अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- آثَارًا: धरती पर छोड़ी गई निशानियाँ, जैसे मजबूत इमारतें, महल और सभ्यता के अवशेष।
- وَاقٍ: बचाने वाला, रक्षा करने वाला, जो अल्लाह के अज़ाब को टाल सके।
तफ़सीर (व्याख्या):
क्या ये लोग धरती पर चलते-फिरते नहीं हैं कि देखते कि उनसे पहले गुज़री हुई उम्मतों का अंजाम क्या हुआ? जिन्होंने अपने नबियों को झुठलाया और अल्लाह की नाफ़रमानी की। ये पिछली उम्मतें ताक़त और धरती पर अपने निशान छोड़ने में इनसे कहीं बढ़कर थीं — उनके जिस्म ज़्यादा मज़बूत थे, उनके महल ऊँचे और पुख़्ता थे, उनकी सभ्यता कहीं ज़्यादा तरक़्क़ी-याफ़्ता थी। लेकिन जब उन्होंने कुफ़्र और गुनाहों पर अड़े रहने का फ़ैसला किया, तो अल्लाह ने उन्हें उन्हीं के गुनाहों की वजह से पकड़ लिया — उनकी ताक़त उनके किसी काम न आई, न उनके महल उन्हें बचा सके, और न ही उनके पास कोई ऐसा था जो अल्लाह के अज़ाब को उनसे टाल सके।
ये आयत हमारे लिए एक बहुत बड़ी नसीहत है। अल्लाह तआला हमें सोचने और सीखने की दावत दे रहा है। इतिहास के पन्ने खोलिए — जो उम्मतें सबसे ज़्यादा ताक़तवर थीं, जिन्होंने धरती पर सबसे ज़्यादा तरक़्क़ी की, जब उन्होंने अल्लाह का हुक्म नहीं माना, तो उनका नामो-निशान तक मिट गया। ये सिर्फ़ एक कहानी नहीं, बल्कि एक सबक़ है कि असली ताक़त अल्लाह की तरफ़ से आती है, और जिसे अल्लाह पकड़ ले, उसे कोई नहीं बचा सकता।
इस आयत से हमें ये सीख मिलती है कि हमें अपनी ताक़त, अपने धन, अपनी तरक़्क़ी पर घमंड नहीं करना चाहिए। ये सब अल्लाह की देन है, और ये सब उसी की तरफ़ लौटना है। अगर हम अल्लाह की इबादत करें, उसके हुक्मों पर चलें, और अपने गुनाहों से तौबा करें, तो अल्लाह हमें अपनी रहमत से नवाज़ेगा। लेकिन अगर हम उसकी नाफ़रमानी करेंगे, तो हमारी ताक़त और हमारी तरक़्क़ी हमें अल्लाह के अज़ाब से नहीं बचा सकती।
ये आयत हमें ये भी बताती है कि अल्लाह इंसाफ़ करने वाला है — वो किसी पर ज़ुल्म नहीं करता, बल्कि इंसान अपने कर्मों से ख़ुद अपना अंजाम तय करता है। जो लोग अल्लाह की राह पर चलते हैं, उनके लिए उसकी रहमत और जन्नत है, और जो उसकी नाफ़रमानी करते हैं, उनके लिए उसका अज़ाब है। आइए, हम इस आयत से सबक़ लें और अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक़ बनाएँ, ताकि हम उन लोगों में से न हों जिनका अंजाम बुरा हो, बल्कि उन लोगों में से हों जिन्हें अल्लाह की रहमत और मग़फ़िरत मिले।
📜 आयत 19-23 — ग़ाफिर
अनुवाद — ग़ाफिर 21
सूरा ग़ाफिर आयत 21 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : क्या उन लोगों ने रूए ज़मीन पर चल फिर कर…सूरा आयत 21/85 — ग़ाफिर غافر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: ग़ाफिर सुनें, ग़ाफिर अनुवाद, ग़ाफिर mp3, ग़ाफिर pdf. आयत 19–23. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








