ग़ाफिर · 26/85
अनुवाद उच्चारण — ग़ाफिर
وَقَالَ فِرْعَوْنُ ذَرُونِي أَقْتُلْ مُوسَىٰ وَلْيَدْعُ رَبَّهُ ۖ إِنِّي أَخَافُ أَن يُبَدِّلَ دِينَكُمْ أَوْ أَن يُظْهِرَ فِي الْأَرْضِ الْفَسَادَ ۝٢٦
Wa qaala Fir`awnu zarooneee aqtul Moosaa walyad`u Rabbahoo inneee akhaafu ai yubaddila deenakum aw ai yuzhira fil ardil fasaad
📖 हिंदी अर्थ
और फिरऔन कहने लगा मुझे छोड़ दो कि मैं मूसा को तो क़त्ल कर डालूँ, और ( मैं देखूँ ) अपने परवरदिगार को तो अपनी मदद के लिए बुलालें (भाईयों) मुझे अन्देशा है कि (मुबादा) तुम्हारे दीन को उलट पुलट कर डाले या मुल्क में फसाद पैदा कर दें
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • ذَرُونِي — मुझे छोड़ दो, अर्थात मुझे रास्ते से हटो।
  • أَقْتُلْ مُوسَى — मैं मूसा को क़त्ल कर दूँ।
  • وَلْيَدْعُ رَبَّهُ — और वह अपने रब को पुकार ले (अर्थात जो वह दावा करता है कि उसका रब है, उससे मदद माँग ले)।
  • يُبَدِّلَ دِينَكُمْ — तुम्हारे दीन (धर्म) को बदल दे।
  • يُظْهِرَ فِي الْأَرْضِ الْفَسَادَ — धरती में फ़साद (बिगाड़) फैला दे।

तफ़सीर:

फ़िरऔन ने अपनी क़ौम के सरदारों और बुज़ुर्गों से कहा: "मुझे रास्ते से हटो, मुझे मूसा को क़त्ल करने दो।" वह जानता था कि उसकी क़ौम के कुछ लोग मूसा (अलैहिस्सलाम) को क़त्ल करने से रोकते थे, इसलिए उसने उन्हें संबोधित करते हुए कहा कि मुझे छोड़ दो, मैं उसे ख़त्म कर दूँ। फिर उसने तंज़ (व्यंग्य) के अंदाज़ में कहा: "और वह अपने रब को पुकार ले, जिसके बारे में वह दावा करता है कि उसने उसे भेजा है — देखते हैं कि क्या वह उसे मेरे क़त्ल से बचा पाता है!" यानी फ़िरऔन अपने ग़ुरूर और ताक़त के नशे में यह सोचता था कि मूसा का रब उसे मेरे हाथ से नहीं बचा सकता।

फिर उसने अपनी इस हरकत को जायज़ ठहराने के लिए एक झूठा बहाना बनाया और कहा: "मुझे डर है कि वह तुम्हारे दीन को बदल न दे — यानी जिस धर्म पर तुम चल रहे हो, उसे बदलकर तुम्हें अपने रब की इबादत की तरफ न मोड़ दे — या वह धरती में फ़साद न फैला दे, यानी तुम्हारे दीन और दुनिया दोनों को तबाह कर दे, और उसके पीछे चलने वालों की वजह से क़त्ल-ओ-ख़ून और बिगाड़ पैदा हो जाए।"

ग़ौरतलब है कि फ़िरऔन ख़ुद सबसे बड़ा ज़ालिम और फ़सादी था, लेकिन उसने सच्चाई को छिपाने के लिए यह नाटक रचा कि मूसा (अलैहिस्सलाम) फ़साद फैलाने वाले हैं। यह उन बातिल ताक़तों का हमेशा से तरीक़ा रहा है कि वे हक़ के दावेदारों पर इल्ज़ाम लगाते हैं, जबकि असल फ़साद उन्हीं के हाथों में होता है।

इस आयत में हमारे लिए बड़ी सीख है कि सच्चाई के दुश्मन चाहे कितनी भी ताक़तवर क्यों न हों, वे अल्लाह के नबियों और उनके पैरोकारों को रोक नहीं सकते। अल्लाह अपने बन्दों की हिफ़ाज़त करता है, और फ़िरऔन की यह साज़िश उसके अपने ही ख़िलाफ़ पड़ी। आज भी जो लोग अल्लाह के दीन की दावत देते हैं, उन्हें तरह-तरह की धमकियाँ और इल्ज़ामात का सामना करना पड़ता है, लेकिन अल्लाह का वादा है कि वह अपने दीन की मदद करेगा और सच्चे लोगों को कामयाबी देगा। हमें चाहिए कि हम मूसा (अलैहिस्सलाम) की तरह अल्लाह पर भरोसा रखें और उसकी राह में डटे रहें, क्योंकि अंजाम तो अल्लाह के मुत्तक़ियों (परहेज़गारों) के लिए ही है।

🎧 सुनें

📜 आयत 24-28 — ग़ाफिर

24إِلَىٰ فِرْعَوْنَ وَهَامَانَ وَقَارُونَ فَقَالُوا سَاحِرٌ كَذَّابٌ
फिरऔन और हामान और क़ारून के पास भेजा तो वह लोग कहने लगे कि (ये तो) एक बड़ा झूठा (और) जादूगर है
25فَلَمَّا جَاءَهُم بِالْحَقِّ مِنْ عِندِنَا قَالُوا اقْتُلُوا أَبْنَاءَ الَّذِينَ آمَنُوا مَعَهُ وَاسْتَحْيُوا نِسَاءَهُمْ ۚ وَمَا كَيْدُ الْكَافِرِينَ إِلَّا فِي ضَلَالٍ
ग़रज़ जब मूसा उन लोगों के पास हमारी तरफ से सच्चा दीन ले कर आये तो वह बोले कि जो लोग उनके साथ ईमान लाए हैं उनके बेटों को तो मार डालों और उनकी औरतों को (लौन्डिया बनाने के लिए) ज़िन्दा रहने दो और काफ़िरों की तद्बीरें तो बे ठिकाना होती हैं
26وَقَالَ فِرْعَوْنُ ذَرُونِي أَقْتُلْ مُوسَىٰ وَلْيَدْعُ رَبَّهُ ۖ إِنِّي أَخَافُ أَن يُبَدِّلَ دِينَكُمْ أَوْ أَن يُظْهِرَ فِي الْأَرْضِ الْفَسَادَ
और फिरऔन कहने लगा मुझे छोड़ दो कि मैं मूसा को तो क़त्ल कर डालूँ, और ( मैं देखूँ ) अपने परवरदिगार को तो अपनी मदद के लिए बुलालें (भाईयों) मुझे अन्देशा है कि (मुबादा) तुम्हारे दीन को उलट पुलट कर डाले या मुल्क में फसाद पैदा कर दें
27وَقَالَ مُوسَىٰ إِنِّي عُذْتُ بِرَبِّي وَرَبِّكُم مِّن كُلِّ مُتَكَبِّرٍ لَّا يُؤْمِنُ بِيَوْمِ الْحِسَابِ
और मूसा ने कहा कि मैं तो हर मुताकब्बिर से जो हिसाब के दिन (क़यामत पर ईमान नहीं लाता) अपने और तुम्हारे परवरदिगार की पनाह ले चुका हूं
28وَقَالَ رَجُلٌ مُّؤْمِنٌ مِّنْ آلِ فِرْعَوْنَ يَكْتُمُ إِيمَانَهُ أَتَقْتُلُونَ رَجُلًا أَن يَقُولَ رَبِّيَ اللَّهُ وَقَدْ جَاءَكُم بِالْبَيِّنَاتِ مِن رَّبِّكُمْ ۖ وَإِن يَكُ كَاذِبًا فَعَلَيْهِ كَذِبُهُ ۖ وَإِن يَكُ صَادِقًا يُصِبْكُم بَعْضُ الَّذِي يَعِدُكُمْ ۖ إِنَّ اللَّهَ لَا يَهْدِي مَنْ هُوَ مُسْرِفٌ كَذَّابٌ
और फिरऔन के लोगों में एक ईमानदार शख्स (हिज़कील) ने जो अपने ईमान को छिपाए रहता था (लोगों से कहा) कि क्या तुम लोग ऐसे शख्स के क़त्ल के दरपै हो जो (सिर्फ) ये कहता है कि मेरा परवरदिगार अल्लाह है) हालाँकि वह तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से तुम्हारे पास मौजिज़े लेकर आया और अगर (बिल ग़रज़) ये शख्स झूठा है तो इसके झूठ का बवाल इसी पर पड़ेगा और अगर यह कहीं सच्चा हुआ तो जिस (अज़ाब की) तुम्हें ये धमकी देता है उसमें से कुछ तो तुम लोगों पर ज़रूर वाकेए होकर रहेगा बेशक ख़ुदा उस शख्स की हिदायत नहीं करता जो हद से गुज़रने वाला (और) झूठा हो
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अनुवाद — ग़ाफिर 26

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Tuesday, August 18, 2026

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