अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- ذَرُونِي — मुझे छोड़ दो, अर्थात मुझे रास्ते से हटो।
- أَقْتُلْ مُوسَى — मैं मूसा को क़त्ल कर दूँ।
- وَلْيَدْعُ رَبَّهُ — और वह अपने रब को पुकार ले (अर्थात जो वह दावा करता है कि उसका रब है, उससे मदद माँग ले)।
- يُبَدِّلَ دِينَكُمْ — तुम्हारे दीन (धर्म) को बदल दे।
- يُظْهِرَ فِي الْأَرْضِ الْفَسَادَ — धरती में फ़साद (बिगाड़) फैला दे।
तफ़सीर:
फ़िरऔन ने अपनी क़ौम के सरदारों और बुज़ुर्गों से कहा: "मुझे रास्ते से हटो, मुझे मूसा को क़त्ल करने दो।" वह जानता था कि उसकी क़ौम के कुछ लोग मूसा (अलैहिस्सलाम) को क़त्ल करने से रोकते थे, इसलिए उसने उन्हें संबोधित करते हुए कहा कि मुझे छोड़ दो, मैं उसे ख़त्म कर दूँ। फिर उसने तंज़ (व्यंग्य) के अंदाज़ में कहा: "और वह अपने रब को पुकार ले, जिसके बारे में वह दावा करता है कि उसने उसे भेजा है — देखते हैं कि क्या वह उसे मेरे क़त्ल से बचा पाता है!" यानी फ़िरऔन अपने ग़ुरूर और ताक़त के नशे में यह सोचता था कि मूसा का रब उसे मेरे हाथ से नहीं बचा सकता।
फिर उसने अपनी इस हरकत को जायज़ ठहराने के लिए एक झूठा बहाना बनाया और कहा: "मुझे डर है कि वह तुम्हारे दीन को बदल न दे — यानी जिस धर्म पर तुम चल रहे हो, उसे बदलकर तुम्हें अपने रब की इबादत की तरफ न मोड़ दे — या वह धरती में फ़साद न फैला दे, यानी तुम्हारे दीन और दुनिया दोनों को तबाह कर दे, और उसके पीछे चलने वालों की वजह से क़त्ल-ओ-ख़ून और बिगाड़ पैदा हो जाए।"
ग़ौरतलब है कि फ़िरऔन ख़ुद सबसे बड़ा ज़ालिम और फ़सादी था, लेकिन उसने सच्चाई को छिपाने के लिए यह नाटक रचा कि मूसा (अलैहिस्सलाम) फ़साद फैलाने वाले हैं। यह उन बातिल ताक़तों का हमेशा से तरीक़ा रहा है कि वे हक़ के दावेदारों पर इल्ज़ाम लगाते हैं, जबकि असल फ़साद उन्हीं के हाथों में होता है।
इस आयत में हमारे लिए बड़ी सीख है कि सच्चाई के दुश्मन चाहे कितनी भी ताक़तवर क्यों न हों, वे अल्लाह के नबियों और उनके पैरोकारों को रोक नहीं सकते। अल्लाह अपने बन्दों की हिफ़ाज़त करता है, और फ़िरऔन की यह साज़िश उसके अपने ही ख़िलाफ़ पड़ी। आज भी जो लोग अल्लाह के दीन की दावत देते हैं, उन्हें तरह-तरह की धमकियाँ और इल्ज़ामात का सामना करना पड़ता है, लेकिन अल्लाह का वादा है कि वह अपने दीन की मदद करेगा और सच्चे लोगों को कामयाबी देगा। हमें चाहिए कि हम मूसा (अलैहिस्सलाम) की तरह अल्लाह पर भरोसा रखें और उसकी राह में डटे रहें, क्योंकि अंजाम तो अल्लाह के मुत्तक़ियों (परहेज़गारों) के लिए ही है।
📜 आयत 24-28 — ग़ाफिर
अनुवाद — ग़ाफिर 26
सूरा ग़ाफिर आयत 26 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और फिरऔन कहने लगा मुझे छोड़ दो कि मैं मूसा…सूरा आयत 26/85 — ग़ाफिर غافر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: ग़ाफिर सुनें, ग़ाफिर अनुवाद, ग़ाफिर mp3, ग़ाफिर pdf. आयत 24–28. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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