ग़ाफिर · 20/85
अनुवाद उच्चारण — सूरा ग़ाफिर
وَاللَّهُ يَقْضِي بِالْحَقِّ ۖ وَالَّذِينَ يَدْعُونَ مِن دُونِهِ لَا يَقْضُونَ بِشَيْءٍ ۗ إِنَّ اللَّهَ هُوَ السَّمِيعُ الْبَصِيرُ ۝٢٠
Wallaahu yaqdee bilhaqq, wallazeena yad`oona min doonihee laa yaqdoona bishai`; innal laaha Huwas Samee`ul Baseer
📖 हिंदी अर्थ
और ख़ुदा ठीक ठीक हुक्म देता है, और उसके सिवा जिनकी ये लोग इबादत करते हैं वह तो कुछ भी हुक्म नहीं दे सकते, इसमें शक नहीं कि ख़ुदा सुनने वाला देखने वाला है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَقْضِي بِالْحَقِّ: सत्य और न्याय के साथ फैसला करता है।
  • يَدْعُونَ مِن دُونِهِ: जिन्हें वे अल्लाह के अलावा पुकारते हैं (अर्थात मूर्तियाँ और झूठे देवता)।
  • لَا يَقْضُونَ بِشَيْءٍ: वे किसी भी चीज़ का फैसला नहीं कर सकते।
  • السَّمِيعُ الْبَصِيرُ: सब कुछ सुनने वाला और सब कुछ देखने वाला।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में अपनी महानता और कुदरत का बयान करते हुए फ़रमाता है कि वही अकेला सच्चा हाकिम और न्यायाधीश है। वह अपने बंदों के बीच पूरे न्याय और इंसाफ़ के साथ फैसला करता है। उसका फैसला कभी ज़ुल्म पर आधारित नहीं होता, न ही उसमें कोई कमी या बढ़ोतरी होती है। वह हर इंसान को उसके अच्छे और बुरे कर्मों का पूरा-पूरा बदला देगा, बिना किसी की नेकी को घटाए और बिना किसी की गुनाह को बढ़ाए।

इसके विपरीत, जिन्हें मुशरिकीन अल्लाह के अलावा पुकारते हैं — चाहे वे मूर्तियाँ हों, पत्थर हों, या कोई और झूठा माबूद — वे किसी भी चीज़ का फैसला नहीं कर सकते। उनके पास न तो कोई शक्ति है, न समझ, न ही वे किसी को नुक़सान या फ़ायदा पहुँचा सकते हैं। वे तो बेजान हैं, और बेजान से क्या फैसला हो सकता है? यही उनकी नाइस्तगी और बेबसी की सबसे बड़ी दलील है कि वे किसी भी मामले में दखल नहीं दे सकते।

फिर अल्लाह तआला अपनी दो खूबियों का ज़िक्र करता है — "अस-समीउल बसीर" (सब कुछ सुनने वाला और सब कुछ देखने वाला)। यानी अल्लाह हर बात को सुनता है, चाहे वह ज़ुबान से निकले या दिल में छुपी हो। वह हर काम को देखता है, चाहे वह छोटा हो या बड़ा, खुला हो या छिपा। उसकी नज़र से कुछ भी पोशीदा नहीं है। यही वजह है कि वह हर इंसान के अमल का सही-सही हिसाब रखेगा और उसके अनुसार सज़ा या जज़ा देगा।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चा इंसाफ़ सिर्फ़ अल्लाह के पास है। इंसान चाहे कितना भी ताकतवर हो, उसका फैसला अधूरा और ग़लत हो सकता है, लेकिन अल्लाह का फैसला हर हाल में सच्चा और न्यायपूर्ण है। इसलिए हमें अपने हर मामले को अल्लाह के सुपुर्द कर देना चाहिए और उसी से इंसाफ़ की उम्मीद रखनी चाहिए। साथ ही, यह आयत हमें यह भी बताती है कि अल्लाह हमारी हर बात सुनता है और हर काम देखता है — यह हमारे लिए एक चेतावनी भी है और एक खुशखबरी भी। चेतावनी इसलिए कि हम गुनाहों से बचें, और खुशखबरी इसलिए कि हमारी नेकियाँ और दुआएँ कभी ज़ाया नहीं होतीं। अल्लाह ने हमें सुनने और देखने की जो नेमत दी है, उसका इस्तेमाल हमें अच्छे कामों में करना चाहिए, ताकि उस दिन हमारा हिसाब आसान हो जब अल्लाह हमारे सामने हमारे सारे अमल पेश करेगा।



