةً وَآثَارًا فِي الْأَرْضِ فَأَخَذَهُمُ اللَّهُ بِذُنُوبِهِمْ وَمَا كَانَ لَهُم مِّنَ اللَّهِ مِن وَاقٍ
क्या उन लोगों ने रूए ज़मीन पर चल फिर कर नहीं देखा कि जो लोग उनसे पहले थे उनका अन्जाम क्या हुआ (हालाँकि) वह लोग कुवत (शान और उम्र सब) में और ज़मीन पर अपनी निशानियाँ (यादगारें इमारतें) वग़ैरह छोड़ जाने में भी उनसे कहीं बढ़ चढ़ के थे तो ख़ुदा ने उनके गुनाहों की वजह से उनकी ले दे की, और ख़ुदा (के ग़ज़ब से) उनका कोई बचाने वाला भी न था
22ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمْ كَانَت تَّأْتِيهِمْ رُسُلُهُم بِالْبَيِّنَاتِ فَكَفَرُوا فَأَخَذَهُمُ اللَّهُ ۚ إِنَّهُ قَوِيٌّ شَدِيدُ الْعِقَابِ
ये इस सबब से कि उनके पैग़म्बरान उनके पास वाज़ेए व रौशन मौजिज़े ले कर आए इस पर भी उन लोगों ने न माना तो ख़ुदा ने उन्हें ले डाला इसमें तो शक ही नहीं कि वह क़वी (और) सख्त अज़ाब वाला है
23وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا مُوسَىٰ بِآيَاتِنَا وَسُلْطَانٍ مُّبِينٍ
और हमने मूसा को अपनी निशानियाँ और रौशन दलीलें देकर
ग़ाफिरकुरान सूची
85आयत
मक्कीRevelation
21आयत

अनुवाद — ग़ाफिर 21

सूरा ग़ाफिर आयत 21 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : क्या उन लोगों ने रूए ज़मीन पर चल फिर कर…

सूरा आयत 21/85 — ग़ाफिर غافر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: ग़ाफिर सुनें, ग़ाफिर अनुवाद, ग़ाफिर mp3, ग़ाफिर pdf. आयत 19–23. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए