Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يَقْضِي بِالْحَقِّ: सत्य और न्याय के साथ फैसला करता है।
- يَدْعُونَ مِن دُونِهِ: जिन्हें वे अल्लाह के अलावा पुकारते हैं (अर्थात मूर्तियाँ और झूठे देवता)।
- لَا يَقْضُونَ بِشَيْءٍ: वे किसी भी चीज़ का फैसला नहीं कर सकते।
- السَّمِيعُ الْبَصِيرُ: सब कुछ सुनने वाला और सब कुछ देखने वाला।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में अपनी महानता और कुदरत का बयान करते हुए फ़रमाता है कि वही अकेला सच्चा हाकिम और न्यायाधीश है। वह अपने बंदों के बीच पूरे न्याय और इंसाफ़ के साथ फैसला करता है। उसका फैसला कभी ज़ुल्म पर आधारित नहीं होता, न ही उसमें कोई कमी या बढ़ोतरी होती है। वह हर इंसान को उसके अच्छे और बुरे कर्मों का पूरा-पूरा बदला देगा, बिना किसी की नेकी को घटाए और बिना किसी की गुनाह को बढ़ाए।
इसके विपरीत, जिन्हें मुशरिकीन अल्लाह के अलावा पुकारते हैं — चाहे वे मूर्तियाँ हों, पत्थर हों, या कोई और झूठा माबूद — वे किसी भी चीज़ का फैसला नहीं कर सकते। उनके पास न तो कोई शक्ति है, न समझ, न ही वे किसी को नुक़सान या फ़ायदा पहुँचा सकते हैं। वे तो बेजान हैं, और बेजान से क्या फैसला हो सकता है? यही उनकी नाइस्तगी और बेबसी की सबसे बड़ी दलील है कि वे किसी भी मामले में दखल नहीं दे सकते।
फिर अल्लाह तआला अपनी दो खूबियों का ज़िक्र करता है — "अस-समीउल बसीर" (सब कुछ सुनने वाला और सब कुछ देखने वाला)। यानी अल्लाह हर बात को सुनता है, चाहे वह ज़ुबान से निकले या दिल में छुपी हो। वह हर काम को देखता है, चाहे वह छोटा हो या बड़ा, खुला हो या छिपा। उसकी नज़र से कुछ भी पोशीदा नहीं है। यही वजह है कि वह हर इंसान के अमल का सही-सही हिसाब रखेगा और उसके अनुसार सज़ा या जज़ा देगा।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चा इंसाफ़ सिर्फ़ अल्लाह के पास है। इंसान चाहे कितना भी ताकतवर हो, उसका फैसला अधूरा और ग़लत हो सकता है, लेकिन अल्लाह का फैसला हर हाल में सच्चा और न्यायपूर्ण है। इसलिए हमें अपने हर मामले को अल्लाह के सुपुर्द कर देना चाहिए और उसी से इंसाफ़ की उम्मीद रखनी चाहिए। साथ ही, यह आयत हमें यह भी बताती है कि अल्लाह हमारी हर बात सुनता है और हर काम देखता है — यह हमारे लिए एक चेतावनी भी है और एक खुशखबरी भी। चेतावनी इसलिए कि हम गुनाहों से बचें, और खुशखबरी इसलिए कि हमारी नेकियाँ और दुआएँ कभी ज़ाया नहीं होतीं। अल्लाह ने हमें सुनने और देखने की जो नेमत दी है, उसका इस्तेमाल हमें अच्छे कामों में करना चाहिए, ताकि उस दिन हमारा हिसाब आसान हो जब अल्लाह हमारे सामने हमारे सारे अमल पेश करेगा।
📜 आयत 18-22 — सूरा ग़ाफिर
अनुवाद — ग़ाफिर 20
सूरा ग़ाफिर आयत 20 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और ख़ुदा ठीक ठीक हुक्म देता है, और उसके सिवा…सूरा आयत 20/85 — सूरा ग़ाफिर غافر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा ग़ाफिर सुनें, सूरा ग़ाफिर अनुवाद, सूरा ग़ाफिर mp3, सूरा ग़ाफिर pdf. आयत 18–22. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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