📜 आयत 18-22 — सूरा ग़ाफिर

18وَأَنذِرْهُمْ يَوْمَ الْآزِفَةِ إِذِ الْقُلُوبُ لَدَى الْحَنَاجِرِ كَاظِمِينَ ۚ مَا لِلظَّالِمِينَ مِنْ حَمِيمٍ وَلَا شَفِيعٍ يُطَاعُ
(ऐ रसूल) तुम उन लोगों को उस दिन से डराओ जो अनक़रीब आने वाला है जब लोगों के कलेजे घुट घुट के (मारे डर के) मुँह को आ जाएंगें (उस वक्त) न तो सरकशों का कोई सच्चा दोस्त होगा और न कोई ऐसा सिफारिशी जिसकी बात मान ली जाए
19يَعْلَمُ خَائِنَةَ الْأَعْيُنِ وَمَا تُخْفِي الصُّدُورُ
ख़ुदा तो ऑंखों की दुज़दीदा (ख़यानत की) निगाह को भी जानता है और उन बातों को भी जो (लोगों के) सीनों में पोशीदा है
20وَاللَّهُ يَقْضِي بِالْحَقِّ ۖ وَالَّذِينَ يَدْعُونَ مِن دُونِهِ لَا يَقْضُونَ بِشَيْءٍ ۗ إِنَّ اللَّهَ هُوَ السَّمِيعُ الْبَصِيرُ
और ख़ुदा ठीक ठीक हुक्म देता है, और उसके सिवा जिनकी ये लोग इबादत करते हैं वह तो कुछ भी हुक्म नहीं दे सकते, इसमें शक नहीं कि ख़ुदा सुनने वाला देखने वाला है
21۞ أَوَلَمْ يَسِيرُوا فِي الْأَرْضِ فَيَنظُرُوا كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ الَّذِينَ كَانُوا مِن قَبْلِهِمْ ۚ كَانُوا هُمْ أَشَدَّ مِنْهُمْ قُوَّةً وَآثَارًا فِي الْأَرْضِ فَأَخَذَهُمُ اللَّهُ بِذُنُوبِهِمْ وَمَا كَانَ لَهُم مِّنَ اللَّهِ مِن وَاقٍ
क्या उन लोगों ने रूए ज़मीन पर चल फिर कर नहीं देखा कि जो लोग उनसे पहले थे उनका अन्जाम क्या हुआ (हालाँकि) वह लोग कुवत (शान और उम्र सब) में और ज़मीन पर अपनी निशानियाँ (यादगारें इमारतें) वग़ैरह छोड़ जाने में भी उनसे कहीं बढ़ चढ़ के थे तो ख़ुदा ने उनके गुनाहों की वजह से उनकी ले दे की, और ख़ुदा (के ग़ज़ब से) उनका कोई बचाने वाला भी न था
22ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمْ كَانَت تَّأْتِيهِمْ رُسُلُهُم بِالْبَيِّنَاتِ فَكَفَرُوا فَأَخَذَهُمُ اللَّهُ ۚ إِنَّهُ قَوِيٌّ شَدِيدُ الْعِقَابِ
ये इस सबब से कि उनके पैग़म्बरान उनके पास वाज़ेए व रौशन मौजिज़े ले कर आए इस पर भी उन लोगों ने न माना तो ख़ुदा ने उन्हें ले डाला इसमें तो शक ही नहीं कि वह क़वी (और) सख्त अज़ाब वाला है
ग़ाफिरकुरान सूची
85आयत
मक्कीअवतरण स्थान
20आयत

अनुवाद — ग़ाफिर 20

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Thursday, October 1, 2026

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